scorecardresearch

पश्चिम बंगाल-कांग्रेस और वाम साथ-साथ

राहुल गांधी ने फिलहाल सीट बंटवारे के सभी मतभेद सुलझा लिए हैं.

रणनीतिक समझ- कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ वाम नेता सीताराम येचुरी
रणनीतिक समझ- कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ वाम नेता सीताराम येचुरी

राज्य में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने का मौका कांग्रेस नहीं चूकना चाहती. इसलिए वह अपने सारे पिछले मतभेद भुलाकर वाम दलों के साथ साझेदारी करने को तैयार है ताकि टीएमसी विरोधी और भाजपा विरोधी एक भी वोट बंटने न पाए. यहां तक कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने कार्यकर्ताओं की इच्छाओं के खिलाफ जाते हुए कांग्रेस की दो पारंपरिक सीटों से अपना दावा भी छोड़ दिया है.

सीपीएम ने भी अपनी सेंट्रल कमेटी की बैठक में कांग्रेस के साथ गठजोड़ को सही बताते हुए इस पर मुहर लगा दी है. 4 मार्च को जारी उसके एक लिखित बयान में कहा गया, ''यह सुनिश्चित करने के लिए कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल विरोधी और भाजपा विरोधी वोट नहीं बंटें, सेंट्रल कमेटी उपयुक्त रणनीति अपनाएगी. सेंट्रल कमेटी ने फैसला लिया है कि कांग्रेस के कब्जे वाली चार सीटों और वामपंथी कब्जे वाली दो सीटों पर कोई आपसी प्रतियोगिता नहीं होगी.''

इन छह सीटों में से दो—रायगंज और मुर्शिदाबाद—को लेकर दोनों दलों के बीच खींचतान थी. दोनों सीटों को कांग्रेस का पुराना गढ़ माना जाता है और अगर 2014 के लोकसभा चुनाव को अपवाद मान लें, तो यहां से हमेशा कांग्रेस जीतती रही है. कांग्रेस ने इन सीटों पर अपना दावा ठोक दिया क्योंकि 2014 में रायगंज में वह सिर्फ 1,600 वोटों के अंतर से हारी थी और मुर्शिदाबाद कांग्रेस के सांसद अधीर चौधरी का गढ़ है.

सीपीएम ने मुर्शिदाबाद सीट 18,000 वोट से जीती थी, वहीं रायगंज में पार्टी के मौजूदा सांसद मोहम्मद सलीम अपना निर्वाचन क्षेत्र छोडऩे के लिए तैयार नहीं थे. बंगाल कांग्रेस के नेताओं के विरोध के बावजूद, राहुल गांधी ने रायगंज और मुर्शिदाबाद पर से कांग्रेस का दावा छोड़ दिया और उन्हें सीपीएम को देने पर सहमति जता दी.

सीपीएम के सचिव सीताराम येचुरी जिन्होंने 2016 के विधानसभा में 'चुनावी सामरिक समझ' का फॉर्मूला दिया था, के मुताबिक वाम और कांग्रेस का संयुक्त वोट शेयर 38.61 फीसदी था, जबकि सत्तारूढ़ टीएमसी को 44 फीसदी वोट मिले थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में वाम दलों और कांग्रेस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था पर उनका संयुक्त वोट 39 फीसदी था, वहीं टीएमसी का वोट शेयर उससे थोड़ा ही अधिक 39.3 फीसदी था.

कांग्रेस के दिग्गज नेता अब्दुल मन्नान कहते हैं, ''ऐसे वक्त में जब टीएमसी के खिलाफ असंतोष है और नरेंद्र मोदी के खिलाफ हर ओर नाराजगी है, कांग्रेस-वाम गठबंधन को बड़ा लाभ हो सकता है.''

***

Advertisement
Advertisement