क टरीना. मैं अपनी बात आपकी ही एक बात से शुरू करना चाहूंगा. आपने एक बार कहा था, ''मैं उम्रदराज पुरुषों के प्रति आकर्षित होती हूं, जिन्होंने जिंदगी जी है, जिनके पास कुछ अनुभव हैं. श्तो इसका अर्थ क्या निकालूं? मेरे लिए भी कोई मौका है?''
बेशक. मैंने आपके बारे में थोड़ी रिसर्च की और जब मुझे पता चला कि आप कैंब्रिज और ऑक्सफोर्ड में पढ़े हैं.....तो मैं बस फोन करके कहने ही वाली थी कि मैं नहीं आऊंगी. इस शख्स की उपलद्ब्रिधयां तो मुझसे कहीं बड़ी हैं. इसलिए मुझे तो आपका इंटरव्यू करना चाहिए.''
जब टेलीविजन के सबसे खौफनाक पत्रकार करन थापर और बॉलीवुड की सबसे ज्यादा चाही गई कोमलांगी अभिनेत्री कटरीना कैफ आमने-सामने हों तो चिनगारियां उठनी ही थीं. और इंडिया टुडे कॉनक्लेव में दर्शक मंच पर चल रहे ''सच बोलने या फिर शामत बुलाने'' के इस खेल में बिल्कुल बह गए थे.
नहीं, नहीं. सौंदर्य की देवी बनाम खूंखार हैवान जैसी कोई बात नहीं थी. बल्कि यूं कहिए कि झपट्टा मारते रहने वाले ''बाज'' के बाजुओं से जैसे ताकत ही जाती रही. बेशक, उनकी खूबसूरती का कोई जोड़ न था. सादे-से ग्रे रंग के सूट में वे खिल रही थीं. उधर वे तो जैसे सींगें ही धंसा देने पर उतारू नजर आ रहे थे. लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने एक सेलिब्रिटी की जिंदगी में घुसने की कोशिश की, स्कैंडल के पीछे की हकीकतों को जाना, उनकी जिंदगी में चल रहे सनसनीखेज नाटकों से गुजरे तो खुद अचंभित रह गए. नितांत कलात्मकता लेकिन उतनी ही सादगी से वे बोलती रहीं. खुली और बेबाक, अपनी सफलता का विरोधाभास बुनतीं, अपनी आदतों पर पछतातीं. हमले की स्थिति में जीत के रास्ते ढूंढ लेतींरू मीठी खुशामद करतीं, शांत करतीं, तारीफ करतीं. और जब भी उन्हें हमला करने का मौका मिला तो बड़ी नफासत और अदाओं के साथ किया.
कटरीना, आप 13 अलग-अलग देशों में पली-बढ़ीं...इसे विस्तृत तालीम कहें या फिर अस्थिर और बिखरी हुई जिंदगी?
यह उस तरह की तालीम तो नहीं थी. मिसाल के तौर पर जैसी कि आपकी रही होगी. यानी किताबी शिक्षा. पर यह जिंदगी की तालीम है, अनुभव है... ऐसा लगता है कि जैसे मैंने उनकी तौहीन की हो. लेकिन ऐसा नहीं है. मैं उनकी बड़ी इज्जत करती हूं.
आप चुटकियां लेने में वाकई बड़े ही उस्ताद हैं. मुझे भी आपसे एकाध ट्रिक सीखनी पड़ेगी.
क्या होता है, जब आप उम्मीद कर रहे हों कि सामने वाली खूबसूरत गूंगी गुड़िया होगी और वह निकले एक तेज-तर्रार और बारीक सोच वाली व्यक्तित्व? जब-जब उन पर श्श्सच बोलने की बजाए कूटनीतिक होने्य्य का आरोप लगा तो कटरीना ने अपने सिद्घांतों और विश्वास की बात कीरू ''बहुत सारे लोगों ने मुझे अलग-अलग खांचों में फिट करने की कोशिश की है, जहां मैं नहीं होना चाहती थी. मुझे तकलीफ हुई. इसलिए मैंने खुद से कहा, ''मैं यह नहीं करना चाहती क्योंकि जब मेरे साथ ऐसा होता है तो मुझे अच्छा नहीं लगता.'' जब बॉलीवुड में शीर्ष पर उनकी जिंदगी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने ग्लैमरस जिंदगी के पीछे के कठिन परिश्रम पर जोर दिया. मुश्किल से 17 साल की एक लड़की, हिंदुस्तान में नई, यहां की भाषा नहीं जानती. वह बॉलीवुड में जगह बनाने को भटकती है. इसलिए भी ञ्च योंकि फिल्मी डायलॉग ज्यादातर हिंदी में होते हैं. ''आपको बहुत फटाफट सीखने की जरूरत होती है.'' पहली चीज जो उन्होंने सीखी, वह थी भाषा.
थापर ने शुरू-शुरू में कहा था, ''मैं इस तरह का पत्रकार नहीं हूं कि जिसके साथ आप खूबसूरत बॉलीवुड अभिनेत्रियों का नाम जोड़ें. मेरे भीतर बैठा हुआ शैतान अमूमन उन्हें डराकर दूर भगा देता है.'' किसी ने नहीं सोचा था कि कहानी इस तरह उलट जाएगी कि शैतान पीठ थपथपाने वाले खुशामदी बच्चे में बदल जाएगा. अंततः थापर ने अभिभूत होकर कहा, ''शानदार जवाब कटरीना. ऐसा कभी नहीं हुआ कि मेरे सामने बैठे किसी नेता ने इतनी चतुराई से किसी सवाल को दरकिनार किया हो और बावजूद इसके इतना भरोसेमंद उत्तर दिया हो.''
कटरीना, आप बिलाशक बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत स्त्रियों में से एक हैं. आपका एक बॉयफ्रेंड है. कौन है वह...
अगर आप कहते हैं तो होगा...मैंने तो ऐसा नहीं कहा.
कटरीना साफ, सुसंगत और बेबाक थीं. उन्होंने जरा भी मौका नहीं दियारू कोई सनसनीखेज हेडलाइन नहीं, कोई चौंकाने वाला खुलासा नहीं, कोई आरोप-प्रत्यारोप नहीं. सवाल कितने भी मुश्किल रहे हों, वे न घबराईं, न डरीं.
जब कोई रूढ़िवादी सोच के तयशुदा खांचों को तोड़ता है तो बहुत प्रेरणा मिलती है. वह पल भी यादगार हो जाता है, जब कोई किसी को अपनी पारंपरिक सोच के खांचों से बाहर आकर सोचने के लिए बाध्य करे. इस सत्र में ये दोनों ही बातें थीं.

