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पैरानार्मलः सच या कल्पना?

स्केयरकॉन, मुंबई में आयोजित होने वाला सम्मेलन, जिसका उद्देश्य पैरानॉर्मल जगत के बारे में धारणाओं को दूर करना है

स्केयरकॉन
स्केयरकॉन
अपडेटेड 23 अक्टूबर , 2018

कॉमिक कॉन को छोड़िए अब एक नए और ज्यादा रोचक सम्मेलन की चर्चा हैः स्केयरकॉन या भारत का पहला वार्षिक पैरानार्मल कन्वेंशन. इसके लिए एक पूरा दिन भय, भूतों, उडऩतश्तरियों और पिशाच विद्या आदि पैरानॉर्मल विषयों पर चर्चा के लिए रखा गया है. इस सम्मेलन को आयोजित करने वाले संगठन पैरासाइकोलॉजी ऐंड इन्वेस्टिगेशंस रिसर्च सोसाइटी (पीएआइआरएस) के सह-संस्थापक सर्बजीत मोहंती कहते हैं, "हम पैरानॉर्मल गतिविधियों के बारे में जागरूकता पैदा करने और अंधविश्वासों और मिथकों की जगह सही संदेश फैलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. इसके जरिए लोगों का मनोरंजन करने के साथ ही हम अपना संदेश भी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.''

28 अक्तूबर को दिन भर चलने वाले इस कार्यक्रम में दो महत्वपूर्ण पैनल चर्चा होगी. "हॉरर ऐंड एंटरटेनमेंट'' के अंतर्गत फिल्मों और टेलीविजन शो में भूत-प्रेतों और अन्य पैरानॉर्मल घटनाओं को दिखाया जाएगा. पैनल में शामिल लोगों में आगामी फिल्म, द फाइनल एग्जिट, के निर्देशक ध्वनिल मेहता, पार्थ प्रोडक्शंस के प्रमुख पार्थ शाह, ट्रिप टू भानगढ़ के निर्देशक जीतेंद्र पवार और रेड एफएम के पूर्व प्रोग्रामिंग प्रमुख करण के नाम हैं.

मोहंती इस विषय पर बनी ओडिया सीरीज, माना कि ना माना, के निर्माण के दौरान अपने अनुभवों के बारे में भी बताएंगे. वे कहते हैं, "इस चर्चा के जरिए हम यह समझेंगे कि इस तरह की चीजें कैसे बनती हैं, उनकी जांच कैसे की जाती है और वे परदे पर कैसे उतारी जाती हैं.''

दूसरी चर्चा में पीएआइआरएस के सदस्य भारत में पैरानॉर्मल शोध के बारे में बात करेंगे. कई सवालों के बारे में भी चर्चा होगी, जैसे, भूतों को हमेशा सफेद रंग में क्यों दिखाया जाता है, टेलीपैथी के प्रयोगों का प्रदर्शन और वर्ष के सर्वश्रेष्ठ पैरानॉर्मल ट्रेलर की स्क्रीनिंग. इस आयोजन में पैरानॉर्मल विषयों पर काम करने वाली टीमें दर्शकों के सामने अपने जुटाए गए सबूतों को पेश करेंगी, और दर्शक उनमें से सर्वश्रेष्ठ का चुनाव करेंगे.

पीएआइआरएस का गठन मोहंती और मान्यताप्राप्त मनोविज्ञानी और रेकी की जानकार पूजा विजय ने अगस्त 2016 में किया था.

पैरानॉर्मल जांचकर्ताओं और अनुसंधानकर्ताओं, भूत-प्रेत संबंधी मनोवैज्ञानिकों, भूत-विद्या के जानकारों और आध्यात्मिक गुरुओं की टीम इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (ईएमएफ) सेंसरों या डिटेक्टरों, मोशन सेंसर कैमरों, इलेक्ट्रॉनिक वाइस फेनोमेनन (ईवीपी) रिकॉर्डरों और टच सेंसरों जैसे उपकरणों से लैस होगी ताकि वह असामान्य शक्तियों की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सके और उनका विश्लेषण कर सके.

इस सम्मेलन का उद्देश्य उनके संदेशों को बड़े दर्शक समूह तक ले जाना है. मोहंती कहते हैं, "हम तथ्यों को रखना चाहते हैं, न कि लोगों के विश्वासों को बदलना चाहते हैं. आप भले ही स्वीकार न करें, लेकिन उनकी उपेक्षा भी न करें.'' पैरानॉर्मल किस्से सबको लुभाएंगे ही, आखिर डर सबसे अधिक बिकता भी है.

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