उसे ऐसा लगा कि उसकी देह आग में झुलस रही है. उसके चेहरे पर सिर्फ आंखें थीं, जो इस तपिश से बची रह गई थीं, क्योंकि जब उस शख्स ने उसके चेहरे पर एसिड फेंका तो उसने अपने हाथों से मुंह को ढक लिया था. इसके बाद जमीन पर सदमे में पड़े रहने के दौरान उसे सिर्फ पास से गुजरते ट्रैफिक की आवाज सुनाई दे रही थी. इस एसिड हमले में बच गईं और इंडिया टुडे के विमेन समिट में इंस्पिरेशनल विमेन ऑफ द ईयर का अवॉर्ड पाने वाली लक्ष्मी अग्रवाल ने कुछ इसी तरह से उस पल का वर्णन इंडिया टुडे विमेन अवॉर्ड 2014 के कार्यक्रम में श्रोताओं के सामने किया. यही वह घटना थी, जिसने उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल डाला था. उनके साथ मंच पर थीं एक और साहसी महिला अरुणिमा सिन्हा, जिन्होंने ट्रेन से धकेल दिए जाने पर अपना एक पैर गंवा दिया था. बाद में वे ऐसी पहली महिला बनीं, जिसने नकली पैरों के सहारे 21 मई, 2013 को माउंट एवरेस्ट पर फतह हासिल की.
दिन भर चला यह कार्यक्रम बहुत भावनात्मक, संजीदगी भरा और कबूलनामों से युक्त रहा, जिसकी शुरुआत लाल कालीन पर मेहमानों के आने से हुई थी और समापन बैक-टु-बैक चलने वाले प्रेरणास्पद सत्रों से हुआ.

पिछले कुछ वर्षों में इंडिया टुडे का विमेन कॉन्क्लेव भारत की महिलाओं द्वारा झेली जा रही समस्याओं को आवाज देने का मंच बन चुका है. आयोजन की शुरुआत इंडिया टुडे समूह की सिनर्जी और क्रिएटिव ऑफिसर कली पुरी के स्वागत भाषण से हुई. उन्होंने कहा, ‘‘इंडिया टुडे की विमेन पत्रिका और यह सम्मेलन स्त्री की संपूर्णता का उत्सव है. यह हम औरतों की अपनी दुनिया से ताल्लुक रखता है, जहां जिंदगी के हर क्षेत्र से आने वाली महिलाओं का जमावड़ा होता है. यह आयोजन सीधे दिल से जुड़ा हुआ है.’’ और यह वाकई सीधे दिल से जुड़ा हुआ ही साबित हुआ. चाहे वे मनीषा कोइराला हों, जिन्होंने कीमोथेरेपी की चुनौतियों से पार पाने और खुद को कैंसर पर विजय पाने वाली महिला के रूप में नए सिरे से खोजने की कहानी कही, या फिर मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी हों, जिन्होंने स्वीकार किया कि एक जमाने में वे दिल्ली के जनपथ पर रोजाना 200 रु. की दिहाड़ी पर सौंदर्य प्रसाधन बेचा करती थीं. यह समूचा दिन महिलाओं के नाम रहा.
कार्यक्रम की शुरुआत पावर ऐंड पॉलिटिक्सः व्हाय विमेन हैंडल बोथ बेटर नाम के सत्र से करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने माना कि परिवार और सियासत के बीच एक संतुलन को लगातार साधे रखना महिलाओं के लिए बड़ा चुनौती भरा काम होता है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां मौजूद किसी भी महिला से बिल्कुल अलग नहीं हूं. घर पर बच्चों को संभालना हो, अपने चुनाव क्षेत्र को देखना हो या फिर राजनीति के कामधाम हों. आप समझ सकते हैं कि यह सबकुछ एक साथ निभाना कितना मुश्किल काम होता होगा. मेरे राजनीति में आने का नुकसान मेरे बच्चों को उठाना पड़ा है.’’ अगले सत्र बीटिंग कैंसरः लिविंग टु टेल द टेल में मनीषा कोइराला ने कैंसर से अपनी जंग के बारे में ईमानदारी से बताया और यह कि अपनी मौत को सामने खड़ा देख कैसा लगता है. उन्होंने कहा, ‘‘आपके साथ जब ऐसा कुछ होता है तो आप महसूस करते हैं कि अब तक जो कुछ भी था, सब एक झ्टके में जा सकता है. मेरे भीतर बहुत कुछ बदला है. अब मैं जिंदगी को और लोगों को ज्यादा प्यार करती हूं. मेरे पास मूल्य हैं. मेरे पास यह जिंदगी है. मैं घास पर चल सकती हूं. मैं सूर्यास्त और सूर्योदय देख सकती हूं. वैसे तो ये सब छोटी-छोटी चीजें हैं, लेकिन यही हैं जो आपके होने और जीने में फर्क पैदा करती हैं. अब मैं जी रही हूं.’’
अगली बारी बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गट्टा और पी.वी. सिंधु तथा स्क्वैश खिलाड़ी दीपिका पल्लीकल की थी, जिन्होंने एक महिला के खेल की दुनिया में अपना करियर बनाने की चुनौतियों पर बात रखी. गट्टा ने कहा, ‘‘चीनी लड़कियों को बस खेलना होता है. लेकिन यहां तो आपका परिवार और समाज स्कर्ट की लंबाई पर ही चार बातें सुनाने लगता है. उन्हें इस बात से रत्ती भर लेना-देना नहीं है कि वह आरामदेह है या नहीं. उसे बस छोटा नहीं होना चाहिए.’’

माइंड, बॉडी, सोलः द मंत्रा ऑफ मेकओवर नाम के अगले सत्र की शुरुआत कॉस्मेटिक फिजिशियन रश्मि शेट्टी, सामाजिक उद्यमी और योग शिक्षक सारा अब्दुल्ला पायलट, इमेज कंसल्टेंट छाया मोमाया और न्यूट्रीशनिस्ट तथा हेल्थ काउंसलर तपस्या मूंधड़ा ने की. उनका कहना था कि महिलाओं को न सिर्फ अपनी बाहरी साज-सज्जा, बल्कि अपनी अंदरूनी सेहत पर भी ध्यान देना चाहिए. इस बात को रेखांकित करते हुए पायलट ने कहा, ‘‘सौंदर्य में कुछ भी सही या गलत नहीं होता. बस यह जान लीजिए कि आपको क्या पसंद है और आप किस चीज के साथ जीना चाहती हैं.’’ शेट्टी ने कहा, ‘‘एंटी एजिंग का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि चेहरे पर झुर्रियां न हों, बल्कि यह है कि आप हर उम्र में अच्छी और चुस्त-दुरुस्त दिखें.’’
दोपहर चढ़ रही थी और मेहमान वीएलसीसी के सौजन्य से आरामदेह मसाज और वाइन का आनंद ले रहे थे. वहीं दूसरी ओर मॉडल शानदार ज्यूलरी का प्रदर्शन कर रही थीं. अचानक सभागार में अभिनेता इमरान खान आए और सबके दिलों की धड़कनें बढ़ गईं. इमरान अकेले ऐसे पुरुष वक्ता थे, जिन्होंने द आइडल ट्रैपः रेटरिक वर्सेज रिएलिटी पर अपना वक्तव्य दिया. उन्होंने कहा, ‘‘दूसरे को खारिज करने के दो तरीके हैः एक उनका अपमान करना और दूसरे उसे आदर्श बना देना. आप किसी की प्रतिमा गढ़कर उसे इंसानी प्रवृत्तियों से वंचित कर देते हैं, उसकी भावनाओं को खारिज कर देते हैं, उस पर नियंत्रण कर लेते हैं और उस नियंत्रण को अपने सरोकार का नाम दे देते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में खुद महिलाओं की हिस्सेदारी इसे और भी ज्यादा षड्यंत्रकारी बना देती है.’’
लिविंग विद लीगेसी नाम से हुई बहस में तीन युवाओं ने परिवारवाद पर चर्चा की. असम के सिल्चर से सांसद सुष्मिता देव ने कहा, ‘‘विरासत का सबसे कठिन हिस्सा लगातार की जाने वाली तुलना है.’’ तो अपोलो चैरिटी की वाइस चेयरमैन उपासना कामिनेनी ने कहा, ‘‘जहां एक ओर अपनी निजता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है, वहीं विरासत आपको आपके परिवार से जोड़े रखती है. आप साथ काम कर रहे हों तो भी अंततः एक परिवार ही बने रहते हैं.’’
बहस को बोर्डरूम से राजनीति की ओर मोड़ते हुए स्मृति ईरानी ने महिलाओं के आवाज उठाने और सुने जाने पर बात की. जिंदगी में झेली चुनौतियों और अपने करियर की शुरुआत के बारे में मानव संसाधन विकास मंत्री ने बताया, ‘‘मैं दिल्ली के जनपथ पर 200 रु. रोज की दिहाड़ी पर कॉस्मेटिक्स बेचा करती थी. लेकिन लोगों के लिए मेरा संदेश यह है कि कॉस्मेटिक्स बेचने वाली एक लड़की भी इस देश में मंत्री बन सकती है. मेरी विरासत यह है कि एक नौजवान लड़की मुझे एक ऐसी शख्सियत के रूप में देख सके, जिसने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी.’’

राजनीति में औरतों के होने का क्या मतलब होता है, इस पर सांसद किरण खेर और अभिनेत्री तथा डीएमके की पूर्व प्रवक्ता खुशबू ने अपनी तल्ख बयानी से श्रोताओं को मुग्ध कर दिया. खेर ने कहा, ‘‘राजनीति में आने के बाद मैंने खुद को बदलने के लिए सचेत प्रयास किए हैं. मैंने समझा कि मैं हमेशा ऐसी ही मुंहफट नहीं रह सकती. यह अब भी मेरी कमजोरी है, लेकिन मैं इसे बदल रही हूं.’’ खुशबू ने कहा, ‘‘मेरी पीठ पर मोर गुदा हुआ है, इसलिए मैंने संसद में और पार्टी की बैठकों में ऊंचे गले वाला ब्लाउज पहनना शुरू किया. राजनीति का एक नियम हैः लोगों का ध्यान न बंटाएं.’’
रात के खाने पर अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी का संबोधन हुआ. कारोबारी बनने के अपने सफर की दास्तान सुनाते हुए शिल्पा ने पूछा, ‘‘हां, मैंने अपनी नाक ठीक करवाई है. तो इसमें ऐसी कौन-सी बड़ी बात हो गई?’’ बॉलीवुड में अपने करियर की चुनौतियों के बारे में उन्होंने बताया, ‘‘आजकल इंडस्ट्री में नए कलाकार बहुत तैयारी के साथ आते हैं. हमने तो काम करते हुए सीखा था. मैं अब भी सोचती हूं कि अगर मैं पहले परिपक्व हो गई होती तो काफी कुछ हासिल कर लेती. ’’ शिल्पा ने आलोचनाओं से निबटने का अपना नुस्खा बताया, ‘‘एक सेलेब्रिटी के तौर पर मैंने बीते बरसों में सीखा है कि कभी शिकायत मत करो, कभी सफाई मत दो.’’ उन्होंने बताया कि कैसे योग ने उनकी देहयष्टि को शानदार बनाए रखा है.
शाम ढल रही थी. अब कला, मनोरंजन, कारोबार, खेल और एक्टिविज्म की दुनिया से 10 अद्वितीय महिलाओं को चुने जाने की बारी थी. इन महिलाओं ने न सिर्फ अपने जीवन में आई मुश्किलों को झूठा ठहराया और फर्क पैदा किया, बल्कि ये कई और महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बनी हैं.
दिन भर चला यह कार्यक्रम बहुत भावनात्मक, संजीदगी भरा और कबूलनामों से युक्त रहा, जिसकी शुरुआत लाल कालीन पर मेहमानों के आने से हुई थी और समापन बैक-टु-बैक चलने वाले प्रेरणास्पद सत्रों से हुआ.

पिछले कुछ वर्षों में इंडिया टुडे का विमेन कॉन्क्लेव भारत की महिलाओं द्वारा झेली जा रही समस्याओं को आवाज देने का मंच बन चुका है. आयोजन की शुरुआत इंडिया टुडे समूह की सिनर्जी और क्रिएटिव ऑफिसर कली पुरी के स्वागत भाषण से हुई. उन्होंने कहा, ‘‘इंडिया टुडे की विमेन पत्रिका और यह सम्मेलन स्त्री की संपूर्णता का उत्सव है. यह हम औरतों की अपनी दुनिया से ताल्लुक रखता है, जहां जिंदगी के हर क्षेत्र से आने वाली महिलाओं का जमावड़ा होता है. यह आयोजन सीधे दिल से जुड़ा हुआ है.’’ और यह वाकई सीधे दिल से जुड़ा हुआ ही साबित हुआ. चाहे वे मनीषा कोइराला हों, जिन्होंने कीमोथेरेपी की चुनौतियों से पार पाने और खुद को कैंसर पर विजय पाने वाली महिला के रूप में नए सिरे से खोजने की कहानी कही, या फिर मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी हों, जिन्होंने स्वीकार किया कि एक जमाने में वे दिल्ली के जनपथ पर रोजाना 200 रु. की दिहाड़ी पर सौंदर्य प्रसाधन बेचा करती थीं. यह समूचा दिन महिलाओं के नाम रहा.
कार्यक्रम की शुरुआत पावर ऐंड पॉलिटिक्सः व्हाय विमेन हैंडल बोथ बेटर नाम के सत्र से करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने माना कि परिवार और सियासत के बीच एक संतुलन को लगातार साधे रखना महिलाओं के लिए बड़ा चुनौती भरा काम होता है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां मौजूद किसी भी महिला से बिल्कुल अलग नहीं हूं. घर पर बच्चों को संभालना हो, अपने चुनाव क्षेत्र को देखना हो या फिर राजनीति के कामधाम हों. आप समझ सकते हैं कि यह सबकुछ एक साथ निभाना कितना मुश्किल काम होता होगा. मेरे राजनीति में आने का नुकसान मेरे बच्चों को उठाना पड़ा है.’’ अगले सत्र बीटिंग कैंसरः लिविंग टु टेल द टेल में मनीषा कोइराला ने कैंसर से अपनी जंग के बारे में ईमानदारी से बताया और यह कि अपनी मौत को सामने खड़ा देख कैसा लगता है. उन्होंने कहा, ‘‘आपके साथ जब ऐसा कुछ होता है तो आप महसूस करते हैं कि अब तक जो कुछ भी था, सब एक झ्टके में जा सकता है. मेरे भीतर बहुत कुछ बदला है. अब मैं जिंदगी को और लोगों को ज्यादा प्यार करती हूं. मेरे पास मूल्य हैं. मेरे पास यह जिंदगी है. मैं घास पर चल सकती हूं. मैं सूर्यास्त और सूर्योदय देख सकती हूं. वैसे तो ये सब छोटी-छोटी चीजें हैं, लेकिन यही हैं जो आपके होने और जीने में फर्क पैदा करती हैं. अब मैं जी रही हूं.’’
अगली बारी बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गट्टा और पी.वी. सिंधु तथा स्क्वैश खिलाड़ी दीपिका पल्लीकल की थी, जिन्होंने एक महिला के खेल की दुनिया में अपना करियर बनाने की चुनौतियों पर बात रखी. गट्टा ने कहा, ‘‘चीनी लड़कियों को बस खेलना होता है. लेकिन यहां तो आपका परिवार और समाज स्कर्ट की लंबाई पर ही चार बातें सुनाने लगता है. उन्हें इस बात से रत्ती भर लेना-देना नहीं है कि वह आरामदेह है या नहीं. उसे बस छोटा नहीं होना चाहिए.’’

माइंड, बॉडी, सोलः द मंत्रा ऑफ मेकओवर नाम के अगले सत्र की शुरुआत कॉस्मेटिक फिजिशियन रश्मि शेट्टी, सामाजिक उद्यमी और योग शिक्षक सारा अब्दुल्ला पायलट, इमेज कंसल्टेंट छाया मोमाया और न्यूट्रीशनिस्ट तथा हेल्थ काउंसलर तपस्या मूंधड़ा ने की. उनका कहना था कि महिलाओं को न सिर्फ अपनी बाहरी साज-सज्जा, बल्कि अपनी अंदरूनी सेहत पर भी ध्यान देना चाहिए. इस बात को रेखांकित करते हुए पायलट ने कहा, ‘‘सौंदर्य में कुछ भी सही या गलत नहीं होता. बस यह जान लीजिए कि आपको क्या पसंद है और आप किस चीज के साथ जीना चाहती हैं.’’ शेट्टी ने कहा, ‘‘एंटी एजिंग का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि चेहरे पर झुर्रियां न हों, बल्कि यह है कि आप हर उम्र में अच्छी और चुस्त-दुरुस्त दिखें.’’
दोपहर चढ़ रही थी और मेहमान वीएलसीसी के सौजन्य से आरामदेह मसाज और वाइन का आनंद ले रहे थे. वहीं दूसरी ओर मॉडल शानदार ज्यूलरी का प्रदर्शन कर रही थीं. अचानक सभागार में अभिनेता इमरान खान आए और सबके दिलों की धड़कनें बढ़ गईं. इमरान अकेले ऐसे पुरुष वक्ता थे, जिन्होंने द आइडल ट्रैपः रेटरिक वर्सेज रिएलिटी पर अपना वक्तव्य दिया. उन्होंने कहा, ‘‘दूसरे को खारिज करने के दो तरीके हैः एक उनका अपमान करना और दूसरे उसे आदर्श बना देना. आप किसी की प्रतिमा गढ़कर उसे इंसानी प्रवृत्तियों से वंचित कर देते हैं, उसकी भावनाओं को खारिज कर देते हैं, उस पर नियंत्रण कर लेते हैं और उस नियंत्रण को अपने सरोकार का नाम दे देते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में खुद महिलाओं की हिस्सेदारी इसे और भी ज्यादा षड्यंत्रकारी बना देती है.’’
लिविंग विद लीगेसी नाम से हुई बहस में तीन युवाओं ने परिवारवाद पर चर्चा की. असम के सिल्चर से सांसद सुष्मिता देव ने कहा, ‘‘विरासत का सबसे कठिन हिस्सा लगातार की जाने वाली तुलना है.’’ तो अपोलो चैरिटी की वाइस चेयरमैन उपासना कामिनेनी ने कहा, ‘‘जहां एक ओर अपनी निजता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है, वहीं विरासत आपको आपके परिवार से जोड़े रखती है. आप साथ काम कर रहे हों तो भी अंततः एक परिवार ही बने रहते हैं.’’
बहस को बोर्डरूम से राजनीति की ओर मोड़ते हुए स्मृति ईरानी ने महिलाओं के आवाज उठाने और सुने जाने पर बात की. जिंदगी में झेली चुनौतियों और अपने करियर की शुरुआत के बारे में मानव संसाधन विकास मंत्री ने बताया, ‘‘मैं दिल्ली के जनपथ पर 200 रु. रोज की दिहाड़ी पर कॉस्मेटिक्स बेचा करती थी. लेकिन लोगों के लिए मेरा संदेश यह है कि कॉस्मेटिक्स बेचने वाली एक लड़की भी इस देश में मंत्री बन सकती है. मेरी विरासत यह है कि एक नौजवान लड़की मुझे एक ऐसी शख्सियत के रूप में देख सके, जिसने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी.’’

राजनीति में औरतों के होने का क्या मतलब होता है, इस पर सांसद किरण खेर और अभिनेत्री तथा डीएमके की पूर्व प्रवक्ता खुशबू ने अपनी तल्ख बयानी से श्रोताओं को मुग्ध कर दिया. खेर ने कहा, ‘‘राजनीति में आने के बाद मैंने खुद को बदलने के लिए सचेत प्रयास किए हैं. मैंने समझा कि मैं हमेशा ऐसी ही मुंहफट नहीं रह सकती. यह अब भी मेरी कमजोरी है, लेकिन मैं इसे बदल रही हूं.’’ खुशबू ने कहा, ‘‘मेरी पीठ पर मोर गुदा हुआ है, इसलिए मैंने संसद में और पार्टी की बैठकों में ऊंचे गले वाला ब्लाउज पहनना शुरू किया. राजनीति का एक नियम हैः लोगों का ध्यान न बंटाएं.’’
रात के खाने पर अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी का संबोधन हुआ. कारोबारी बनने के अपने सफर की दास्तान सुनाते हुए शिल्पा ने पूछा, ‘‘हां, मैंने अपनी नाक ठीक करवाई है. तो इसमें ऐसी कौन-सी बड़ी बात हो गई?’’ बॉलीवुड में अपने करियर की चुनौतियों के बारे में उन्होंने बताया, ‘‘आजकल इंडस्ट्री में नए कलाकार बहुत तैयारी के साथ आते हैं. हमने तो काम करते हुए सीखा था. मैं अब भी सोचती हूं कि अगर मैं पहले परिपक्व हो गई होती तो काफी कुछ हासिल कर लेती. ’’ शिल्पा ने आलोचनाओं से निबटने का अपना नुस्खा बताया, ‘‘एक सेलेब्रिटी के तौर पर मैंने बीते बरसों में सीखा है कि कभी शिकायत मत करो, कभी सफाई मत दो.’’ उन्होंने बताया कि कैसे योग ने उनकी देहयष्टि को शानदार बनाए रखा है.
शाम ढल रही थी. अब कला, मनोरंजन, कारोबार, खेल और एक्टिविज्म की दुनिया से 10 अद्वितीय महिलाओं को चुने जाने की बारी थी. इन महिलाओं ने न सिर्फ अपने जीवन में आई मुश्किलों को झूठा ठहराया और फर्क पैदा किया, बल्कि ये कई और महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बनी हैं.

