उत्तराखंड की तीस फीसदी आबादी की आर्थिक रीढ़ कही जाने वाली चारधाम यात्रा को सरकार ने इस बार शीतकाल के दौरान भी जारी रखने का निर्णय लिया है. चारधाम यात्रा के अब तक के इतिहास में यह पहली बार उठाया गया कदम है. 2011 में बीजेपी सरकार ने भी ऐसी कोशिश की थी, लेकिन तैयारियों के अभाव में वह पूरी नहीं हो पाई.
पिछले साल जून में केदारनाथ में आई आपदा के बाद इस साल चारधाम आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या 60 फीसदी कम हो गई थी. इससे यात्रा पर आश्रित व्यापारियों, स्थानीय व्यवसायियों और निवासियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया. मंदिरों को मिलने वाले चढ़ावे में भी भारी गिरावट आई है. आमदनी कम होने से मंदिरों के तकरीबन 325 कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ गए हैं. केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर के कोष से कर्मचारियों का वेतन दिया जा रहा है. बद्रीकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल कहते हैं, ''तीन-चार साल यही स्थिति रही तो सुरक्षित कोष भी खत्म हो जाएगा. '' इन समस्याओं के मद्देनजर सरकार ने यात्रा को पुराने रूप में वापस लाने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं. इसीलिए शीतकाल में भी यात्रा जारी रखने का फैसला किया गया है.
मुख्यमंत्री हरीश रावत कहते हैं, ''यात्रा के जरिए सरकार 40 लाख पर्यटकों-तीर्थयात्रियों को आकर्षित करना चाहती है. इससे लोगों की आजीविका का रास्ता खुलेगा. '' यह फैसला लेने से पहले सरकार ने केदारनाथ में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक की थी. मंदिरों से जुड़े तीर्थपुरोहितों, पुजारियों और पंडा समाज के प्रतिनिधियों की सहमति से यह फैसला किया गया.
सरकार के इस फैसले को लेकर अन्य राजनैतिक दलों में मिली-जुली प्रतिक्रिया है. मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी के नेता केदारनाथ में हुई बैठक में नहीं पहुंचे और कैबिनेट बैठक को नौटंकी करार दिया. बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट कहते हैं, ''अच्छा होता, यदि राज्य सरकार यह पैसा केदार त्रासदी में तबाह हुए लोगों का जीवन संवारने के लिए खर्च करती. '' भट्ट की इस टिप्पणी के जवाब में राज्य सरकार के प्रवक्ता सुरेंद्र अग्रवाल कहते हैं, ''बीजेपी ने 2011 में ऐसी ही कोशिश की थी, लेकिन वह असफल रही. अब कांग्रेस यह प्रयास कर रही है. इसमें बीजेपी का ऐतराज नाजायज है क्योंकि इससे उनके प्रयासों की कमी लोगों के सामने आ जाएगी. ''
चारधाम यात्रा बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन कर पूरी की जाती है. इस बार शीतकाल में भगवान केदारनाथ, ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर मंे बद्रीनाथ, योगबद्री ध्यान मंदिर, पांडुकेश्वर में मां गंगोत्री और मुखबा गांव में यमुनोत्री के दर्शन का इंतजाम किया जा रहा है. हालांकि तीन धाम केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट अभी बंद हो गए हैं. बद्रीनाथ के कपाट 27 नवंबर को बंद हो जाएंगे. इन सभी स्थानों पर दो बार बर्फबारी हो चुकी है.
मुख्यमंत्री ने तीर्थयात्रियों को चारों धाम के शीतकाल प्रवासस्थल तक सुरक्षित ले जाने के लिए तीनों जिलों के जिला प्रशासन को जरूरी निर्देश दिए हैं. उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग ने इस संबंध में अपनी मांगें शासन को सौंप दी हैं. सरकार ने यात्रा मार्ग वाली सड़कों का सर्वेक्षण कराया है. परिवहन और पुलिस विभाग के सर्वे में 125 संवेदनशील स्थान चिन्हित हुए हैं, जहां सड़क संकरी होने से भूस्खलन का खतरा है. सर्दियों में पहाड़ों पर पाला भी जानलेवा होता है. धूप के लिहाज से पहाड़ की दो दिशाओं को वर्गीकृत किया गया है. जिस हिस्से पर धूप रहती है, वह वर्ड साइड के रूप में चिन्हित है. जहां धूप कम रहती है, उसे विंड वर्ड साइड कहा गया है.
हालांकि शीतकाल के दौरान यात्रा में श्रद्घालुओं को पहाड़ की बर्फबारी के जो नजारे मिलेंगे, वे यादगार हो सकते हैं. बशर्ते उनमें ठंड बर्दाश्त करने की सामर्थ्य हो. ऋषिकेश से पांडुकेश्वर की 274 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद पांडुकेश्वर और गोविंदघाट में पांच हजार लोगों के ठहरने का इंतजाम किया गया है
शीतकाल में इन धामों में तीर्थयात्री आएं, इसके लिए देश के सभी साधु-संतों से सरकार ने निवेदन किया है कि वे अपने समर्थकों को यात्रा पर भेजें. उन्हें यह भी संदेश दें कि यह यात्रा पूरी तरह सुरक्षित है. इसी के लिए सरकार ने श्री श्री रविशंकर, कथावाचक मोरारी बापू, सुधांशु महाराज, महंत रवींद्रपुरी, स्वामी ऋपिरेश्वरानंद, बाबा रामदेव समेत दर्जनों मठों के मठाधीशों और संतों को केदारनाथ की व्यवस्था का जायजा लेने के लिए अनुरोध किया है.
अब बारह मास चारधाम
तीर्थयात्रियों की घटती रुचि से चिंतित उत्तराखंड सरकार का सर्दियों में भी चार धाम यात्रा जारी रखने का फैसला. उम्मीदें भी, अंदेशे भी.

अपडेटेड 4 नवंबर , 2014
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