वहां ड्रामा था, हास्य था और गंभीर बहस भी. हैदराबाद में 18 और 19 जनवरी को आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ के दूसरे संस्करण में बड़े यादगार पल रहेः तेलंगाना के मुख्यमंत्री कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव ने देश के सबसे युवा राज्य की कमान संभालने के बाद से बड़े ही दुर्लभ सार्वजनिक संवाद में शिरकत की. पुदुच्चेरि के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने साफ किया कि क्यों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुस्कराते हुए फोटो खिंचाने का भी कोई फायदा नहीं होता.

चिकित्सा क्षेत्र के दिग्गज प्रताप रेड्डी और उनकी बेटी संगीता ने भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के भविष्य को लेकर बात की. तेलुगू सुपरस्टार मोहन बाबू ने एक पिता के विकासक्रम की झलक दिखलाई—कैसे एक पारंपरिक अभिभावक अब अपनी बेटी लक्ष्मी मांचु की उपलब्धियों पर गर्व महसूस करता है.
तमिल अभिनेता विशाल ने अपने राजनैतिक इरादों का खुलासा किया. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को चुनौती दी कि वे उनके खिलाफ हैदराबाद में चुनावी मुकाबला करके देखें.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन ए.एस. किरण कुमार ने अपने छोटे-छोटे किस्सों से दर्शकों को खासा लुभाया. एक मां ने सबकी आंखें नम कर दीं, जब उसने अपनी बेटी के इस्लाम धर्म स्वीकार करके आइएसआइएस में शामिल होने की मार्मिक कहानी सुनाई. अभिनेता प्रकाश राज ने भाजपा प्रवक्ता का मुंह यह कहते हुए बंद करा दिया कि वे हिंदू-विरोधी नहीं, बल्कि मोदी-विरोधी और शाह-विरोधी हैं.
राज्य बनाम केंद्र
केसीआर ने कहा कि सहकारी संघवाद देश में तरक्की के लिए जरूरी कई बदलाव तेजी से ला सकता है. उन्होंने कहा, ''हमारा राज्य नया भले ही है लेकिन किसी मायने में छोटा नहीं है. पश्चिम बंगाल समेत 17 (राज्य) हमसे भी छोटे हैं. हमारी विकास दर सबके सामने है और अगर हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बना दिया जाए तो हम उसकी जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं.''
उन्होंने इशारा किया कि केंद्र सरकार अच्छी विकास दर वाले राज्यों को प्रोत्साहन नहीं दे रही है और इस समय सहकारी संघवाद आंशिक रूप से ही प्रचलन में है. उन्होंने कहा, श्श्किसी भी राज्य की विकास दर को कम करना दरअसल देश की विकास दर को कम करना है क्योंकि राज्य की संपदा ही देश की संपदा है.''
केसीआर के लिए तो तेलंगाना मॉडल गुजरात समेत किसी भी अन्य राज्य के मॉडल से कहीं बेहतर हैं और उसमें सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास का ध्यान रखा गया है. उन्होंने बताया, ''हमने टीएस-आइपास औद्योगिक मंजूरी नीति को तैयार किया है जिसमें बिना किसी भ्रष्टाचार के एकल खिड़की फास्ट ट्रैक क्लियरेंस की व्यवस्था है.
हमने कई मेगा प्रोजेक्ट शुरू करके राज्य की सिंचाई की जरूरतों पर भी ध्यान दिया है. इनके साथ-साथ बाकी तमाम पहल तेलंगाना को देश का अव्वल राज्य बना देंगी.'' तेलंगाना ने 2016 में व्यवसाय करने की सहूलियत की रैंकिंग में देश में पहला स्थान हासिल किया था. उसके सकल राज्य घरेलू उत्पाद में भी 2016-17 में 10.1 फीसदी का इजाफा हुआ जो कि राष्ट्रीय जीडीपी विकास दर से कहीं ज्यादा है.
हालांकि यह केवल तेलंगाना की बात नहीं है, सभी छह दक्षिणी राज्य राष्ट्रीय जीडीपी से कहीं ज्यादा तेजी से विकास कर रहे हैं. दरअसल ये छह राज्य देश के उन दस राज्यों में शामिल हैं जहां गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी का प्रतिशत सबसे कम है.
डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के को-चेयरमैन और सीईओ जी.वी. प्रसाद ने इशारा किया, ''अलग राज्य के लिए चल रहे आंदोलन के दौरान उत्पादकता और संपत्ति, दोनों का नुक्सान बेशक हुआ था, लेकिन तेलंगाना राज्य बनने के तुरंत बाद सारा हो-हल्ला खत्म हो गया और सारी दिक्कतें दूर हो गईं.'' हर शहर के अपने कुछ फायदे और कुछ नुक्सान होते हैं.
कार्वी ग्रुप के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सी. पार्थसारथी ने कहा, ''मैंने पाया है कि जब व्यवसाय करने की सहूलियत की बात आती है तो सारे ही शहर अच्छे हैं.'' शहर राज्य और तमाम संस्कृतियों के मिलनबिंदु पुदुच्चेरि के मामले में मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने रेखांकित किया कि वहां जाने में क्या समझदारी हैः आनंद, विरासत और आध्यात्मिक पर्यटन. राज्य के विकास की जो परिकल्पना उन्होंने की थी, उसमें उनके लिए दो सबसे बड़ी चुनौतियां प्रधानमंत्री और उप-राज्यपाल किरण बेदी का असहयोग है.
कुछ अन्य लोग भी थे जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के आलोचक थे. 'स्टैंड आउट, स्पीक अपः मेक योरसेल्फ काउंट' सत्र के दौरान अभिनेता प्रकाश राज ने अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रहार करने और उग्र हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया.
पिछले साल हत्या की शिकार हुई पत्रकार गौरी लंकेश के नजदीकी मित्र रहे प्रकाश राज ने मोदी की इस बात के लिए आलोचना की कि वे ट्विटर पर उन लोगों को फॉलो करते हैं जिन्होंने लंकेश की हत्या का जश्न मनाया था. जब एक भाजपा प्रवक्ता ने आपत्ति जताई तो अभिनेता ने कहा, ''मैं हिंदू-विरोधी नहीं हूं, मैं मोदी-विरोधी और अमित शाह-विरोधी हूं.''
जब जम गई महफिल
सांस्कृतिक सत्र में कुछ लोकप्रिय कलाकारों की रचनात्मक प्रस्तुतियां देखने को मिलीं. कुचिपुड़ी नृत्यांगनाओं यामिनी और भावना रेड्डी ने मृदंगमवादक और फ्यूजन संगीतकार प्रवीण स्पर्श के संगीत पर बेहतरीन नृत्य रचना पेश की. कॉन्क्लेव ने उस समय एक संगीत कार्यक्रम का रूप ले लिया जब गायक कलाकारों निकिता गांधी और कार्तिक ने 'दि न्यू ट्यूनः सिंगिंग ए फ्रेश सांग' प्रस्तुत किया. कार्तिक ने कहा, ''आपको इंडस्ट्री में बने रहने के लिए समय के साथ चलना होता है. खुद को नए सिरे से तलाश करने की जरूरत होती है.''
पिता-पुत्री की जोडिय़ां
560 फिल्मों में काम कर चुके तेलुगु फिल्मों के जाने-माने अभिनेता मोहन बाबू और उनकी बेटी लक्ष्मी ने राजनीति पर चर्चा की. मोहन बाबू ने राजनेताओं की निंदा करते हुए कहा कि वे जो वादे करते हैं, उन्हें कभी पूरा नहीं करते हैं, हालांकि वे खुद राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. उन्होंने कहा, ''लगभग 95 प्रतिशत राजनेता दुष्ट होते हैं. राजनेताओं ने अगर अपने वादे पूरे किए होते तो भारत अब तक एक खूबसूरत देश बन गया होता.''
कुछ ऐसा ही अनुभव साझा करते हुए अपोलो अस्पताल समूह के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. प्रताप सी. रेड्डी और समूह की संयुक्त प्रबंध निदेशक संगीता ने देश में निजी अस्पताल के सबसे बड़े नेटवर्क की मालिक और प्रमोटर के तौर पर बताया कि चिकित्सा सुविधाओं को किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है. संगीता ने कहा कि भारत में एक व्यापक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है क्योंकि चिकित्सा बीमा के बिना आम लोगों के लिए अपनी जेब से इलाज का खर्च उठाना बहुत कठिन है.


'सेक्सिज्म इन सिनेमाः टाइम्स अप्य शीर्षक वाले सत्र में कन्नड़ कलाकार रुति हरिहरन ने फिल्मों में भूमिका देने के नाम पर लड़कियों के शारीरिक शोषण के बारे में बात की और अपने साथ घटित अनुभवों को बताया. उन्होंने बताया कि उस अनुभव ने उन्हें समझदार और मजबूत बना दिया. हास्य कलाकार सुमुखी सुरेश ने अपनी स्टैंड-अप कॉमेडी से दर्शकों को खूब हंसाया. रेल मुसाफिरों की परेशानियों पर व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा, ''रेलवे का टिकट तब बुक कराएं जब आप मंदिर में भगवान से मिलने जाएं.''
दक्षिण की राजनीति का रंग
राजनेताओं ने 'भगवा और दक्षिण' शीर्षक वाले सत्र में एक-दूसरे पर निशाना साधने के लिए इस मंच का इस्तेमाल किया. इस सत्र में दक्षिण में भाजपा की संभावनाओं से लेकर केरल में राजनैतिक हिंसा को लेकर आरएसएस, वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और राष्ट्रवाद के नाम पर हिंदी थोपने के विषयों पर चर्चा हुई.
इसके अलावा इस बारे में भी चर्चा हुई कि क्या रजनीकांत तमिलनाडु में अम्मा की विरासत को निगल जाएंगे. तेलंगाना कांग्रेस की सांसद रेणुका चौधरी ने तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन कर रहे नाराज किसानों के बारे में बात करते हुए किसानों के नेता पी. अयाकन्नू की सराहना की. कांग्रेस के निलंबित नेता मणि शंकर अय्यर ने रजनीकांत या कमल हासन के महान राजनेता बनने की संभावनाओं को खारिज किया.
राज्यसभा सदस्य राजीव चंद्रशेखर ने केरल में पिनाराई विजयन की सत्ताधारी माकपा सरकार पर कन्नूर और अन्य जगहों पर हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया.

कुछ और आवाजें
एक और गहमागहमी भरे सत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले ए.एस. किरण कुमार ने बताया कि किस तरह अंतरिक्ष की नई तकनीकी का इस्तेमाल देश के विकास के लिए किया जा रहा है. उन्होंने इसरो और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के बीच बढ़ते सहयोग की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी.
फैशन डिजाइनर अनाविला मिश्रा, गौरांग शाह और श्रवण कुमार ने भारत में बनी साडिय़ों की बढ़ती मांग के बारे में चर्चा की. आइएसआइएस और केरल में 'लव जिहाद' पर चर्चा के दौरान बिंदु संपत, जिनकी बेटी अफगानिस्तान में इस्लामी उग्रवादियों के साथ जुड़ गई है, ने बुर्के में अपनी बेटी की फोटो दिखाई और कहा, ''मैं अपनी बेटी के लिए कह रही हूं, बुर्के के लिए नहीं.'' गुस्से से भरी मां के दुख को समझते हुए पैनल में मौजूद पुलिस के उच्च अधिकारियों ने खतरे को ज्यादा चिंताजनक नहीं बताया.
आखिरी सत्र में गौतमी, खुशबू सुंदर, तापसी पन्नू और काजल अग्रवाल ने सार्वजनिक जीवन में होने पर एक महिला के तौर पर अपने अनुभवों को साझा किया. काजल का कहना था, ''हमें समानता, सशक्तिकरण और समर्थन की जरूरत है.'' पन्नू ने ट्रॉल्स से निबटने के अनुभवों के बारे में बताया. लेकिन जिस बात ने सबको हैरान कर दिया, वह थी किशोर उम्र में खुशबू की भोगी हुई वह कहानी जब उन्होंने अत्याचारी पिता के खिलाफ विद्रोह करके अपनी मां और भाई के साथ घर छोड़ दिया था. इसी तरह के साहस और दृढ़ निश्चय की कई कहानियों को साझा करता यह कॉन्क्लेव यादगार बन गया.

