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बेहतरीन शहर: खुशहाली की डगर पर वाराणसी

नई सड़कों के निर्माण से विदेशी सैलानियों के आकर्षण के सबसे बड़े केंद्र वाराणसी को मिल सकती है ट्रैफिक और भीड़भाड़ से निजात.

अपडेटेड 25 फ़रवरी , 2014
धर्मनगरी वाराणसी का जिक्र आते ही जेहन में शहर में रेंगते ट्रैफिक की तस्वीर सामने आ जाती है. यह संभव नहीं है कि गंगा किनारे बसी इस मोक्ष नगरी काशी का दर्शन करने आए लोग यहां की भीड़भाड़ और बेतरतीब ट्रैफिक से परेशान न हुए हों. लेकिन पिछले साल भर के दौरान अगर उत्तर प्रदेश के किसी शहर में सबसे ज्यादा बदलाव और आधुनिकीकरण दिखाई दे रहा है तो वह वाराणसी ही है. 

किसी भी रास्ते से वाराणसी में घुसते ही चौड़ी-चौड़ी सड़कें स्वागत करती हैं. शहर के सभी व्यस्त संकरे मार्गों से अतिक्रमण हटाकर न सिर्फ इन्हें चौड़ा किया गया है, बल्कि ट्रैफिक को अनुशासित करने के लिए 15 किलोमीटर से भी अधिक लंबे डिवाइडर बनाए गए हैं. भेलूपुर जैसे शहर के आधा दर्जन चौराहों के सौंदर्यीकरण ने अगर इस शहर को नई रंगत दे दी है तो आने वाले दिनों में यहां शुरू होने वाले नए प्रोजेक्ट इस धर्मनगरी को नई पहचान देंगे.

इन्फ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ, एजुकेशन के क्षेत्र में वाराणसी काफी तरक्की कर रहा है. वाराणसी के पूर्व में बीएचयू चौराहे से गंगा नदी की ओर जाने वाली सड़क सामनेघाट रोड पर उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा ट्रॉमा सेंटर बन रहा था. यह भवन अब बनकर तैयार हो चुका है, जो अगले कुछ महीनों में यहां के लोगों के लिए इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाओं के मायने ही बदल देगा.

रियल एस्टेट कंसल्टेंट विनोद सक्सेना कहते हैं, ‘‘ट्रॉमा सेंटर के निर्माण के साथ ही इस पूरे इलाके में तेजी से विकास शुरू हुआ है, जो अब हाइराइज बिल्डिंग और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के रूप में सामने आया है.’’ यहां की नगवा रोड पर आधा दर्जन से अधिक मल्टीस्टोरी रिहाइशी बिल्डिंग बनकर तैयार हो रही हैं.

लखनऊ रोड पर हरहुआ, इलाहाबाद-बनारस हाइवे पर चितईपुर, लालपुर, पहाडिय़ा और शिवपुर इलाके भी आवासीय और कॉमर्शियल गतिविधियों के केंद्र के रूप में उभर रहे हैं. सीमावर्ती इलाकों से शुरू हुआ बदलाव अब काफी भीतर तक पहुंच गया है. तीर्थ पुरोहित भाऊ आचार्य तोड़पे बताते हैं कि शिक्षा और धार्मिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र होने की वजह से वाराणसी में पूर्वांचल और बिहार से लोग नौकरी और शिक्षा के लिए आते हैं.

यह तादाद लगातार बढ़ रही है. आबादी के बढ़ते दबाव को देखते हुए उसकी जरूरतों के हिसाब से इन्फ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट का विकास जरूरी हो गया है. आचार्य तोड़पे कहते हैं, ‘‘यही वजह है कि यहां पुरानी इमारतों को तोड़कर उनकी जगह तेजी से नई इमारतें बन रही हैं.’’

शहर के सबसे व्यस्त इलाके चौक के बांस फाटक इलाके में पुरानी इमारतों के बीच नया शॉपिंग मॉल बनकर तैयार है. शहर में जमीन की कमी और कानूनी पचड़ों के विकास में आड़े आने की वजह से अवैध गतिविधियों से निबटने के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण ने भी अपने नियम ढीले किए हैं.

शहर के लिए बनाए गए नए मास्टर प्लान में ‘‘मिक्स्ड लैंड यूज’’ की तरकीब निकाली गई है. इसके लागू होने के बाद शहर को पड़ोसी जिलों से जोडऩे वाली प्रमुख सड़कों के बाहरी ओर दोनों तरफ 200 मीटर तक ‘‘कॉमर्शियल और रेजिडेंशियल’’ निर्माण एक साथ हो सकेगा.

जाहिर है कि विकास के साथ सबसे बड़ी चुनौती ट्रैफिक को सुगम रखने की होगी. प्रशासन को इसका आभास है और आने वाली चुनौती से निबटने के लिए शहर में मोनोरेल चलाने की योजना सरकार की मंजूरी के लिए भेजी गई है. 

शहर एक नजर
ताकतः सघन जनसंख्या, पर्यटन और शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र. पूर्वांचल के जिलों में सबसे विकसित. नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों की अच्छी तादाद.
कमजोरीः वाराणसी विकास प्राधिकरण के पास विकास के लिए जमीन न होना, पूर्वी ओर से गंगा नदी से घिरा, बिजली, पानी और सुरक्षा की समस्या.
संभावनाएं: पड़ोसी जिलों से जोडऩे वाली सड़कों को चौड़ा करने से कई तरह की गतिविधियों के नए केंद्रों का विकास.
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