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पहली देसी परमाणु घड़ी

देसी परमाणु घड़ी के साथ इसरो दुनिया के उन चुनिंदा अंतरिक्ष संगठनों में शामिल हो गया है, जिन्होंने ऐसी परिष्कृत प्रौद्योगिकी विकसित कर ली है. 

टिक्-टिक् - सैटेलाइट आइआरएनएसएस 1आई
टिक्-टिक् - सैटेलाइट आइआरएनएसएस 1आई

भारत निर्मित परमाणु घड़ी का मानक निर्धारण करने की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो ) के अहमदाबाद स्थित स्पेस ऐप्लिकेशन सेंटर (एसएसी) के शोधकर्ताओं ने यह स्वदेशी घड़ी बनाई है, जिसका परीक्षण किया जा रहा है, ताकि एक प्रायोगिक नौवहन उपग्रह में इसका उपयोग किया जा सके. ऐसी घड़ियां सूक्ष्मता के साथ लोकेशन से संबंधित डेटा को आंक लेती हैं.

विभिन्न कक्षाओं में भिन्न-भिन्न जगहों पर स्थित उपग्रहों की परमाणु घड़ियों के समय में अंतर का उपयोग नेविगेशन रिसीवर या फिर धरती पर मौजूद किसी चीज की एकदम सही स्थिति को मापने के लिए होता है.

अगर किसी उपग्रह में मौजूद तीनों घडिय़ां बिगड़ जाएं तो अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को नई परमाणु घड़ियों से लैस एक बैकअप उपग्रह प्रक्षेपित करना पड़ता है. इसी वजह से इसरो के लिए भारत में ऐसी घड़ियां विकसित करना जरूरी हो गया.

एसएसी के निदेशक तपन मिश्र कहते हैं, इस देसी परमाणु घड़ी के साथ इसरो दुनिया के उन चुनिंदा अंतरिक्ष संगठनों में शामिल हो गया है, जिन्होंने ऐसी परिष्कृत प्रौद्योगिकी विकसित कर ली है.  

12 अप्रैल को इसरो ने भारत के पहले नौवहन उपग्रह आइआरएनएसएस 1ए की जगह लेने के लिए सफलतापूर्वक आइआरएनएसएस-1आई प्रक्षेपित किया. इससे सात उपग्रहों का समूह पूरा हो जाएगा, ताकि नाविक सुचारू रूप से काम करता रहे.

उम्मीद है कि यह भारत को एक उपग्रह आधारित नौवहन प्रणाली उपलब्ध कराएगा जो कि अमेरिकी नियंत्रित ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) से स्वतंत्र होगी. देसी परमाणु घड़ी स्वदेशी जीपीएस की ओर बढ़ा कदम भी होगा.

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