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सैलानियों को शाही एहसास कराने का फंडा

जैसलमेर आने वाले सैलानियों की संख्या में इजाफे को देखते हुए यहां आधुनिक सुविधाओं से लैस प्राचीन हवेलीनुमा कई होटल शुरू.

अपडेटेड 11 अगस्त , 2014
रजवाड़े चले गए, रियासतें खत्म हो गईं. लेकिन लगता है, उस शाही एहसास को हासिल करने की तमन्ना नहीं गई है. शायद यही वजह है कि उस दौर में बनने वाले किलों और हवेलियों का जमाना एक बार फिर-से लौट आया है. जी हां, कम-से-कम राजस्थान के 12वीं शती के खूबसूरत प्राचीन शहर जैसलमेर में तो कुछ ऐसा ही है. यहां प्राचीन हवेलियों की तर्ज पर बने नए पांच सितारा और तीन सितारा होटल शुरू हुए हैं, जो वाकई किसी शाही किले या हवेली से कम नही हैं. इसकी वजह यहां दिनोंदिन देशी-विदेशी सैलानियों की संख्या में हो रहा इजाफा है. और ऐसे होटलों के प्रति उनका रुझान बढ़ रहा है.

ऐसे कई होटल निर्माणधीन हैं और उनमें भी प्राचीन हवेलियों की साज-सज्जा ही अपनाई जा रही है. पिछले दो वर्ष में आधा दर्जन से ज्यादा पांच सितारा और तीन सितारा होटल तो दो दर्जन से ज्यादा लक्जरी होटल आकर्षक फ्रंट ऐलिवेशन और साज-सज्जा के साथ खुल गए हैं.

 यहां एक दिलचस्प किंवदंती सुनी जाती है कि संवत् 1212 में त्रिकुट पहाड़ी पर जैसलमेर रियासत के राजा महारावल जैसल ने खूबसूरत नक्काशी और शिल्प-सौंदर्य से परिपूर्ण 99 बुर्जों वाला सोनार किला बनवाया था. तब वैसा किला दोबारा न बने, इसके लिए उन्होंने दर्जनों कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे. यह बात  भले सच न हो और इसके प्रमाण इतिहास में न मिलें, लेकिन इसमें दो राय नहीं कि सोनार किला पूरी दुनिया में अनूठा है. और अगर इस किंवदंती को सच  मानें, तो भी महाराजा जैसल को अपने उद्देश्य में सफल तो नहीं ही कहा जा सकता. आज भी यहां ऐसे युवा कलाकार मौजूद हैं जो उस रियासतकालीन सभ्यता के अनुरूप हवेलियां बनाने का माद्दा रखते हैं. इन युवा शिल्पकारों के हुनर की बदौलत ही जैसलमेर में ऐसे भव्य होटल आकार ले रहे हैं. ये लोग प्राचीन बारीक से बारीक कारीगरी में माहिर है और यहां के छोटे-बड़े हर होटल में बारीक नक्काशी का सफल इस्तेमाल कर रहे हैं.

इन हवेलीनुमा होटलों में हो रहे निर्माणकार्य से यहां पत्थर पर शिल्पकारी के व्यवसाय में भी इजाफा हुआ है और युवाओं को रोजगार मिल रहा है. इसका उदाहरण जैसलमेर से 15 किलोमीटर दूर सोनार किले की तर्ज पर बनाया गया होटल सूर्यगढ़ है. अब इस होटल में पालीवाल ब्राह्मणों के त्यागे गए गांव कुलधरा मॉडल के कमरे बनाए जा रहे हैं. इस काम में करीब 150 कारीगर दिन-रात जुटे हैं. अपनी शिल्पकला की बदौलत उन्हें अच्छा पैसा मिल रहा है. यहां काम कर रहे युवा सहतीर, सेवाराम, नारायण लाल, समे खां बताते हैं कि वे यहां दो साल से इस होटल में जाली, झ्रोखे बनाने और शिल्पकारी में लगे हैं. इसकी एवज में उन्हें रोजाना 600 से 700 रु. मिल रहे हैं.

जाहिर है, इन होटलों के निर्माण से पहले विभिन्न प्राचीन किलों का निरीक्षण करना पड़ता है. सूर्यगढ़ होटल में काम की देखरेख कर रहे उस्ताद करीम भाई बताते हैं कि वे होटल के मालिक मानवेंद्र सिंह के साथ बूंदी, आमेर, मेहरानगढ़ आदि किलों का दौरा कर वहां की बनावट देखकर ही सूर्यगढ़ प्रोजेक्ट की डिजाइन बनाने में जुटे. वे कहते हैं, ''मेरे पिता और दादा भी जाली, झ्रोखों के साथ शिल्प उकेरने का काम करते थे. मैंने भी यही पेशा अपनाया है. इसका भविष्य उज्जवल है. ''   
जैसलमेर में होटल
दो वर्ष पूर्व शुरू हुआ यह पांच सितारा होटल  कई किलोमीटर दूर से ही रेगिस्तानी किले की तरह नजर आता है. इसमें 64 कमरे हैं. सूर्यगढ़ में उसी तरह घंटियां, बुर्ज, द्वार और अन्य बनावट की गई हैं जैसी कि सोनार किले में है. होटल के मैनेजिंग डायरेक्टर मानवेंद्र सिंह कहते हैं, ''मैंने मरुभूमि की सभ्यता और बसावट को जिंदा रखने के लिए इस होटल को जैसलमेर किले का रूप दिया है और इसके लिए राजस्थान के कई जिलों में ऐतिहासिक किलों का दौरा किया. '' वे बताते हैं कि देशी-विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने के लिये होटल की आंतरिक सजावट उसी पुरानी रियासत के समय के अनुरूप की गई है. बार, रेस्टोरेंट, स्पा, जिम, स्वीमिंग पूल के नाम पुराने पारंपरिक नामों पर रखे गए हैं जैसे दाख, अखाड़ा, कोटयार्ड, रेत आदि. होटल में खूबसूरत कृत्रिम झील भी बनाई गई है.

ऐसे कुछ पांच सितारा होटल अभी निर्माणधीन हैं. इन दिनों सम रोड पर होटल मेरियट का निर्माण चल रहा है. होटल का निर्माण कर रहे राधे गोविंद कृपा डेवलपर्स के डायरेक्टर गोरधन दास झंवर कहते हैं, ''पर्यटकों के टेस्ट को देखते हुए हर कमरे में झ्रोखे लगाए जा रहे हैं, जो पूरी तरह प्राचीन राजस्थानी हवेलियों की छटा लिए हुए हैं. '' इसी तरह पिछले वर्ष फरवरी में शुरू हुआ होटल ब्राईस फोर्ट भी है. इसके ऑपरेशन मैनेजर जसबीर चौधरी कहते हैं,''इस होटल का निर्माण जैसलमेरी कला संस्कृति के अनुरूप किया गया है. इसमें फिलहाल विभिन्न श्रेणियों के 42 कमरे हैं. ''

डेजर्ट ट्यूलिपयहां के तीन सितारा होटल रंगमहल के मालिक पृथ्वीराज कहते हैं, ''छोटे किलों को कोर्ट या गढ़ी कहा जाता है. मैंने अपने होटल का डिजाइन उसी प्राचीन कोट के अनुरूप तैयार किया है. होटल के फ्रंट इलिवेशन और अंदर प्रवेश के बाद जाली झ्रोखे वाली बालकनी देखकर सैलानी रोमांचित हो जाते हैं. '' दो वर्ष पहले शुरू हुआ तीन सितारा होटल डेजर्ट ट्यूलिप भी पीले पत्थर से उकेरी गई सजावट से खूबसूरत बन पड़ा है. इसके अलावा इसी साल जैसल विलास, चोखी ढाणी जैसे खूबसूरत होटल भी खुल चुके हैं. ऐसे कुछ होटल यहां पहले से ही चल रहे हैं. इनमें फोर्ट रजवाड़ा, गोरबंध पैलेस, रावलकोट, हेरिटेजइन, जवाहर निवास और मूनलाइट प्रमुख हैं. और तो और, करीब 24 नए लक्जरी होटल भी शुरू हुए हैं. इनमें स्काई प्लाजा, अजंता हवेली प्रमुख हैं.

जैसलमेर में प्रतिवर्ष करीब 5 लाख सैलानी आते हैं जिसमें 3.5 लाख देशी और 1.5 लाख विदेशी हैं. हर वर्ष सैलानियों की संख्या बढ़ती जा रही है. देशी सैलानियों में मुंबई, पंजाब, दिल्ली, गुजरात, पश्चिम बंगाल से यहां आने का रुझान बढ़ा है. लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं. रजवाड़ा फोर्ट होटल के जनरल मेनेजर विजेन्द्र सिंह कुंपावत बताते हैं, ''जैसलमेर में एयर कनेक्टीविटी हो जाए और मुंबई आदि बड़े शहरों में लंबी दूरियों की गाडिय़ां चलनी शुरू हो जाएं तो सैलानियों की संख्या में और इजाफा होगा.
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