खनिज ऊर्जा की खोज से पहले जैव ऊर्जा की खोज हुई थी, लेकिन खनिज ईंधन जैसे तेल, गैस और कोयले की खोज का जैव ईंधन के निर्माण और इस्तेमाल पर बुरा असर पड़ा. डीजल इंजन की खोज करने वाले रुडोल्फ डीजल पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने 1893 में अपने इंजन में ईंधन के तौर पर वेजिटेबल ऑयल का इस्तेमाल किया था. पूरी 20वीं सदी में अलग-अलग तरह के इंजनों के लिए पेट्रोलियम से बनने वाले विभिन्न प्रकार के द्रव्य ईंधनों का निर्माण होता रहा. इस बीच वेजिटेबल ऑयल से बनने वाले ईंधन की ओर लोगों का ज्यादा ध्यान नहीं गया. 1973 में दूसरी बार तेल संकट पैदा होने पर इस ओर लोगों का ध्यान गया. यही समय था, जब वैज्ञानिक समुदाय को भी रिन्यूवेबल लिक्विड ईंधन की जरूरत महसूस हुई.
भारत में आज बायो डीजल का निर्माण करने वाली एक दर्जन से ज्यादा कंपनियां हैं. इस साल अगस्त में सरकार ने ऊर्जा आयात और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए बायो डीजल कार्यक्रम की शुरुआत की. इसकी शुरुआत में नई दिल्ली, विशाखापत्तनम, हल्दिया और विजयवाड़ा में राज्य सरकारों की मिल्कियत वाली ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की रिटेल दुकानों में बायो डीजल बी5 ब्लेंड (5 फीसदी बायो डीजल, 95 फीसदी पेट्रोलियम डीजल) उपभोक्ताओं को बेचा जाएगा. पेट्रोलियम मंत्रालय ने बड़े खरीदारों जैसे रेलवे, शिपिंग और राज्य सड़क परिवहन निगमों आदि को बायो डीजल 100 (शुद्ध बायो डीजल) की सीधे बिक्री की अनुमति दी है.

