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उत्तरपूर्व में भाजपा के लिए नगालैंड ने पेश की चुनौती

उत्तरपूर्व में पंख पसारने की भाजपा की विराट महत्वाकांक्षा के लिए नगालैंड ने अनोखी चुनौती पेश कर दी है

नगा समझौते के दौरान होहो प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री मोदी
नगा समझौते के दौरान होहो प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री मोदी

उत्तरपूर्व में पंख पसारने की भाजपा की विराट महत्वाकांक्षा के लिए नगालैंड ने अनोखी चुनौती पेश कर दी है. राज्य विधानसभा चुनावों के लिए 27 फरवरी की तारीख तय की गई है. मगर क्या सामाजिक और सियासी नगा समूहों को चुनाव में भाग लेने के लिए राजी किया जा सकता है?

29 जनवरी को 11 पार्टियों ने, जिनमें भाजपा की स्थानीय इकाई भी शामिल थी, एक संयुक्त घोषणापत्र जारी करके कहा कि अगर केंद्र 'जल्दी समाधान के लिए बातचीत में शामिल समूहों को वाजिब मौका और वक्त देकर नगा सियासी प्रक्रिया को उसके तार्किक अंजाम तक पहुंचने देने' में नाकाम रहता है, तो वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे.

एक दिन बाद भाजपा पीछे हट गई और उन दो नेताओं को निलंबित कर दिया जिन्होंने बयान पर दस्तखत किए थे. नगालैंड के लिए भाजपा के चुनाव प्रभारी और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजु ने कहा कि बहिष्कार कोई समाधान नहीं है. उन्होंने दलील दी, ''जो भावनाएं जाहिर की गई हैं हम उन्हें बखूबी समझते हैं...पर वक्त से चुनाव करवाना तो संवैधानिक प्रक्रिया है.''

मगर नगा स्वायत्तता के जज्बाती मुद्दे के खिलाफ जाना पार्टी को सियासी और चुनावी तौर पर अलग-थलग कर सकता है (वह भी तब जब पार्टी ईसाइयों के दबदबे वाले इस राज्य में अपनी मौजूदगी मौजूदा 1.75 फीसदी वोट हिस्सेदारी और एक निर्वाचित विधानसभा सीट से बढ़ाने की उम्मीद कर रही है).

अपनी कम हैसियत के बावजूद भाजपा नगा पीपल्स फ्रंट (एनपीएफ) की अगुआई वाले सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक एलायंस ऑफ नगालैंड का हिस्सा है. इस गठबंधन ने 2013 के चुनाव में 38 सीटें जीती थीं. एनपीएफ के नेता शुरहोजेली लीजीत्सु और नगालैंड के मुख्यमंत्री टी.आर. जेलिआंग दोनों ही चुनाव करवाने के सख्त खिलाफ हैं.

विडंबना है कि ठीक उसी दिन जब सर्वदलीय बैठक ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया, रिजिजु और भाजपा महासचिव राम माधव इन दोनों नगा नेताओं के साथ सीट बंटवारे पर बात कर रहे थे. यह दूसरा मौका है जब विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की नौबत आई है. 1998 में भी एनएससीएन (आइएम) और नगा होहो संगठन ने बहिष्कार किया था.

तब कांग्रेस ने चुनाव लड़कर 60 में से 53 सीटें जीतीं. अगर केंद्र सरकार गतिरोध तोडऩे में नाकाम रहती है, तो भाजपा उसी कामयाबी को दोहराने की कोशिश कर सकती है. असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा को यकीन है कि संकट को एक हफ्ते के भीतर सुलझा लिया जाएगा.

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