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हिमाचल प्रदेशः नशे के खिलाफ एकजुट

हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की पहल पर उत्तरी भारत के मुख्यमंत्रियों ने बनाई नशे के खिलाफ संयुक्त रणनीति.

सार्थक पहल हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (बीच में)
सार्थक पहल हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (बीच में)
अपडेटेड 28 अगस्त , 2018

नशे के चंगुल से नौजवानों को बचाने के लिए उत्तर भारत के चार राज्यों ने एक नई पहल की है. 15 से 19 वर्ष के युवाओं में चरस, भांग या शराब की लत कम करने के लिए हिमाचल प्रदेश ने इसकी शुरुआत की है और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस पर चार राज्यों के बीच सहयोग का रास्ता निकाला है. यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि इन राज्यों के मध्य हिमालयी क्षेत्र में भांग और अफीम की खेती होती है और इसी कारण यहां से ड्रग्स का कारोबार फल-फूल रहा है. यह अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर स्थानीय युवाओं की सांसों को कमजोर बना रहा है.

नशीले पदार्थों को लेकर अरसे बाद राज्य सरकार ने एक सर्वेक्षण करवाया जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. सर्वेक्षण के मुताबिक, अफीम, चरस और चिट्टे का माफिया मुस्तैदी के साथ सक्रिय होकर समस्या को लगातार बढ़ा रहा है.

नशीली खेप की पैदावार बढ़ रही है, वहीं तस्करों की गिरफ्तारी से भी अहम जानकारियां मिली हैं. जयराम ठाकुर की पहल से पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर की चंडीगढ़ में साझा बैठक हुई. चारों राज्यों ने मिलकर ड्रग माफिया पर शिकंजा कसना तय किया है.

यह करेंगे राज्य साझा

इन राज्यों में साझा ऑपरेशन किया जाना प्रस्तावित है. खासकर हिमाचल प्रदेश के बाहरी इलाकों ऊना, कांगड़ा और बद्दी में इस ऑपरेशन को सघनता से चलाया जाएगा. वहीं रियल होम इंटेलिजेंस को साझा किया जाएगा, जिसमें ड्रग्स सप्लायर्स पर नजर रखना शामिल होगा.

इसमें उत्तर भारत के राज्यों के आला पुलिस अफसरों की समय-समय पर बैठकें किया जाना भी शामिल है. जहां समय-समय पर रणनीति बदली जाएगी. गुप्त सूचना के लिए प्रक्रिया तंत्र का खुफिया सूचना साझा करने का तरीका बदला जाएगा.

चंडीगढ़ में एक ऐसा पुनर्वास केंद्र बनेगा जहां नशा करने वालों का उपचार होगा. आरोपी व्यक्तियों का जेल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बयान दर्ज होगा. सरहदों और बैरियरों पर सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी. पड़ोसी राज्यों में लगने वाले मेलों और कार्यक्रमों में खुफिया बल तैनात होंगे.

पंजाब सीमा के पास खास नाके लगाए जाएंगे. राज्य आरोपियों के फिंगरप्रिट्स भी एक दूसरे को देंगे. उत्तराखंड खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र से आ रहे व्यक्तियों पर निगाह रखेगा. सभी राज्य संयुक्त रूप से केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया की पकड़ के लिए संपर्क करेंगे.

हिमाचल प्रदेश के गृह सचिव बी.के. अग्रवाल कहते हैं कि गत 2-3 वर्ष से (हेरोइन) ड्रग्स की पकड़ बढ़ी है. जबकि पहले ब्राउन शुगर या स्मैक का चलन था. अभी हाल ही में चिट्टे का इस्तेमाल बढ़ा है. राज्य की पुलिस पहले कुछेक ग्राम तक ही नशीले पदार्थ पकड़ती थी पर अब यह संक्चया कई-कई किलो में पहुंच गई है.

हिमाचल प्रदेश के गृह विभाग के एक अनुमान के मुताबिक, जनवरी से जून, 2017 में हेरोइन, स्मैक और ब्राउन शुगर के कुल 1,177 मामले पकड़े गए. जबकि 2018 में यह बढ़कर 3,360 मामले हो गए. 2017 में 695 गिरफ्तारियां हुई थीं तो 2018 में गिरफ्तारियों की गिनती बढ़कर 831 हो गई.

ठाकुर इस संकल्प के पीछे की बात साफ करते हैं, 'मैंने यह पहल इसलिए की क्योंकि यह जाल कई राज्यों में फैला है. सरकारें मिलकर काम करें तो नतीजे अच्छे होंगे. हिमाचल सरकार हर महीने स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों का मेडिकल चेकअप अनिवार्य तौर पर कराएगी. नशे की वजह से ही राज्य में अपराध की घटनाएं भी बढ़ रही हैं.''

बैठक में कैप्टन अमरिंदर ने दृढ़ता से इस बात की वकालत की कि नशे का कारोबार करने वालों को कठोर सजा मिलनी चाहिए. खट्टर ने कहा कि राज्यों का आपसी सहयोग इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. रावत ने भी इस पहल को सराहते हुए कहा था कि यह बैठक एक अच्छी शुरुआत है.    

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