पिछले साल 43 वर्षीय पुन्नैकोडी ने अपने पांच एकड़ के खेत से 20 लाख रु. कमाए. उसने लॉकी, तोरी जैसी सब्जियां उगाईं. पुन्नैकोडी पुडुचेरी के तीसरी पीढ़ी के उन अनेक किसानों में से एक हैं, जिन्होंने परिवार का पेशा जारी रखने का फैसला किया, जबकि बहुत से दूसरे किसान अपनी जमीन-जायदाद बेचकर कारोबार शुरू कर रहे हैं.
कृषि निदेशक ए. रामामूर्ति के अनुसार पुडुचेरी के खेत सिकुड़ रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सड़कों, पुलों और मकानों के लिए बेहिसाब जमीन खरीदी जा रही है. निर्माण और उद्योग मजदूरों को खींच रहे हैं, जिससे कोई खेती नहीं करना चाहता.’’
फिर भी राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र की प्रतिशत हिस्सेदारी पिछले साल से बढ़ती जा रही है. राज्य में इस समय 26,063 हेक्टेयर जमीन पर खेती हो रही है.

सरकार ने कृषि संबंधी वृद्धि को सहारा देने और आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाई है. 2013-14 में खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए बजट 87 करोड़ रु. का था, जो इस वर्ष 18 फीसदी बढ़ाकर 102 करोड़ रु. कर दिया गया है.
कृषि विभाग ने 13 नई योजनाएं घोषित की हैं. इनमें सबसे अहम खेती में मशीनों के इस्तेमाल, कीटों के विनाश, सटीक खेती और उत्तम बीजों की आपूर्ति से जुड़ी हैं. इनका उद्देश्य कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूती प्रदान करना है और किसानों को कृषि ह्नेत्र में अधिक सक्षम बनाना है.
सरकार ने कृषि ऋण के लिए 767 करोड़ रु. की निधि रखी है, जिससे 2014-15 में 85,000 किसानों को लाभ मिल सकेगा. रामामूर्ति के अनुसार, ‘‘खेत में मशीनें आने से काम जल्दी होता है ज्यादा काम होता है. इससे बीज, खाद और पानी की बचत होती है. हमने व्यवस्था की है कि अधिक किसानों को रियायती दाम पर मशीनें मिलें.’’ कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में यह एकदम सार्थक कदम है.
कृषि निदेशक ए. रामामूर्ति के अनुसार पुडुचेरी के खेत सिकुड़ रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सड़कों, पुलों और मकानों के लिए बेहिसाब जमीन खरीदी जा रही है. निर्माण और उद्योग मजदूरों को खींच रहे हैं, जिससे कोई खेती नहीं करना चाहता.’’
फिर भी राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र की प्रतिशत हिस्सेदारी पिछले साल से बढ़ती जा रही है. राज्य में इस समय 26,063 हेक्टेयर जमीन पर खेती हो रही है.

सरकार ने कृषि संबंधी वृद्धि को सहारा देने और आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाई है. 2013-14 में खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए बजट 87 करोड़ रु. का था, जो इस वर्ष 18 फीसदी बढ़ाकर 102 करोड़ रु. कर दिया गया है.
कृषि विभाग ने 13 नई योजनाएं घोषित की हैं. इनमें सबसे अहम खेती में मशीनों के इस्तेमाल, कीटों के विनाश, सटीक खेती और उत्तम बीजों की आपूर्ति से जुड़ी हैं. इनका उद्देश्य कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूती प्रदान करना है और किसानों को कृषि ह्नेत्र में अधिक सक्षम बनाना है.
सरकार ने कृषि ऋण के लिए 767 करोड़ रु. की निधि रखी है, जिससे 2014-15 में 85,000 किसानों को लाभ मिल सकेगा. रामामूर्ति के अनुसार, ‘‘खेत में मशीनें आने से काम जल्दी होता है ज्यादा काम होता है. इससे बीज, खाद और पानी की बचत होती है. हमने व्यवस्था की है कि अधिक किसानों को रियायती दाम पर मशीनें मिलें.’’ कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में यह एकदम सार्थक कदम है.

