scorecardresearch

एमपी में रिश्वत के आरोप में सीबीआइ ने एक आयकर अधिकारी और उनके पति को दबोचा

मध्य प्रदेश में सीबीआइ ने एक महिला आयकर अधिकारी पूनम राय और उनके नेता पति को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है.

अपडेटेड 14 अप्रैल , 2014
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचारी अधिकारियों की फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ सकता है. सीबीआइ ने आयकर विभाग में डिप्टी कमिश्नर पूनम राय को 10 लाख रु. की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है. 2007 बैच की आइआरएस अधिकारी राय ने कथित तौर पर एक बिल्डर से आयकर रिटर्न में गड़बड़ी को ठीक करने के बदले रिश्वत मांगी थी. इस बिल्डर का आयकर निर्धारण का मामला राय के पास अटका हुआ था.

सीबीआइ की प्रवक्ता चंचल प्रसाद के मुताबिक, “भोपाल के आयकर विभाग में तैनात डिप्टी कमिश्नर पूनम राय को 28 मार्च की रात गिरफ्तार किया गया. भोपाल के रामायण बिल्डर्स के मालिक राजेश सिंह भदौरिया ने राय के खिलाफ सीबीआइ में शिकायत की थी. भदौरिया ने बताया था कि राय उनकी कंपनी पर आयकर निर्धारण में भारी जुर्माना लगाने की धमकी दे रही थीं और इसे कम करने की एवज में रिश्वत की मांग कर रही थीं.” राय के साथ उनके पति गणेश मालवीय को भी गिरफ्तार किया गया है, जो बीजेपी के स्थानीय नेता हैं.

भदौरिया के मुताबिक, राय ने कहा था कि उनकी कंपनी पर 40 से 50 लाख रु. का जुर्माना बनता है. जुर्माने की राशि इससे भी ज्यादा, लगभग दो करोड़ रु. तक हो सकती है और वे उन्हें जुर्माने से बचा सकती हैं बशर्ते उन्हें रिश्वत दी जाए. भदौरिया के मुताबिक, “राय ने रिश्वत की मांग अपने पति मालवीय के जरिए की थी. राय की ओर से पहले 25 लाख रु. की मांग की गई थी.” लेकिन सौदा 18 लाख रु. में तय हुआ था. रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर जब 10 लाख रु. दिए जा रहे थे तभी राय सीबीआइ के जाल में फंस गईं.

राय को रंगे हाथ पकडऩे के लिए सीबीआइ ने पूरा जाल बिछाया था. सीबीआइ के कहने पर भदौरिया कथित तौर पर रिश्वत के 10 लाख रु. मालवीय को देने को तैयार हो गए थे. मालवीय ने यह पैसा अपने चार्टर्ड एकाउंटेंट प्रीतम चोटरानी के दफ्तर में मंगवाया था. भदौरिया ने यह रकम चोटरानी के हवाले कर दी थी. इस रकम को जब चोटरानी और उनका भतीजा गिन ही रहे थे तभी सीबीआइ ने दबिश दे दी.

इसके बाद, सीबीआइ अधिकारी चोटरानी के यहां उनके कर्मचारी बनकर डट गए. मालवीय के एनजीओ मृत्युंजय का कर्मचारी संजय राउत जब इस रकम को लेने के लिए चोटरानी के दफ्तर में आया, तो चोटरानी के कर्मचारी बने सीबीआइ अधिकारी राउत के साथ मालवीय के पास, उनके  घर पहुंच गए. जैसे ही मालवीय ने पैसे लिए, सीबीआइ दल ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद राय को उनके दफ्तर से गिरफ्तार किया गया.
गिरफ्तार अधिकारी का पति
(पूनम के पति गणेश, बीचे में, के जरिए कथित तौर पर रिश्वत ली जा रही थी)
दिलचस्प तो यह है कि राय के खिलाफ शिकायत करने वाले भदौरिया भी प्रदेश बीजेपी के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के संयोजक हैं. राय के पकड़े जाने के बाद आयकर विभाग ने भदौरिया को नोटिस जारी कर जुर्माना भरने को कहा है. भदौरिया इसे बदले की कार्रवाई मानते हैं. वे आरोप लगाते हैं, “पूनम की गिरफ्तारी के बाद आयकर विभाग मेरे खिलाफ बदले की कार्रवाई से काम कर रहा है. विभाग ने अब 1.10 करोड़ रु. का नोटिस जारी किया है. यह गलत है.”

भदौरिया दावा करते हैं, “जिस दिन पूनम राय की गिरफ्तारी हुई उस दिन उनके पास इस तरह के 150 केस पेंडिंग थे, जबकि कायदे से इस तरह के मामलों की सुनवाई रोजाना होनी चाहिए. इससे राय की गलत मंशा साबित होती है.” भदौरिया के मुताबिक, पहले भी कई बिल्डर आयकर विभाग के आला अधिकारियों को राय के काम करने के तरीके की शिकायत कर चुके थे.

पूनम के पास शहर की रेंज 1.1 की जिम्मेदारी थी. इस रेंज में नया भोपाल इलाका आता है, जहां बड़े-बड़े बिल्डरों समेत नौकरशाह और मंत्री रहते हैं. राय पर भ्रष्टाचार के एक और महत्वपूर्ण मामले को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप है. यह मामला शिवराज सिंह चैहान सरकार से संबंधित है. प्रदेश के मंत्रियों की निजी आय का टैक्स प्रदेश सरकार ने जमा करवाया था. पिछले साल यह गड़बड़ी महालेखाकार की रिपोर्ट में पकड़ में आई थी. इस मामले की जांच की जिम्मेदारी राय के पास थी लेकिन उन्होंने जांच आगे नहीं बढ़ाई.

राय के घर सीबीआइ की कार्रवाई लगभग 24 घंटे तक चली. सीबीआइ सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान मालवीय ने कई कागजों को फ्लश करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे. ये सभी कागज सीबीआइ के हाथ लग गए हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन कागजों में अन्य बिल्डरों से जुड़े मामलों की जानकारी थी. बताया जाता है कि इनमें बिल्डरों के नाम और उनसे उगाही जाने वाली रकम की जानकारी दर्ज है.

भदौरिया की तरह मालवीय भी बीजेपी के नेता हैं, ऐसे में इस मामले के सामने आने के बाद राजनैतिक गलियारों में हलचल मच गई है. विपक्षी कांग्रेस के हाथ सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार को घेरने का सुनहरा मौका लग गया है. कांग्रेस का आरोप है कि रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए मालवीय के बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी समेत दूसरे नेताओं के साथ करीबी संबंध हैं. कांग्रेस ने मालवीय की तस्वीरें भी जारी की हैं, जिनमें वे मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ नजर आ रहे हैं.

प्रदेश में विपक्ष के नेता सत्यदेव कटारे प्रदेश बीजेपी के कामकाज को सवालों के घेरे में लेते हुए कहते हैं, “गणेश मालवीय अपनी पत्नी की सारी डील बीजेपी दफ्तर में ही बैठकर किया करता था. जिस डील के दौरान गिरफ्तारी की गई वह भी बीजेपी कार्यालय में ही बैठकर पूरी की गई थी.” उनका यह भी कहना है कि “गणेश पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा के पीए के रूप में काम कर चुका है, जबकि पूनम राय वर्मा के घर में बतौर पेंइग गेस्ट रहती थीं. इसी से साबित हो जाता है कि इस दंपती के बीजेपी के आला नेताओं के साथ करीबी ताल्लुकात रहे हैं.”

ताज्जुब की बात यह है कि मालवीय भी इस मामले को राजनैतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका आधार बिल्कुल अलग है. उन्होंने अपने आप को बेकसूर बताते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है. मालवीय बीजेपी में चुनाव सेल के संयोजक थे. मामला सामने आते ही पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया है. उधर आयकर विभाग ने राय को तत्काल निलंबित कर दिया है. हालांकि रिश्वतखोर दंपती को जमानत मिल चुकी है.

आयकर अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि प्रदेश बीजेपी ने मालवीय से स्पष्ट दूरी बना ली है. प्रदेश के मीडिया प्रभारी हितेश वाजपेयी कहते हैं, “मालवीय को पार्टी ने प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है. यह पूरी तरह से उनका निजी मामला था और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है.” पूछताछ में सीबीआइ को पता चला है कि अलग-अलग शहरों में इस दंपती के कुल 11 बैंक खाते हैं. इनमें से 4 खाते मालवीय के जबकि 7 खाते राय के नाम पर हैं. इनके घर से 2.50 लाख रु. नकद भी बरामद हुए हैं. अब सीबीआइ उनके लॉकरों का पता लगा रही है. उसे उनके घर से 1.88 करोड़ रु. और 40 लाख रु. के दो चेक भी मिले हैं. ये चेक मालवीय के पिता के नाम पर लिखकर रखे गए थे. सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में इन खातों से भारी लेन-देन हुई थी. अफसर-नेताओं के भ्रष्टाचार की इस कहानी में अभी और परतें खुलनी तय हैं.
Advertisement
Advertisement