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उत्तर प्रदेशः पस्त पंजे में जान फूंकने की कसरत

मुद्दाः जीएसटी और नोटबंदी जैसे मुद्दों पर जनसंवेदना बटोरने में कांग्रेस पूरी तरह से नाकाम. विधानसभा चुनाव के दौरान खाट सभा में किसानों के बीच जाने वाली कांग्रेस उनके मुद्दों को लेकर उदासीन. पार्टी के पास किसान नेता नहीं.

आक्रोश  गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के खिलाफ लखनऊ में प्रदर्शन करते राज बब्बर और पार्ट
आक्रोश गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के खिलाफ लखनऊ में प्रदर्शन करते राज बब्बर और पार्ट
अपडेटेड 23 अक्टूबर , 2017

तय कार्यक्रम के मुताबिक उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जन्मशती में भाग लेने 25 सितंबर को वाराणसी पहुंचना था. इसी बीच बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में एक छात्रा से छेडख़ानी के बाद छात्रों पर हुए लाठीचार्ज ने कार्यक्रम बदल दिया. राज बब्बर, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व सांसद पी.एल. पूनिया के साथ एक दिन पहले बीएचयू के छात्रों से मिलने के लिए हवाई जहाज पर सवार हो लिए. वाराणसी प्रशासन राज बब्बर के इरादे भांप चुका था, इसलिए पूरे बाबतपुर एयरपोर्ट को छावनी में तब्दील कर दिया गया. एयरपोर्ट पर कांग्रेसी कार्यकर्ता भी पूरे जोश के साथ डटे थे.

दोपहर साढ़े तीन बजे हवाई जहाज के पहुंचते ही प्रशासन ने एयरपोर्ट का मुख्य गेट बंद करवा दिया. लेकिन कार्यकर्ता राज बब्बर को दूसरे रास्ते से बाहर निकाल कर गाडिय़ों के काफिले में बीएचयू की तरफ कूच कर गए. भारी संख्या में जमा पुलिस फोर्स ने आखिरकार जिला कचहरी से दो किलोमीटर की दूरी पर शिवपुर इलाके के गिलट बाजार तिराहे पर राज बब्बर के काफिले को रोक दिया. नाराज राज बब्बर वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं समेत सड़क पर ही धरने पर बैठ गए. सभी रामधुन गाने लगे. बीच-बीच में बीएचयू और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी होती रही. अधिकारियों ने समझाने की कोशिश की लेकिन कांग्रेसी बीएचयू जाने पर आमादा थे. धरना-प्रदर्शन करीब डेढ़ घंटे तक चलता रहा. अंत में तीखी नोक-झोंक के बीच बब्बर ने सैकड़ों कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तारी दी.

कांग्रेसियों के सड़क पर उतरने का यह कोई पहला वाकया नहीं था. इससे पहले 16 अगस्त को गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले को लेकर राज बब्बर ने कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ लखनऊ में प्रदर्शन किया था. इससे पहले 9 अगस्त को कांग्रेसियों ने पूरे प्रदेश में किसानों, युवाओं, व्यापारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर ''हक मांगो अभियान" शुरू किया. प्रदेश में प्रदर्शन करते हुए. कांग्रेसी सड़क पर उतरे और गिरफ्तारियां दी गईं. मुजफ्फरनगर के खतौली इलाके में इंदिरा गांधी की प्रतिमा के खंडित होने की सूचना मिलते ही 8 जुलाई को कांग्रेसियों ने अपने प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में जमकर प्रदर्शन किया.

मार्च के विधानसभा चुनाव में सात सीटें जीतकर यूपी के इतिहास का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस नए सिरे से उठ खड़े होने को बेताब दिख रही है. पार्टी जनता से जुड़े किसी भी मुद्दे को बेकार नहीं जाने देना चाहती. सड़कों पर धरना-प्रदर्शन कर यूपी कांग्रेस खुद को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सामने मुख्य विपक्षी दल के रूप में साबित करना चाहती है. राज बब्बर कहते हैं, ''केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार से जनता परेशान हो गई है और वह कांग्रेस की ओर देख रही है." प्रदेश में कई सारी चुनौतियों से जूझ रही कांग्रेस भाजपा के सामने जोर लगाकर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव की राह को कुछ आसान करना चाहती है.

दीनदयाल के सामने इंदिरा गांधी विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत पाने के बाद भाजपा यूपी में पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जन्मशती पर कार्यक्रमों के बहाने जनता के बीच अपनी पकड़ बरकरार रखने की कवायद कर रही है. इसकी काट के लिए कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जन्मशताब्दी पर प्रदेश के दस जिलों में बड़े सम्मेलनों की रूपरेखा बनाई है. 11 अक्तूबर तक लखनऊ, झांसी, वाराणसी, मेरठ, बरेली में ये सम्मेलन आयोजित हो चुके हैं जबकि अगले एक महीने के भीतर गोरखपुर, आगरा, अलीगढ़ और रायबरेली में कार्यक्रम आयोजित हो जाएंगे.

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वीरेंद्र मदान बताते हैं, ''इन सम्मेलनों में केंद्र और प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है. कार्यक्रमों का समापन 17 नवंबर को इंदिरा गांधी की जन्मस्थली इलाहाबाद में भव्य आयोजन के साथ होगा." विधानसभा चुनाव से सबक लेने के बाद कांग्रेस ने हाशिये पर जा चुके उन नेताओं को मुख्यधारा में लाने का काम शुरू किया है जिनकी पहचान कभी तेजतर्रार नेता के रूप में होती थी. पार्टी ने एक जनआंदोलन समिति का गठन किया है जिसकी कमान पुराने कांग्रेसी नेता स्वयं प्रकाश गोस्वामी को सौंपी गई है. 

नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे गोस्वामी को कांग्रेस के हक मांगो अभियान्य का कोऑर्डिनेटर भी बनाया गया है. इस अभियान के साथ वरिष्ठ लेकिन हाशिए पर चल रहे वाराणसी के सच्चिदानंद त्रिपाठी, इलाहाबाद के अभय अवस्थी, गोरखपुर के संजीव सिंह जैसे नेताओं को जोड़ा गया है. वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से जोडऩे के लिए एक भावनात्मक पत्र का सहारा लिया गया है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से नेताओं को भेजे पत्र में लिखा है ''जब-जब संगठन कमजोर पड़ा है तब-तब आप लोगों ने इसे नया आयाम दिया है."

बूथ मजबूती का मंत्र

जिस तरह भाजपा ने बूथ पर अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव में डंका बजाया, उसी तर्ज पर कांगे्रस भी संगठन को बूथ स्तर पर सक्रिय करने में जुटी है. प्रदेश में सात वर्ष बाद हो रहे कांग्रेस के संगठन चुनाव में इस बार दूसरे प्रदेश के नेताओं को जिला रिटर्निंग ऑफिसर बनाया गया. पहली बार पार्टी ने अपने सभी नवनियुक्त बूथ अध्यक्षों के मोबाइल नंबर और उनकी फोटो समेत अन्य सारे ब्योरे प्रदेश मुख्यालय में जमाकर इनसे संपर्क करने की केंद्रीयकृत व्यवस्था तैयार की है. एक वरिष्ठ नेता बताते हैं, ''आने वाले दिनों में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सीधे बूथ अध्यक्षों से बात करेंगे. बूथों से नियमित फीडबैक लेने की व्यवस्था की जाएगी."

कांग्रेस ने अपने युवा और तेजतर्रार नेताओं को गुजरात चुनाव में जिम्मेदारी सौंपकर चुनावी रणनीति में दक्ष करने की रणनीति बनाई है. इन्हीं नेताओं को अगले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. गुजरात में कांग्रेस की चुनाव प्रचार अभियान समिति में यूपी के दो नेताओं को स्थायी तौर पर शामिल किया गया है. वहीं प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार सिंह उर्फ लल्लू को गुजरात में प्रत्याशी चुनने के लिए बनी स्क्रीनिंग कमेटी का सदस्य बनाया गया है. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत बताते हैं, ''गुजरात के चुनाव का अनुभव यूपी में काम आएगा.

पार्टी के पास हर स्तर पर चुनावी रणनीति में दक्ष नेताओं की एक टीम होगी." विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के चुनाव में प्रभावी मौजूदगी दिखाने के लिए एनएसयूआइ को आक्रामक और जुझारू तेवर दिया जा रहा है. एनएसयूआइ के पूर्वी जोन के प्रदेश महासचिव रामजी पांडेय बताते हैं, ''ग्रामीण अंचलों के महाविद्यालयों में छात्रों के बीच बैठकें करके उनकी समस्याओं को उठा रहे हैं. छात्रों को आरटीआइ इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे प्रशासन और सरकार की गलत नीतियों को उजागर कर सकें."

आरएसएस के सामने सेवादल

प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सक्रियता से निबटने के लिए कांग्रेस ने सेवादल को आगे किया है. इंदिरा गांधी की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों से ठीक पहले सेवादल के कार्यकर्ता दो पंक्ति में मार्च करते हैं. शुरुआत में ''वंदेमातरम्" का गायन होता है और मार्च के दौरान कार्यकर्ता ''कश्मीर से कन्याकुमारी, भारत माता एक हमारी." जैसे नारे लगाते हैं. यूपी में कांग्रेस के मुख्य संगठक प्रमोद पांडेय बताते हैं, ''पिछले महीने गोरखपुर समेत पूर्वांचल के कई जिलों में बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचकर सेवादल ने उन्हें मदद मुहैया कराई थी.

सेवादल ने सबसे पहले गोरखपुर जिला प्रशासन को 11,000 रुपए की राशि बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए सौंपी थी." जमीनी स्तर पर लोगों को कांग्रेस की नीतियों से परिचित कराने के लिए सेवादल बौद्धिक सभाओं का आयोजन भी करने जा रहा है. सरकार पर संविदा मजदूरों से भेदभाव करने का आरोप लगाकर कांग्रेस अभियान छेडऩे जा रही है. यूपी में कांग्रेस के सभी—फ्लैगशिप कार्यक्रमों के चेयरमैन संजय दीक्षित बताते हैं, ''यूपी में मनरेगा, आंगनबाड़ी, शिक्षा मित्र समेत करीब 70 लाख से अधिक संविदा मजदूर हैं जिनके साथ भेदभाव हो रहा है. इन को ''समान कार्य-समान वेतन" दिलाने के लिए संघर्ष किया जाएगा."

प्रदेश और केंद्र में भाजपा की सरकार होने को कांग्रेस अपनी रणनीति के लिए अनुकूल मान रही है. लखनऊ में माल एवेन्यू में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय के मुख्यद्वार पर टंगे बैनर पर ये लाइनें लिखी हैं ''जब-जब जुल्मी जुल्म करेगा सत्ता के गलियारों से, चप्पा-चप्पा गूंज उठेगा कांग्रेस के नारों से." देखना है, कांग्रेस बेजान होते जा रहे अपने पंजे में जान फूंकने में कितना कामयाब हो पाती है?

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