अगस्त महीने की 22 तारीख को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) जब दिल्ली के जंतर मंतर पर कश्मीर के ताजा हालात को लेकर प्रदर्शन की अगुआई कर रहा था, ठीक उसी वक्त भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में यह आकलन किया जा रहा था कि कश्मीर का मुद्दा क्या तमिलनाडु में भाजपा की पैठ बना सकता है? आकलन में जुटे भाजपा के तीन महासचिव और दो केंद्रीय मंत्री आखिरकार इस नतीजे पर पहुंचे कि तमिलनाडु में पैठ बनाने के लिए यह मुद्दा मुफीद है.
राज्य इकाई को कहा गया कि सितंबर की 1 तारीख से लेकर 30 तारीख तक कश्मीर के मुद्दे (अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने) को आजादी के बाद देश के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में घर-घर तक जरूर पहुंचाएं.
भाजपा नेताओं का कहना है कि 'एक देश, एक संविधान' हर भारतीय का सपना था. कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने से यह सपना पूरा हो गया है, जो आजादी के बाद देश की सबसे बड़ी उपलब्धि है. इसलिए भाजपा देश भर में जनजागरण अभियान चलाकर लोगों को इसके बारे में बताएगी. सभी राज्यों की राजधानी सहित 35 बड़े स्थानों पर कार्यक्रम किया जाएगा और टीयर-2 या टीयर-3 के 370 शहरों में भी यह अभियान चलाया जाएगा.
यह संख्या अनुच्छेद 370 और उपबंध 35ए का प्रतीक है. केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कहते हैं, ''यह कार्यक्रम पूरे देश के लिए है और हर राज्य में इसे समर्थन मिलेगा. यह तय है.''
भाजपा तमिलनाडु में एक दर्जन शहरों में यह जनजागरण कार्यक्रम चलाएगी. तमिलनाडु भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है, ''केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से साफ कहा गया है कि यह कार्यक्रम एक ऐसा अवसर है जिसके जरिए भाजपा अपने दम पर राज्य में पैठ बना सकती है, इसलिए कोई भी कोताही नहीं की जाए.'' तमिलनाडु की राजनीति के जानकार एन. अशोकन कहते हैं, ''राष्ट्रीय भावना ऐसी होती है जिस पर तमिलनाडु की भावना देश से जुड़ी होती है.
इसलिए अगर कश्मीर के मुद्दे को भाजपा राष्ट्रीय भावना से जोडऩे में सफल रही तो दक्षिण के इस राज्य में पार्टी अपनी जगह बनाने का मौका पा सकती है.'' अशोकन कहते हैं, ''जिस तरह से द्रमुक, दिल्ली जाकर कश्मीर के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ स्टैंड लेता है वह खुद में तमिलनाडु में कश्मीर का चर्चा छेडऩे के लिए भाजपा को प्लेटफॉर्म देने जैसा है.''
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