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छोटे शहर का बड़ा जलवा

उत्तर प्रदेश के इंटरमीडिएट और हाइस्कूल बोर्ड की परीक्षाओं में लखनऊ से सटे बाराबंकी की बारह लड़कियों ने मेरिट लिस्ट में जगह बनाया.

अपडेटेड 9 जून , 2014
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 25 मई को जब इंटरमीडिएट परीक्षा के नतीजे घोषित किए तो तमाम सियासी सरगर्मियों के बीच बाराबंकी अचानक सुर्खियों का केंद्र बन गया. यहां की छात्राओं ने न केवल पहले तीन पायदानों पर कब्जा जमाया, बल्कि 'टॉप टेन' मेधावियों की सूची में कुल 12 छात्राओं ने अपनी मौजूदगी दर्ज कर दी.

यहां की छात्रा 17 वर्षीया दीक्षा वर्मा और 18 वर्षीया रिया वर्मा संयुक्त रूप से इंटरमीडिएट में प्रथम आई हैं. 2012 में 90 प्रतिशत अंकों के साथ हाइस्कूल पास करने वाली दीक्षा ने अपने पिता विजय कुमार वर्मा से मेरिट लिस्ट में आने का वादा किया था. आखिर 25 मई की तारीख वह घड़ी लेकर आई, जब मेरिट सूची में दीक्षा का नाम सबसे ऊपर देखकर पिता की आंखें भर आईं. बाराबंकी के राम सेवक यादव स्मारक इंटर कॉलेज में पढऩे वाली दीक्षा कहती हैं, ''केमिस्ट्री और गणित पर खास ध्यान देने और रोज स्कूल में पढ़ाए गए पाठ को घर आकर दोहराने से मुझे यह सफलता मिली है. '' फिल्मी गानों की शौकीन दीक्षा का अगला पड़ाव आइआइटी में दाखिला लेना है.

दीक्षा के साथ पहला स्थान साझा करने वाली 18 वर्षीया रिया वर्मा ने दो साल पहले हाइस्कूल में चौथा स्थान हासिल किया था. महारानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल इंटर कॉलेज की छात्रा रिया कहती हैं, ''हाइस्कूल में कंप्यूटर साइंस में नंबर कम आए थे. इंटरमीडिएट में मैंने उसकी जगह अंग्रेजी विषय लिया. '' बाराबंकी से 30 किलोमीटर दूर दक्षिण में एक छोटे-से कस्बे कोठी में फर्नीचर की दुकान चलाने वाले रिया के पिता अरुण कुमार वर्मा अब इलाके में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी रिया के बारे में वर्मा कहते हैं, ''हाइस्कूल में मेरिट में आने के बाद भी वह संतुष्ट नहीं थी. मुझे तभी लगा कि इंटरमीडिएट परीक्षा में जरूर धमाका करेगी.'' स्कूल को सफलता का श्रेय देने में रिया कोताही नहीं बरततीं. वे बताती हैं कि स्कूल में कोचिंग पढऩा मना था और यदि कोई विषय समझ् में नहीं आता तो शिक्षक अलग से पढ़ाते थे.

महारानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल इंटर कॉलेज की ही छात्रा 17 वर्षीया रीशू वर्मा और तनुश्री वर्मा ने मेरिट सूची में संयुक्त रूप से दूसरा स्थान हासिल किया है. हाइस्कूल में मेरिट सूची में तीसरे नंबर पर रही रीशू ने इस बार 97 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानने वाली रीशू का लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना है. बाराबंकी के शांति निकेतन जूनियर हाइस्कूल में प्रिंसिपल और गणित के अध्यापक दिनेश चंद्र वर्मा की बेटी तनुश्री वर्मा अपने पिता की तरह ही गणित के कठिन सवाल चुटकियों में हल कर देती है. वे कहती हैं, ''गणित में तेज विद्यार्थी अन्य विषयों में कभी पीछे नहीं रह सकता. यही मेरी सफलता का मूलमंत्र है. '' वह आइआइटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश लेना चाहती हैं.

हाइस्कूल परीक्षा की मेरिट सूची में पहला स्थान पाने वाली महारानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल इंटर कॉलेज की छात्रा 17 वर्षीया पूजा यादव ने इस बार इंटरमीडिएट परीक्षा में तीसरा स्थान  हासिल किया है. हालांकि खास बात यह है कि पूजा ने बायोलॉजी विषय के साथ यह स्थान हासिल किया है. आवास विकास कॉलोनी में रहने वाले हेड कांस्टेबल महेंद्र प्रताप यादव की बेटी पूजा कहती हैं, ''मेरे जीवन का लक्ष्य डॉक्टर बनना है और इसीलिए मैंने गणित छोड़कर बायोलॉजी को चुना. '' पूजा के साथ 96.8 नंबर पाकर मेरिट सूची के तीसरे पायदान पर चमक बिखेरने वाली 16 वर्षीया विजयश्री वाजपेयी भी अपनी हाइस्कूल की मेरिट लिस्ट से एक दर्जा नीचे खिसकी हैं.

बाराबंकी की इस सफलता की वजह क्या है? एम.एल.एम. इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य राम किशोर शुक्ल कहते हैं, ''हम पढ़ाई की गुणवत्ता से समझौता नहीं करते. छात्रों से हमेशा शिक्षकों के बारे में फीडबैक लिया जाता है. इससे कॉलेज में शिक्षा का स्तर काफी ऊंचा हुआ है, जो नतीजों में भी झलक रहा है. ''

बाराबंकी जैसे छोटे शहर की छात्राओं ने इंटरमीडिएट परीक्षा की मेरिट सूची में अपना दबदबा दिखाकर यह साबित कर दिया है कि अगर मौका मिले तो बेटियां बेटों से कहीं आगे निकल सकती हैं.
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