आज ओजोन परत में लगातार हो रहे क्षय के प्रति चिंता जताते हुए पूरी दुनिया में विभिन्न देश ठंडा करने की ऐसी तकनीक की ओर बढ़े हैं, जो जलवायु के लिहाज से ज्यादा उपयोगी हो. शुरुआत में ठंडा करने के लिए क्लोरोक्लोरोकार्बन का प्रयोग किया जाता है, लेकिन 1995 के बाद से अमेरिका में उसका उत्पादन बंद हो गया. अब तकरीबन सभी एयर कंडिशनर में ठंडा करने के लिए हैलोजेनेटेड क्लोरोक्लोरोकार्बन का प्रयोग किया जाता है. लेकिन अब वह भी धीरे-धीरे चलन के बाहर हो रहा है और उसकी जगह ओजोन सुरक्षित क्लोरोक्लोरोकार्बन या फिर अमोनिया लेते जा रहे हैं.
भारत में ऊर्जा किफायती चीजों के लिए रास्ता उस वक्त खुला, जब 2010 में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए ऊर्जा सक्षमता के आधार पर स्टार रेटिंग का प्रावधान किया. ऐसे में गोदरेज जैसी कंपनियां पर्यावरण संतुलन को बचाने वाली बेहतरीन तकनीक लेकर आईं. गोदरेज ने ठंडा करने की पर्यावरण के लिहाज से दुनिया की सबसे बेहतरीन तकनीक आर 290 का प्रयोग किया. यह तकनीक जर्मनी की फेडरल मिनिस्ट्री फॉर द एन्वायरनमेंट, नेचर कन्जर्वेशन, बिल्डिंग और न्यूक्लियर सेफ्टी के साथ मिलकर तैयार की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि ऊर्जा दक्षता मंत्रालय ने कंपनियों को खुद को और ऊर्जा सक्षम बनाने के लिए बाध्य किया है, फिर भी वैश्विक मानकों के लिहाज से अभी हम बहुत पीछे हैं.

