scorecardresearch

मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ः कड़कनाथ पर कलह

दो औद्योगिक निकायों से समर्थित दो राज्यों ने निम्न कोलेस्ट्रॉल मुर्गे के लिए जीआइ टैग के लिए आवेदन किया

राहुल नरोन्हा
राहुल नरोन्हा

यह मुर्गे की लड़ाई है, जिसमें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों ने काले पंखों वाले देसी नस्ल के कड़कनाथ मुर्गे, जिसमें कोलेस्ट्रॉल कम होता है, पर अपना दावा जताया है. दंतेवाड़ा की कृषि उत्पाद कंपनी भूमिगाड़ी चेन्नै के भौगोलिक संकेतक पंजीयन कार्यालय में कड़कनाथ के लिए जीआइ टैग का आवेदन करने जा रही है. छत्तीसगढ़ स्थित कंपनी का दावा मध्य प्रदेश सरकार के 2012 के उस दावे से टकरा रहा है जिसमें कहा गया था कि इस नस्ल का मूल झाबुआ जिले में है.

दिलचस्प बात यह भी है कि भारतीय उद्योग परिसंघ और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (फिक्की) स्वदेशीयता के इस मामले में आमने-सामने हैं. फिक्की जहां जीआइ टैग के लिए आवेदन को आगे बढ़ाने के लिए दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के साथ बात कर रहा है, वहीं सीआइआइ मध्य प्रदेश के मामले को आगे बढ़ा रहा है. सीआइआइ के उप निदेशक अनिल पांडेय कहते हैं कि ''छत्तीसगढ़ को यह साबित करना होगा कि कड़कनाथ की उत्पत्ति दंतेवाड़ा में हुई है.''

दंतेवाड़ा में राज्य सरकार ने 28 स्वयं सहायता समूहों और एक दर्जन व्यक्तिगत लाभार्थियों को कड़कनाथ ब्रीड के पोल्ट्री फार्म खोलने में मदद की है. 95 फीसदी तक रियायत (सब्सिडी) के कारण कड़कनाथ प्रजनन परियोजना आदिवासियों के लिए जीविका के सफल विकल्प के रूप में उभरी है. हैदराबाद जैसे बाजार में इस प्रजाति के मुर्गे का मूल्य 500 रु. प्रति किलो है, जो बॉयलर चिकेन के मूल्य से करीब पांच गुना ज्यादा है. इस सफलता ने दंतेवाड़ा के जिला मजिस्ट्रेट सौरभ कुमार को जीआइ टैग के लिए प्रोत्साहित किया है. 

निश्चित रूप से उनके इस कदम को मध्य प्रदेश चुनौती देगा, जिसने न केवल झाबुआ स्थित ग्रामीण विकास ट्रस्ट के जरिए इसी तरह का आवेदन किया है, बल्कि महिला स्वयं सहायता समूहों को उसने कड़कनाथ प्रजनन परियोजना में शमिल किया है. झाबुआ के कड़कनाथ पालन करने वालों की विपणन शृंखला महाराष्ट्र और गुजरात में भी है.

यदि दोनों राज्य सफल रहे, तो जुड़वां जीआइ टैग आवेदन काले पंखों वाले इस पक्षी के व्यापार को प्रभावित करेगा. फिक्की के बौद्धिक संपदा अधिकार गतिविधियों के उप निदेशक विवेक सिंह बताते हैं, यदि किसी उत्पाद का स्वामित्व एक से ज्यादा क्षेत्रों में फैला होता है, तो उसकी कीमत घट जाती है.

Advertisement
Advertisement