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खंडवा में खूब फली विदेशी सब्जी

एक ओर जहां मौसम की मार से देसी सब्जियों की फसल चौपट हो गई, वही दूसरी ओर विदेशी बीजों से उगी सब्जियां इस सबसे बेअसर रहीं और खूब उगीं.

अपडेटेड 24 मार्च , 2014
बेमौसम बारिश और ओलों की मार से फसलें तबाह होने से निमाड़ के किसान जहां खून के आंसू रो रहे हैं वहीं मात्र दो एकड़ जमीन के मालिक किसान पन्नालाल मालाकार की आंखों में सपने अब भी पल रहे हैं. अपनी जमीन पर उन्होंने 350 से ज्यादा प्रजातियों की सब्जियां उगाई थीं. विदेशी बीज से पैदा हुई उनकी यह फसल विपरीत परिस्थितियों में भी भरपूर उपज दे रही है. गांव के एक अन्य किसान राधेश्याम कहते हैं, ''सब्जियों का यह प्रयोग चौंकाने वाला है. इससे प्रभावित होकर पारंपरिक फसलें लेने वाले किसान भी सब्जी उगाने वाले क्षेत्र में आने का मन बना रहे हैं. ''

खंडवा से सटे सिहाड़ा गांव के मालाकार किसानी छोडऩे का मन बना चुके थे क्योंकि मौसम की मार से फसलें पूरी चौपट हो जाती थीं. आर्थिक नुकसान तो उठाना ही पड़ता था, सारी मेहनत भी पानी में चली जाती थी. लेकिन उनके 36 वर्षीय पुत्र विकेश ने खेती छोडऩे की बजाए प्रयोग करने का मन बनाया. उन्होंने न्यूजीलैंड की एक कंपनी से सब्जियों के बीज लेकर खेती की. नतीजा सुखद रहा. उन्होंने टमाटर, मिर्च, पत्तागोभी, फूलगोभी, शिमला मिर्च, गाजर, मूली, ककड़ी, मटर, चुकंदर और तरबूज-खरबूज जैसी कई सब्जियों और फलों की 375 तरह की प्रजातियां खेत में उगाई.

पन्नालाल कहते हैं, ''इन पौधों पर जब सब्जियों आने लगीं तो पूरा खेत रंगबिरंगा हो गया. '' लाल, गुलाबी और पीले रंग के टमाटर 15 ग्राम से लेकर 680 ग्राम तक के थे. चॉकलेटी रंग की शिमला मिर्च और कई तरह के रंगों और स्वाद वाली गोभी स्थानीय लोगों को खूब भा रही है. इन विदेशी बीजों को निमाड़ की मिट्टी और आबोहवा खासी रास आई है. पन्नालाल के ट्रायल प्लॉॅट की सफलता से उत्साहित न्यूजीलैंड की यह कंपनी अब यहां सीड प्लांट स्थापित करने की योजना बना रही है.

दुनिया में चीन के बाद भारत सब्जियों का सबसे बड़ा बाजार है. यहां की सब्जियों की मांग लगातार बढ़ रही है. इस बात की तसदीक खंडवा के उद्यानिकी विभाग के अधिकारी जवाहरलाल जैन भी करते हैं. जैन बताते हैं, ''खंडवा में सब्जी की खेती का रकबा 37,000 हेक्टेयर है, जो सालाना 10 फीसदी की दर से बढ़ रहा है. ऐसे सफल प्रयोग किसानों को और प्रेरित करेंगे. '' खंडवा एग्रीकल्चर कॉलेज के डीन डॉ. प्रकाश शास्त्री कहते हैं, ''गेहूं-सोयाबीन की पारंपरिक फसलों की तुलना में सब्जी और फलों की खेती कहीं ज्यादा फायदेमंद है. ''  
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