राज्य सीपीएम के भीतर अपने दबदबे के बावजूद पिनाराई विजयन को मई 2016 में केरल के मुख्यमंत्री के रूप में कुर्सी संभालने के पहले लंबा इंतजार करना पड़ा. अब उनका इरादा उस असंभव-से लक्ष्य को हासिल करना है जिसे माक्स्रवादी विचारक ई.एम.एस. नंबूदिरीपाद या कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले के. करुणाकरन तक, ई.के. नयनार से लेकर ए.के. एंटोनी तक और पिनाराई से पहले मुख्यमंत्री रहे उम्मन चांडी तक नहीं कर सके. वह है सीएम का कार्यकाल दोबारा हासिल करना.
इन महारथियों की तरह 72 साल के विजयन की लोकप्रियता रैंकिंग कभी भी ऊंची नहीं रही है, लेकिन उन्होंने निकट भविष्य की चुनौतियों और खतरों का विश्लेषण करने की अपनी क्षमता को पैनी धार दी है. उन्हें उम्मीद है कि यही चीज केरल में सत्ता पलटने के राजनैतिक चक्र को तोड़ देगी, जहां पांच प्रतिशत से कम वोटों के फेरबदल ने 140 सदस्यीय विधानसभा में सीपीएम के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे को 23 सीट का अंतर दिला दिया था.
एरणाकुलम से पूर्व लोकसभा सदस्य और टीवी पर अक्सर नजर आने वाले सेबस्टियन पॉल का मानना है कि मुख्यमंत्री का फोकस और प्राथमिकताएं एकदम दुरुस्त हैं. इस बिना पर वे दूसरा कार्यकाल हासिल कर सकते हैं. राज्य भर में लगभग 42.6 लाख लाभार्थियों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन को उन्होंने अच्छे ढंग से घरों तक पहुंचाया है. पॉल कहते हैं, ''वे गरीबों को यह बता रहे हैं कि 'हम आप के लिए सोचते हैं और आप के लिए काम करते हैं.' पॉल यह भी कहते हैं कि अकेली यह चीज ही मुख्यमंत्री को स्थायी वफादारी दिला सकती है, जिससे वे अपनी राजनैतिक योजनाओं को आगे बढ़ा सकते हैं.
जहां पेंशन योजना एक नेता के रूप में उनकी लोकप्रियता को मजबूत करेगी, वहीं मुख्यमंत्री विजयन का असली बड़ा उपक्रम है 'लाइफ मिशन'—एक ऐसी बड़ी योजना, जो अगले चार वर्ष में 5,60,000 बेघर लोगों के लिए 'सुविधाजनक' आवास प्रदान करने के लिहाज से बनाई गई है. इस बारे में मुख्यमंत्री पद संभालने से पहले ही वे विचार कर रहे थे. वास्तव में पद संभालने के कुछ ही दिन बाद, विजयन ने शीर्ष अधिकारियों की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें उन्होंने, उनसे गरीबों के लिए आवास सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा था. लाइफ मिशन के तहत कवर किए जाने वाले लाभार्थी कुदुंबश्री—केरल के गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम—के माध्यम से चिन्हित किए गए थे.
लाइफ मिशन परियोजना की सीईओ अदीला अब्दुल्ला कहती हैं कि लाभार्थियों में दो लाख बेघर लोग हैं, जो भूमिहीन भी हैं; इनके अलावा तीन लाख लोग और हैं, जिनके पास जमीन है लेकिन कोई ठीक घर नहीं है; और 60,000 परिवार अधबने घरों में रह रहे हैं. अदीला के अनुसार, लाइफ मिशन हाउसिंग कॉम्प्लेक्स की योजना ग्रीन टेक्नोलॉजी आधारित हैं. इसमें बुजुर्गों की देखभाल का केंद्र, पुस्तकालय, साझा अध्ययन कक्ष और पार्क शामिल होंगे. इसकी अनुमानित लागत 20,000 करोड़ रु. है. अदीला के मुताबिक, प्रारंभिक परियोजनाओं का निर्माण कार्य नवंबर में शुरू हो जाएगा. ''हमारी प्राथमिकता इस वित्तीय वर्ष में अधूरे घरों को पूरा करने और हर जिले में एक मेगा हाउसिंग पायलट परियोजना शुरू करने की होगी.''
इस बीच मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों और जिलों में उपयोग योग्य जमीन की पहचान करने को कहा है. इस पर 'बेघर लोगों के लिए पीपल्स आंदोलन' का नाम चस्पां किया गया है. सीपीएम केंद्रीय समिति के एक सदस्य ए. विजयराघवन ने स्पष्ट रूप से कहा, ''हम (नरेंद्र) मोदी की देखादेखी लोगों को निचोडऩे की कोशिश नहीं कर रहे हैं. इसके विपरीत हम लोगों की जरूरतें पूरी कर रहे हैं.'' अगर पिनाराई विजयन इसे सफलतापूर्वक कर लेते हैं, तो कांग्रेस नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे और उम्मीदें लगाए बैठे आरएसएस-भाजपा के लिए पिनाराई विजयन को हटाना असंभव हो सकता है.

