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बिहार-दल में अब तक नहीं मिले दिल

एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, ''फिर भी नीरज के हमले को नजरअंदाज करना जद (यू) के संकट को कमतर करके देखना होगा कि यह महज पार्टी में दो गुटों की लड़ाई है.'' इस मुद्दे पर नीतीश कुमार की चुप्पी से कई लोग हैरान हैं.

जद (यू) में दरार पार्टी की एक बैठक में नीतीश और किशोर
जद (यू) में दरार पार्टी की एक बैठक में नीतीश और किशोर
अपडेटेड 20 मार्च , 2019

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने युवा मतदाताओं के एक समूह के बीच हाल ही में कहा, ''मैंने लोगों को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनाने में मदद की थी.'' ऐसा कहे अभी ज्यादा दिन नहीं बीते थे कि उन्होंने एक और असहज बयान दे दिया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जुलाई 2017 में महागठबंधन छोडऩे के बाद एनडीए में शामिल होने से पहले नया जनादेश प्राप्त करना चाहिए था. किशोर के इस बयान ने जद (यू) में भूचाल ला दिया और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को नाराज कर दिया. जद (यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने तो इसे 'पार्टी की समझदारी पर सवाल उठाने' और 'व्यक्तिगत एजेंडे को आगे बढ़ाने' का प्रयास बताते हुए किशोर की खिचाई की.

विधान पार्षद और पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार वर्षों से नीतीश के भरोसेमंद सिपाही रहे हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेता आर.सी.पी. सिंह के भी करीबी माने जाते हैं. पिछले साल सितंबर में नीतीश कुमार ने किशोर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी में नंबर दो की हैसियत दे दी. अन्य वरिष्ठ नेताओं से उन्हें ज्यादा तरजीह मिलने से पार्टी में नाराजगी उभरी. वहीं, पार्टी में किशोर को नंबर दो की हैसियत देने को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) आर.सी.पी. सिंह का कद घटाने की कोशिश के रूप में भी देखा गया.

नीरज कुमार कहते हैं, ''पार्टी के एक सदस्य के लिए यह कहना कि नीतीश को नया जनादेश हासिल करना चाहिए था, साफ तौर से पार्टी की आधिकारिक लाइन के खिलाफ है.'' जद (यू) के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि नीरज कुमार को शीर्ष नेतृत्व का साथ मिला हुआ है, तभी उन्होंने इस जोरदार ढंग से किशोर को जवाब दिया है.

जद (यू) के सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर दो धड़े सक्रिय हैं: पहले गुट में वे लोग शामिल हैं जो भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखना चाहते हैं. यह खेमा पार्टी में किशोर के उभार से नाखुश है. दूसरे गुट का मानना है कि नीतीश का कद बड़ा है और उन्हें सिर्फ बिहार

तक सीमित नहीं रहना चाहिए. जद (यू) के एक अन्य नेता की मानें तो आर.सी.पी. सिंह पहले गुट की अगुआई करते हैं तो किशोर दूसरे गुट के नेता हैं. हालांकि, ऐसा इसलिए क्योंकि आर.सी.पी. सिंह को पार्टी के असरदार नेता और प्रबंधक के तौर पर नहीं देखा जाता.

राज्यभर का दौरा करने के बावजूद वे कार्यकर्ताओं में जोश भरने में असफल रहे हैं. उत्तर प्रदेश कैडर के 1984 बैच के आइएएस अधिकारी आर.सी.पी. सिंह ने नीतीश के साथ काम करने के लिए 2010 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी. वे पहली बार 2010 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रेल मंत्री रहे नीतीश कुमार के निजी सचिव थे.

दूसरी ओर, अपने स्वतंत्र विचारों की वजह से हाल के दिनों में किशोर ने अपने आलोचकों को खुद पर निशाना साधने के कई मौके दिए हैं. बिहार के सीआरपीएफ के एक जवान, जिनका शव 3 मार्च को पटना में आया, उन्हें श्रद्धांजलि देने एनडीए के नेताओं के नहीं पहुंचने

के लिए ट्विटर पर माफी मांगने से लेकर, राजनीति में प्रियंका गांधी के प्रवेश का स्वागत करने वाले पहले नेता होने तक, किशोर पार्टी के पुराने नेताओं को एक खतरे की तरह खटक रहे हैं. किशोर को 2014 में नरेंद्र मोदी और 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में जद (यू)-राजद-कांग्रेस के महाठबंधन की शानदार चुनावी कामयाबी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय भी दिया जाता है.

एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, ''फिर भी नीरज के हमले को नजरअंदाज करना जद (यू) के संकट को कमतर करके देखना होगा कि यह महज पार्टी में दो गुटों की लड़ाई है.'' इस मुद्दे पर नीतीश कुमार की चुप्पी से कई लोग हैरान हैं. लोकसभा चुनाव में एक महीने से भी कमवक्त बचा है, ऐसे में नीतीश कुमार को चुनावी चुनौतियों को पार करने के लिए अपने नए और पुराने, दोनों ही दोस्तों की जरूरत है.

''पार्टी के एक सदस्य का यह कहना कि नीतीश को नया जनादेश हासिल करना चाहिए था, पार्टी की आधिकारिक लाइन के खिलाफ है.'' नीरज कुमार, जद (यू) प्रवक्ता

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