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राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन हबीब गौरान की निजी 'सेवाओं' का खुलासा

भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों के बावजूद अब तक बचते रहे राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन गौरान पर कसने लगा शिकंजा.

अपडेटेड 23 मार्च , 2015
राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन हबीब खान गौरान ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश केबाद 27 जनवरी को राज्य न्यायिक सेवा (आरजेएस) परीक्षा प्रश्न पत्र लीक मामले में निचली अदालत में आत्मसर्पण कर दिया था. इस मामले की जांच कर रहा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप कई माह तक उन्हें गिरक्रतार करने में नाकाम रहा था. आत्मसमर्पण के बाद निचली अदालत से उन्हें सशर्त जमानत मिल गई पर उनके कारनामे अब भी सुर्खियों में हैं. ताजा मामला बीकानेर का है. 2012 में गौरान ने जिस जमीन को फर्जी तरीके से खरीदा था, उसका आवंटन रद्द करके उसे 11 मार्च को सरकारी रकबा घोषित कर दिया गया.

आरपीएससी के अध्यक्ष बनने से पहले गौरान बीकानेर में पुलिस अधीक्षक थे. उन्होंने बीकानेर जिले के पूगल चक 636 आरडी में अपनी पत्नी नसीम बानो के नाम से 20 बीघा जमीन खरीदी थी. उससे पहले यह जमीन नोखा के दिवंगत सुगनाराम को आवंटित थी लेकिन वे उसकी किस्तें नहीं चुका पाए और यह आवंटन 1998 में खारिज हो गया. उस आवंटन के खारिज होने की सूचना पटवारी ने रिकॉर्ड में दर्ज नहीं की थी. गौरान ने इसी जमीन को 2012 में पत्नी के नाम से खरीद लिया. आरटीआइ कार्यकर्ता गोवर्धन सिंह ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से की थी और वह उसकी जांच कर रहा है. गोवर्धन ने जिला प्रशासन से भी उस जमीन को सरकारी कब्जे में लेने का अनुरोध किया था. अब जाकर पूगल के एसडीएम ने रिकॉर्ड में सुधार का निर्देश देते हुए जमीन को सरकारी रकबा घोषित कर दिया है. बिक्री में उनका सहयोग करने वाले अधिकारियों की जांच की भी बात कही जा रही है.
आरपीएससी में चेयरमैन रहने के दौरान गौरान पर कई आरोप लगे थे पर कांग्रेस सरकार में उसकी पूरी जांच नहीं हुई. 2013 की राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) के प्रश्न पत्र के लीक होने की बात सामने आते ही गौरान के कारनामों का खुलासा होने लगा. उस मामले में एसओजी ने गौरान के खिलाफ आरजेएस 2013 का मुख्य प्रश्नपत्र चुराने का मामला भी दर्ज किया. उनकी बेटी उस वक्त आरजेएस की परीक्षा दे रही थी. एसओजी के मुताबिक गौरान ने परीक्षा से पहले अहमदाबाद जाकर सूर्या ऑफसेट ऐंड सिक्योरिटी प्रिंटर्स से प्रूफ रीडिंग के बहाने प्रश्न पत्र हासिल कर लिया था. जबकि अपनी बेटी के उस परीक्षा में शामिल होने की वजह से गौरान ने 1 मार्च, 2013 को खुद को परीक्षा से अलग रहने की बात कही थी. एसओजी ने ये सारे तथ्य आरएएस पेपर लीक मामले में पकड़े गए गिरोह और प्रेस मालिक से पूछताछ से जुटाए. 

वहीं गोवर्धन कहते हैं, ''गौरान पर आरपीएससी चेयरमैन बनने से पहले भी मामला दर्ज था पर कांग्रेस सरकार उन पर मेहरबान रही. सूचना के अधिकार के तहत सूचनाएं भी नहीं मिल पा रही थीं, गौरान ने जिसका जमकर फायदा उठाया और आरपीएससी को राजस्थान घोटाला आयोग बना डाला. '' फिलहाल एसओजी और एसीबी उन सभी मामलों की जांच कर रहे हैं.
विडंबना कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के नेता, यहां तक कि पूर्व सीएम अशोक गहलोत और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद तक ने गौरान की तरफदारी की थी और कहा था कि आयोग सही हाथों में है. लेकिन एसओजी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, उनके घपले सामने आते गए. बीकानेर की जमीन छिनने के बाद अब गौरान और उनकी बेटी के नाम से पूगल इलाके में खरीदी गई जमीन में गड़बड़ी हुई है या नहीं, एसीबी इसकी जांच कर रहा है.

गौरान पर ये हैं आरोप
1. राजस्थान लोकसेवा आयोग (आरपीएससी) में मॉडरेशन के नाम पर प्रश्न पत्र लीक किया
2. आरपीएससी में रहते हुए जुर्माने की राशि का राजकोष से भुगतान करने का आरोप
3. अपनी बेटी के लिए राजस्थान न्यायिक सेवा 2013 परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक किया
4. एलएलबी डिग्री भी गलत तरीके से हासिल की
5. बीकानेर एसपी रहते पेट्रोल पंप आवंटन की एनओसी के लिए गलत रिपोर्ट देने का आरोप
6. रिश्वत मामले में आइपीएस राजेश मीणा के फंसने के समय गौरान का भी नाम उछला
7. जयपुर में अपने मकान में नियमविरुद्ध निर्माण करने का आरोप
8. बीकानेर एसपी रहने के दौरान यूथ कांग्रेस के एक नेता की हत्या को लेकर भी उनकी भूमिका पर सवाल उठे थे
9. बीकानेर में गलत तरीके से जमीन खरीदी
10. सूचना आयोग के दोहरे आदेश के मामले में फर्जी दस्तावेज पेश करने का आरोप
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