सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा अपने-अपने अधिकार क्षेत्र वाली जांच एजेंसियों के जरिए कथित रूप से छद्म लड़ाई में जुटी हैं. जून के मध्य में जब सीबीआइ के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने कोलकाता के सीबीआइ अफसरों से यह कहा कि वे सारदा, नारदा और रोज वैली घोटालों के मामले में फाइनल चार्जशीट दाखिल करें, तो यह साफ लग रहा था कि 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले जांच तेज कर दी गई है. बताया जाता है कि इस तरह के गवाह जुटाए जा रहे हैं, जिनसे ऐसे मजबूत सुराग मिल सकें कि तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आरोप तय करने में मदद मिले.
सीबीआइ ने सारदा घोटाले के आरोपी टीएमसी सांसद कुणाल घोष से हासिल 91 पेज के एक पत्र और दस्तावेजों को शामिल किया. कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी रहे एक स्थानीय उद्योगपति से ममता की पेंटिंग की बिक्री और कोलकाता के कई कारोबारियों जैसे सारदा समूह के चेयरमैन सुदीप्त सेन और रोज वैली के गौतम कुंडू के बारे में पूछताछ की गई. कहा जा रहा है कि टीएमसी के पूर्व नेता मुकुल रॉय ने जांच अधिकारियों को बताया है कि पेंटिंग की बिक्री से हासिल राशि को एक खास बैंक अकाउंट में रखा गया है, जिसका नियंत्रण पार्टी नेताओं की एक कोर टीम के पास है.
टीएमसी नेता यह मानते हैं कि यह भाजपा की 2019 आम चुनाव की तैयारी का एक हिस्सा है जो ममता के इर्दगिर्द विवाद खड़े करना चाहती है. टीएमसी के एक सांसद पूछते हैं, ''आपको क्या लगता है, केंद्रीय जांच एजेंसियां सारदा केस में मुकुल रॉय को गवाह क्यों बनाना चाहती हैं?'' चिटफंड घोटाले में उनका नाम कहीं नहीं है, लेकिन सीबीआइ ने रॉय से कई दफा सवाल किए हैं, क्योंकि वे मुख्यमंत्री के पूर्व करीबी भरोसेमंद और टीएमसी के महासचिव रहे हैं.
अभी तक घोष ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने सारदा घोटाले मंा सीधे ममता बनर्जी का नाम लिया है. साल 2013 में अपनी गिरक्रतारी से पहले उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा था कि सारदा के चेयरमैन ने ममता को प्रधानमंत्री बनाने में मदद करने के लिए एक मीडिया हाउस खड़ा किया था.
हाल में लीक हुई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में, जिसमें कथित रूप से रॉय और भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के बीच फोन पर बातचीत है, रॉय पुलिस अफसरों सहित उन व्यक्तियों का नाम बता रहे हैं जिनसे केंद्रीय जांच एजेंसियां पूछताछ कर सकती हैं. रॉय ने इसके बाद 'ममता बनर्जी की पुलिस' पर आरोप लगाया कि वह अवैध तरीके से उनकी फोन टैपिंग करवा रही है. सोशल मीडिया पर यह ऑडियो क्लिप वायरल होने के तुरंत बाद सीबीआइ ने कई पुलिस अधिकारियों को तलब किया, जो कि सारदा घोटाले की जांच के लिए ममता सरकार की बनाई एसआइटी का हिस्सा हैं. सीबीआइ का आरोप है कि ये अधिकारी, जिन पर पहले से ही इस जांच में सहयोग न करने का आरोप है, सबूतों से छेड़छाड़ या उसे नष्ट कर सकते हैं.
केंद्रीय जांच एजेंसियां जहां टीएमसी नेताओं को घेरने की कोशिश कर रही हैं, वहीं राज्य भाजपा उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार का कहना है कि राज्य की पुलिस भाजपा समर्थकों को बदनाम करने और उन्हें गिरफ्तार करने का काम कर रही है. आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी जिष्णु बसु ने कहा कि हाल के पंचायत चुनावों से पहले भाजपा और संघ के करीब 750 समर्थकों को हिरासत में ले लिया गया.
उनके मुताबिक, आरएसएस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर आम्र्स ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया, इस आरोप पर कि उन्होंने रामनवमी के दौरान हथियारों का प्रदर्शन किया था. दिलीप घोष, शिव प्रकाश और रूपा गांगुली जैसे वरिष्ठ नेताओं पर भी मामले दर्ज किए गए हैं. भाजपा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव प्रकाश और आरएसएस नेता विद्युत मुखर्जी पर एक महिला ने छेड़छाड़ और बलात्कार का आरोप लगाया है. उसने आरएसएस के एक और नेता अमलेंदु चट्टोपाध्याय के खिलाफ धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप लगाया है.
फर्जी नौकरी घोटाले में आरोपी बनाए गए मजूमदार कहते हैं, ''हमारे नेताओं को सामाजिक रूप से शर्मिंदगी वाले मामलों में फंसाना, टीएमसी की सोची-समझी साजिश है.
टीमएसी नेताओं का कहना है कि भाजपा 2019 के आम चुनाव से पहले ममता से जुड़े विवाद खड़े करने की साजिश कर रही है.
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