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अर्थव्यवस्थाः गहराती सुस्ती का एहसास

औद्योगिक विकास दर लगातार सुस्त है—और यहां तक कि गिर भी रही है—फिर भी केंद्रीय बैंक के सामने विकास दर में तेजी लाने के लिए प्रमुख ब्याज दरों को और घटाने की कोई गुंजाइश नहीं बची है

इलस्ट्रेशनः तन्मय चक्रवर्ती
इलस्ट्रेशनः तन्मय चक्रवर्ती
अपडेटेड 25 दिसंबर , 2019

सरकार की तरफ से जारी किए गए वृहद् आर्थिक आंकड़े ग्रोथ को रक्रतार देने के लिए बेताब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के समक्ष उपस्थित दुविधा की ओर इशारा करते हैं. हालांकि औद्योगिक विकास दर लगातार सुस्त है—और यहां तक कि गिर भी रही है—फिर भी केंद्रीय बैंक के सामने विकास दर में तेजी लाने के लिए प्रमुख ब्याज दरों को और घटाने की कोई गुंजाइश नहीं बची है, क्योंकि बढ़ती महंगाई अब वाकई बड़े खतरे के रूप में सामने नजर आ रही है. यह पिछले कई महीनों के उलट है, जब महंगाई कम थी तो आरबीआइ के पास इस कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक रेपो दरों (वह दर जिस पर बैंक, आरबीआइ से उधार लेते हैं) में 135 बेसिक अंकों की कटौती को जायज ठहराने का आधार था.

प्याज, सब्जियों और दालों की बढ़ती कीमतों ने खुदरा खाद्य महंगाई को दोहरे अंकों में (नवंबर 2019 में 10.1 फीसदी) पहुंचा दिया है. वहीं औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आइआइपी) के जरिये मापी जाने वाली औद्योगिक विकास दर नकारात्मक हो गई है. इस संकेतक ने अक्तूबर, 2019 में 3.8 फीसद की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की है जो पिछले साल अक्तूबर में दर्ज की गई 8.4 फीसद की वृद्धि दर से बहुत ज्यादा गिरावट को दिखाती है.

नकारात्मक औद्योगिक विकास दर के कारण आरबीआइ की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) फिर से ब्याज दरों में कटौती को तत्पर हो गई होती, लेकिन अब ऐसा होने की संभावना कम है. दिसंबर की 5 तारीख को आरबीआइ ने दरों में कटौती का सिलसिला रोक दिया.

औद्योगिक खिलाडिय़ों को इससे निराशा ही हुई होगी जो उलटे दरों में ज्यादा कटौती की गुहार लगाए जा रहे थे, क्योंकि इस साल फरवरी के बाद से अभी तक जब भी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों की समीक्षा की तो हर बार केवल 25 बेसिक अंकों की ही कटौती की.

खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने खुदरा महंगाई दर को नवंबर में तीन साल के अधिकतम स्तर 5.5 फीसद पर पहुंचा दिया.

इस तरह उसने लगातार दूसरे महीने एमपीसी के 4 फीसद के मध्यावधि मुद्रास्फीति लक्ष्य के मध्य-बिंदु को पार कर लिया.

जरूरत से ज्यादा बारिश के कारण फसल को हुए नुक्सान के बाद आपूर्ति में कमी की वजह से प्याज की कीमतें नवंबर में 145 फीसद बढ़ गईं, जबकि उससे पिछले महीने में वे 98 फीसद बढ़ी थीं.

पिछले तीन महीने के अपने रुख को बदलते हुए थोक मूल्य सूचकांक (डब्लूपीआइ) पर आधारित महंगाई भी नवंबर में 40 बेसिक अंक बढ़कर 0.6 फीसद हो गई. इसकी वजह सब्जियों, खास तौर पर प्याज की कीमतों में तेज वृद्धि ही रही. प्याज की कीमतों की डब्लूपीआइ में 0.16 फीसद और सीपीआइ में 0.64 फीसद हिस्सेदारी है. एक टिप्पणी में केयर रेटिंग्स का कहना था, ''कीमत में सौ फीसद तक की वृद्धि सूचकांक में भी उसी अनुपात में वृद्धि कर सकती है, जिसका नतीजा कुल मुद्रास्फीति की दर पर और फिर मौद्रिक नीति के भविष्य पर पड़ता है.'' यहां जमाखोरों की भूमिका को भी ध्यान में रखना होगा—सट्टेबाज दखल देकर आपूर्ति को रोक देते हैं ताकि कीमतों में और वृद्धि हो सके. इसी वजह से सरकार को प्याज भंडारण की सीमा तय करनी पड़ी और आयात के आदेश देने पड़े हैं जबकि प्याज निर्यात पर रोक बरकरार है.

लगातार तीसरे महीने औद्योगिक उत्पादन के सिकुडऩे की वजहों को जानना इतना मुश्किल नहीं है. त्योहारी मौसम भी ठंडा रहा और जो भी बिक्री हुई, वह मांग में गिरावट को थामने में पूरी तरह नाकाम रही. निवेश को प्रोत्साहन देने वाले कई कदमों के बावजूद तमाम व्यवसाय किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं हैं. दूसरी तरफ, रिजर्व बैंक की ब्याज दरों में कटौती का खुदरा ब्याज दरों पर कोई खास असर नहीं पड़ा.

सरकार ने जितने भी उपायों की घोषणा की है, जिनमें कॉर्पोरेट टैक्स की दरों में बड़ी कटौती भी शामिल है, सब के निशाने पर आपूर्ति का पक्ष था, लेकिन मांग तो अब भी ठंडी ही बनी हुई है.

यह अक्तूबर में 2.1 फीसद की नकारात्मक वृद्धि दर्ज करने वाले मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र से भी प्रतिबिंबित होती है जो फैक्टरी उत्पादन का तीन-चौथाई है. टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं में भी पिछले महीने की तुलना में और गिरावट देखी गई. कार और घरेलू उपकरणों का उत्पादन अक्तूबर में और 18 फीसद घट गया.

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के 23 उद्योगों में से 18 ने अक्तूबर के महीने में उत्पादन में सिकुडऩ दिखाई. दस ने उत्पादन में दोहरे अंकों की गिरावट दर्ज की, जिनमें कंप्यूटर्स, इलेक्ट्रॉनिक्स व ऑप्टिकल उत्पाद (-31.3 फीसद), मोटर वाहन (-27.9 फीसद), फैब्रिकेटेड धातु उत्पाद (-19.5 फीसद), अन्य परिवहन उपकरण (-18.8 फीसद) और मशीनरी उपकरण (-18.1 फीसद) शामिल हैं.

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