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चुनावी समीकरणः दिग्गज मौजूद नहीं मौका सबके लिए

जे. जयललिता
जे. जयललिता
अपडेटेड 24 सितंबर , 2018

दक्षिण भारत के सबसे बड़े राज्य तमिलनाडु में अरसे बाद कद्दावर नेताओं की गैरमौजूदगी दिख रही है. अन्नाद्रमुक नेता जे.जयललिता और द्रमुक सुप्रीमो एम. करुणानिधि के निधन से भले ही सियासी शून्य की स्थिति नहीं है लेकिन दोनों नेताओं की विरासत संभालने लायक निर्विवाद नेता दोनों दलों में नहीं हैं.

दोनों दलों के मौजूदा नेतृत्व के लिए यही बात सबसे बड़ी चुनौती है और भाजपा, कांग्रेस जैसी पार्टियों के साथ ही कमल हासन और रजनीकांत जैसे फिल्मी स्टार के लिए यह एक अवसर भी है कि यहां अपने पैर जमा सकें लेकिन इस सूबे का राजनैतिक मिजाज कुछ अलग है.

जयललिता और करुणानिधि के रहते हुए तमिलनाडु में कांग्रेस या भाजपा जैसे राष्ट्रीय दल हाशिए पर ही बने रहे. राज्य में इन राष्ट्रीय दलों का न तो संगठन मजबूत हो सका, न ही कोई नेता पनप सका. अलबत्ता, केंद्रीय राजनीति में तमिलनाडु हमेशा अपनी भूमिका निभाता रहा और गठबंधन सरकार के दौर में तमिलनाडु केंद्र की सरकार बनाने और गिराने के लिए जाना जाने लगा.

तमिलनाडु के राजनैतिक मामलों के जानकार एन. अशोकन कहते हैं, ''इन दोनों नेताओं के निधन के बाद सूबे की सियासत में इतना स्कोप जरूर बन गया है कि भाजपा, अन्नाद्रमुक के कुछ नेताओं को या एक धड़े को साध कर यहां पैर पसारने में सफल हो जाए.

कांग्रेस ने इस तरह का कोई जोखिम लेने से बेहतर समझा है कि वह द्रमुक के साथ गठबंधन में रहे ताकि लोकसभा चुनाव के दौरान और बाद में दक्षिण के इस राज्य से उसे एक मजबूत साथी मिले.''

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जब पिछले महीने तमिलनाडु में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे तो उन्होंने कहा था कि जो लोग कह रहे हैं कि तमिलनाडु में भाजपा कहां है?

वे चुनाव के बाद ईवीएम में भाजपा को ढूंढ सकते हैं. भाजपा प्रवक्ता जी.वी.एल. नरसिम्हाराव कहते हैं कि अगामी लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा तमिलनाडु में अच्छा प्रदर्शन करेगी.

भाजपा का यह दावा तब है जब पिछले लोकसभा चुनाव में उसे लगभग 5 फीसदी वोट मिले थे. भाजपा नेताओं का दावा है कि पिछले चुनाव में कितना फीसदी वोट मिला, यह महत्वपूर्ण नहीं है.

अहम बात यह है कि भाजपा का संगठन पिछले चार साल में यहां काफी मजबूत हुआ है और राज्य की मौजूदा स्थिति ऐसी है कि यहां पार्टी के पक्ष का माहौल बन सकता है.

सूत्रों का कहना है कि भाजपा का यह दावा बिना आधार के नहीं है. दरअसल, जे. जयलिलता के निधन के बाद अन्नाद्रुक में जिस तरह से टूट की स्थिति बनी थी वह भाजपा के हस्तक्षेप से ही रुकी थी.

भाजपा ने एक सेतु का काम करते हुए मुख्यमंत्री का पद ई. पलानीस्वामी को दिलवाया और ओ. पन्नीरसेल्वम को उप-मुख्यमंत्री बनवा कर पार्टी को टूटने से बचा लिया.

जयललिता के भतीजे दिनाकरण के बागी तेवर भी भाजपा की वजह से नरम पड़े हुए हैं.

मतलब साफ है कि परोक्ष रूप से भाजपा, तमिलनाडु की सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका में है. भाजपा यहां कितनी प्रभावी है, इसका सबूत इस बात से मिलता है कि संसद में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान और फिर राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव में भाजपा को अन्नाद्रमुक का बिना शर्त समर्थन मिला. सियासी हलकों में इस बात की चर्चा है कि पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम खेमे में से किसी एक के साथ जाकर 2019 में भाजपा यहां चुनाव लड़कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराए.

भाजपा और कांग्रेस के इतर दो फिल्मी हस्तियां ऐसी भी हैं जो खुद को जयललिता या करुणानिधि के विकल्प के रूप में स्थापित करने की ख्वाहिश रखती हैं. फिल्म स्टार कमल हासन तो अपनी पार्टी मक्काल नीधि माइम (एमएनएम) लॉन्च कर चुके हैं.

रजनीकांत ने पार्टी की घोषणा तो नहीं की है लेकिन उन्होंने राजनीति में आने की घोषणा कर दी है और पार्टी बनाने की प्रक्रिया में हैं. उन्होंने आध्यात्मिक राजनीति की बात कर, भाजपा के लिए उम्मीद की एक किरण जगाई है.

भाजपा को लगता है कि तमिलनाडु जैसे राज्य में आध्यात्मिक राजनीति की बात दरअसल परोक्ष रूप से भाजपा की मददगार साबित हो सकती है. बहरहाल, इतना तो तय है कि 2019 के आम चुनाव में यहां की राजनीति निर्णायक असर डालेगी.

आम चुनाव 2019 की सरगर्मियों के बीच तमिलनाडु के बदले सियासी माहौल में कौन कितने पानी में है

भावी सियासत की धुरी

एम.के. स्टालिन

करुणानिधि की विरासत संभाल रहे उनके बेटे एम.के. स्टालिन को द्रमुक अध्यक्ष चुना गया है.

हालांकि उनके भाई अलागिरी यह दावा कर रहे हैं कि द्रमुक के बहुत से नेता स्टालिन के साथ नहीं हैं.

लेकिन चूंकि करुणानिधि ने अपने रहते हुए स्टालिन को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था इसलिए द्रमुक पर स्टालिन की पकड़ बरकरार है.

ई. पलानीस्वामी और ओ. पन्नीरसेल्वम

जयललिता जब बीमार थीं तो उन्होंने अपने विश्वस्त ओ. पन्नीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाया.

जयललिता के देहांत के बाद सीएम पद को लेकर पार्टी दो धड़ों में बंटने लगी.

बाद में सुलह हुई और ई. पलानीसामी सीएम बने और ओ. पन्नीरसेलवम उप-मुख्यमंत्री बने. पार्टी को एकजुट रखने की जिम्मेदारी दोनों पर है.

कमल हासन और रजनीकांत

दोनों फिल्मी सितारे तमिलनाडु की सियासत में किस्मत आजमाने का ऐलान कर चुके हैं. कमल हासन ने तो अपनी पार्टी एमएनएम भी बना ली है. रजनीकांत ने पार्टी तो नहीं बनाई है लेकिन पार्टी बनाने की प्रक्रिया चल रही है. 2019 के चुनाव में दोनों किस्मत आजमा सकते हैं. इनकी ताकत दिखना बाकी है

छोटे दल

राज्य में द्रमुक और अन्नाद्रमुक के अलावा छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी दल भी हैं. इनके पास नेता और कार्यकर्ता दोनों हैं जरूर लेकिन तमिलनाडु के सिर्फ छोटे-से हिस्से में इनका प्रभाव है. ये दल हैं डीएमडीके जिसके नेता वाइको हैं. अंबुमणि रामदौस की नेतृत्व वाली पीएमके और विजयकांत की पार्टी एमडीएमके. पिछले लोकसभा चुनाव में इन दलों ने भाजपा के साथ गठबंधन किया था.

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