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स्मार्ट मनीः नियमित आय के उपाय

राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) अनेक प्लान की पेशकश करती है जिसमें आप जरूरत के हिसाब से भुगतान कर सकते हैं

इलस्ट्रेशनः तन्मय चक्रवर्ती
इलस्ट्रेशनः तन्मय चक्रवर्ती
अपडेटेड 2 अक्टूबर , 2019

अबीर रे

राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) 2004 में अंशदान आधारित पेंशन योजना के तौर पर लाई गई थी. इसका मकसद लोगों को सेवानिवृत्त होने के बाद के सालों में आर्थिक सुरक्षा मुहैया कराना था. आप रिटायर होने तक एनपीएस में निवेश करते रह सकते हैं. 60 साल का होने पर पूरी रकम निकालने या निकासी को कुछ और सालों (अधिकतम 70 की उम्र तक) के लिए टालने का विकल्प मिलता है. सेवानिवृत्ति लाभ दो हिस्सों में दिए जाते हैं, एक एकमुश्त और दूसरा एन्युइटी या सालाना भत्ते की खरीद.

यह अनिवार्य है कि रिटायरमेंट की पूरी रकम में से 40 फीसदी का इस्तेमाल एक एन्युइटी प्लान खरीदने में करें ताकि आपके रिटायरमेंट के दौरान नियमित मासिक/तिमाही/सालाना आमदनी होती रहे. एकमुश्त रकम के तौर पर पूरी धनराशि में से अधिकतम 60 फीसदी निकाल सकते हैं. अगर सेवानिवृत्ति लाभों को टालना चाहते हैं, तो एकमुश्त और एन्युइटी दोनों को या दोनों में से एक को मुल्तवी करने का विकल्प होता है.

एकमुश्त रकम का इस्तेमाल करने या निवेश करने की गुंजाइश होती है. अलबत्ता एन्युइटी के मामले में (यदि टाला नहीं गया है), एनपीएस के तहत दिए गए विकल्पों में से ही चुनना होता है. यहीं मामला थोड़ा-सा पेचदार हो जाता है; ज्यादातर निवेशकों को पता नहीं होता कि ये विकल्प कैसे कारगर होंगे. यहां इन्हें समझा जा सकता है.

एन्युइटी भुगतान विकल्प

फिलहाल एनपीएस के तहत पांच एन्युइटी सेवा प्रदाता (एएसपी) हैं, जिनमें भारतीय जीवन बीमा निगम भी शामिल है. एन्युइटी के अनिवार्य तौर पर दो किस्म के प्लान हैं. इंडियनमनी डॉट कॉम के संस्थापक और सीईओ सी.एस. सुधीर कहते हैं, ''फिक्स्ड या सावधि एन्युइटी में निश्चित अवधि तक लगातार भुगतान करना पड़ता है. वेरिएबल या बदलती एन्युइटी में एन्युइटी का भुगतान भी बदलता रहता है.''

बदलते भुगतान वाला एन्युइटी प्लान मुख्य रूप से ऐसा प्लान है जिसमें भुगतान हर साल बढ़ता जाता है ताकि यह महंगाई की वजह से खर्चों में बढ़ोतरी को संभालने में मदद कर सके. नियमित भुगतान के लिए एन्युइटी प्लान का निश्चित अवधि (5-10-15-20 साल) के लिए या जिंदगी के आखिर तक का, जिसमें लाभार्थी के मरने तक भुगतान चलता रहता है, एक विकल्प चुनना होता है.

एन्युइटी प्लान को एकल जीवन एन्युइटी और संयुक्त जीवन एन्युइटी में भी बांटा जाता है. मायमनीमंत्रा डॉट कॉम के संस्थापक और एमडी राज खोसला कहते हैं, ''एकल जीवन एन्युइटी नियमित मासिक भुगतान की पेशकश करती है जबकि संयुक्त जीवन एन्युइटी धारक और जीवनसाथी दोनों को कवर करती है. मासिक भुगतान एकल जीवन एन्युइटी में ज्यादा है, पर संयुक्त जीवन एन्युइटी धारक की मौत के बाद जीवित जीवनसाथी को सुरक्षा मुहैया करती है.''

सही एन्युइटी विकल्प चुनें

सावधि नियमित आय का विकल्प उन लोगों के लिए कारगर होता है जिनके पास कुछ बचत और संपत्तियां है जिनमें पॉलिसी की अवधि के दौरान बढ़ोतरी होती रहती है; भुगतान बाद में नियमित आमदनी देता रहता है. अगर ऐसी कोई संपत्ति नहीं है तो आपके पास दूसरे विकल्प भी हैं. लैडर7फाइनेंशियल एडवाइसरीज के संस्थापक सुरेश सदागोपन कहते हैं, ''सबसे उपयुक्त एन्युइटी विकल्प तो खरीद की वापसी वाली जीवन एन्युइटी या खरीद कीमत की वापसी वाली संयुक्त जीवन एन्युइटी ही होंगे.''

अगर आपके चुने गए एन्युइटी विकल्प से होने वाली नियमित आमदनी पर्याप्त है, तो एकमुश्त रकम को आपातस्थिति से निपटने के लिए रख सकते हैं. अगर नियमित आमदनी कम है, तो इसे बढ़ाने के लिए एकमुश्त रकम से एक हिस्से का इस्तेमाल तत्काल एन्युइटी विकल्प खरीदने के लिए कर सकते हैं. जीवन प्रत्याशा जिस तरह बढ़ रही है, उसको देखते हुए एन्युइटी प्लान बढ़ाना ज्यादा अच्छा विकल्प होगा क्योंकि यह महंगाई का ध्यान रखता है.

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