उत्तर प्रदेश की उद्योग नगरी कानपुर अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर तब दिखाई पड़ी, जब पिछले साल 27 नवंबर को यहां के ग्रीन पार्क स्टेडियम में भारत और वेस्ट इंडीज के बीच तीसरा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेला गया. मैच के पहले स्टेडियम के आसपास के इलाके को साफ-सुथरा करने की कवायद से ही पूरा शहर निखर उठा.
उत्तर प्रदेश के बेहद प्रदूषित शहर के रूप में कुख्यात कानपुर की रंगत बदलने की नगर निगम की मंशा ने अब आकार लेना शुरू कर दिया है. सूबे में कानपुर पहला ऐसा शहर बन गया है, जो वॉल राइटिंग से पूरी तरह मुक्त है. चुनावी मौसम में भी राजनैतिक पार्टियों के नारे अब कानपुर शहर की इमारतों पर नहीं दिखाई देते.
इतना ही नहीं शहर में एल्गिन मिल, वीआइपी रोड, आजाद पार्क, टेस्को गेट, नाना राव गेट, जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय जैसी जगहों से होकर निकलने पर आपको ऐसा महसूस होगा कि मानो किसी आर्ट गैलरी से गुजर रहे हों. यहां दीवारों पर शहर के स्कूल और कॉलेज के स्टुडेंट्स ने रंग-बिरंगे चित्र उकेरकर शहर को सुंदर बनाने में अपना योगदान दिया है.
जनता से मिल रहे समर्थन से कानपुर नगर निगम ने भी एक कदम आगे बढ़ते हुए कुल 37 अफसरों पर शहर को हर हाल में साफ-सुथरा रखने का जिम्मा सौंप दिया है. डीएवी कॉलेज में भौतिकशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनोज मिश्र कहते हैं, ‘‘उद्योग नगरी के रूप में प्रसिद्घ कानपुर में अब युवाओं की तादाद बढ़ रही है.’’
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी), नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट, कृषि विश्वविद्यालय समेत 30 से ज्यादा इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों ने दूसरे इलाकों के छात्रों को अपनी ओर खींचा है तो कोचिंग व्यवसाय ने कानपुर को नई पहचान भी दी है.
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुनील वैश्य कहते हैं, ‘‘कभी बड़ी-बड़ी मिलों के कारण पहचाने जाने वाले कानपुर शहर की पहचान अब छोटे उद्योग बनते जा रहे हैं.’’ दादानगर, फजलगंज, सरेसबाग, रूमा, कालपी रोड, जाजमऊ, चौबेपुर मंधना, पनकी, भौती में लेदर, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग, डिटरजेंट, हौजरी, गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, पैकेजिंग, आयरन, स्टील बर्तन, बिस्कुट, मसाले, पान मसाला और वनस्पति से जुड़े लघु उद्योग तेजी से उभर रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.
मॉल और शोरूम मेट्रो संस्कृति की झलक दिखा रहे हैं. कल्याणपुर, गुमटी, नवीन मार्केट, गोविंद नगर, शास्त्रीनगर, स्वरूप नगर, लाल बंगला, ग्वालटोली जैसे कई इलाकों में बन रहे बाजार लगातार जरूरत के हिसाब से खुद को ढाल रहे हैं.
रियल एस्टेट कंसल्टेंट बाल किशन शारदा कहते हैं, ‘‘नौकरीपेशा लोगों का ठिकाना बनने की वजह से कानपुर में फ्लैट्स संस्कृति बढ़ी है. पार्वती बागला रोड, स्वरूप नगर, तिलक नगर, विष्णुपुरी, गोविंद नगर जैसे इलाके रियल एस्टेट कल्चर को अपनाकर विकास के नए आयाम गढ़ रहे हैं.’’
लगातार बढ़ रही आबादी की रिहाइशी जरूरतों को पूरा करने के लिए कानपुर विकास प्राधिकरण कानपुर से बिठूर मार्ग, वॉटर पार्क, मैनावती मार्ग और जाजमऊ में मल्टी स्टोरी भवनों का निर्माण शुरू करने जा रहा है.
कानपुर की सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक जाम की है. इससे निबटने के लिए शहर के दक्षिण में दादानगर रेलवे क्रॉसिंग पर 700 मीटर लंबा ओवर ब्रिज बनाया गया है. इसके अलावा गंगा बैराज से बिठूर को जोडऩे वाले मैनावती मार्ग को भी फोरलेन किया जा रहा है. कानपुर से लखनऊ की राह आसान बनाने के लिए शहर के बीचोबीच बन रहे रामादेवी-जाजमऊ ओवरब्रिज को इसी वर्ष सितंबर में पूरा करने की योजना है.
जाम से निबटने के लिए विकासनगर में आधुनिक बस अड्डा बनाने को हरी झ्ंडी दिखाई गई है क्योंकि शहर का पुराना झकरकटी बस अड्डा रोज आने वाली 1,200 बसों का बोझ नहीं सह पा रहा. कानपुर को नई पहचान देने की सरकारी मंशा भी काबिले तारीफ है, लेकिन अभी शहर को लंबा रास्ता तय करना है.
शहर एक नजर
ताकतः मजदूरों और औद्योगिक कारीगरों की उपलब्धता, इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई से जुड़े बेहतरीन शिक्षा संस्थान, कोचिंग व्यवसाय का प्रमुख केंद्र.
कमजोरीः आधारभूत ढांचा बहुत कमजोर और नाकाफी है. सड़कें खस्ताहाल, बिजली की बदहाल आपूर्ति, कूड़ा निस्तारण और सीवर शहर की प्रमुख समस्या.
संभावनाएं: लखनऊ और दिल्ली जैसे बाजारों तथा प्रशासनिक केंद्रों से सीधा संपर्क. गंगा पार इलाके में रियल एस्टेट के नए विस्तार के लिए काफी मात्रा में सस्ती जमीन उपलब्ध.
उत्तर प्रदेश के बेहद प्रदूषित शहर के रूप में कुख्यात कानपुर की रंगत बदलने की नगर निगम की मंशा ने अब आकार लेना शुरू कर दिया है. सूबे में कानपुर पहला ऐसा शहर बन गया है, जो वॉल राइटिंग से पूरी तरह मुक्त है. चुनावी मौसम में भी राजनैतिक पार्टियों के नारे अब कानपुर शहर की इमारतों पर नहीं दिखाई देते.
इतना ही नहीं शहर में एल्गिन मिल, वीआइपी रोड, आजाद पार्क, टेस्को गेट, नाना राव गेट, जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय जैसी जगहों से होकर निकलने पर आपको ऐसा महसूस होगा कि मानो किसी आर्ट गैलरी से गुजर रहे हों. यहां दीवारों पर शहर के स्कूल और कॉलेज के स्टुडेंट्स ने रंग-बिरंगे चित्र उकेरकर शहर को सुंदर बनाने में अपना योगदान दिया है.
जनता से मिल रहे समर्थन से कानपुर नगर निगम ने भी एक कदम आगे बढ़ते हुए कुल 37 अफसरों पर शहर को हर हाल में साफ-सुथरा रखने का जिम्मा सौंप दिया है. डीएवी कॉलेज में भौतिकशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनोज मिश्र कहते हैं, ‘‘उद्योग नगरी के रूप में प्रसिद्घ कानपुर में अब युवाओं की तादाद बढ़ रही है.’’
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी), नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट, कृषि विश्वविद्यालय समेत 30 से ज्यादा इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों ने दूसरे इलाकों के छात्रों को अपनी ओर खींचा है तो कोचिंग व्यवसाय ने कानपुर को नई पहचान भी दी है.
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुनील वैश्य कहते हैं, ‘‘कभी बड़ी-बड़ी मिलों के कारण पहचाने जाने वाले कानपुर शहर की पहचान अब छोटे उद्योग बनते जा रहे हैं.’’ दादानगर, फजलगंज, सरेसबाग, रूमा, कालपी रोड, जाजमऊ, चौबेपुर मंधना, पनकी, भौती में लेदर, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग, डिटरजेंट, हौजरी, गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, पैकेजिंग, आयरन, स्टील बर्तन, बिस्कुट, मसाले, पान मसाला और वनस्पति से जुड़े लघु उद्योग तेजी से उभर रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.
मॉल और शोरूम मेट्रो संस्कृति की झलक दिखा रहे हैं. कल्याणपुर, गुमटी, नवीन मार्केट, गोविंद नगर, शास्त्रीनगर, स्वरूप नगर, लाल बंगला, ग्वालटोली जैसे कई इलाकों में बन रहे बाजार लगातार जरूरत के हिसाब से खुद को ढाल रहे हैं.
रियल एस्टेट कंसल्टेंट बाल किशन शारदा कहते हैं, ‘‘नौकरीपेशा लोगों का ठिकाना बनने की वजह से कानपुर में फ्लैट्स संस्कृति बढ़ी है. पार्वती बागला रोड, स्वरूप नगर, तिलक नगर, विष्णुपुरी, गोविंद नगर जैसे इलाके रियल एस्टेट कल्चर को अपनाकर विकास के नए आयाम गढ़ रहे हैं.’’
लगातार बढ़ रही आबादी की रिहाइशी जरूरतों को पूरा करने के लिए कानपुर विकास प्राधिकरण कानपुर से बिठूर मार्ग, वॉटर पार्क, मैनावती मार्ग और जाजमऊ में मल्टी स्टोरी भवनों का निर्माण शुरू करने जा रहा है.
कानपुर की सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक जाम की है. इससे निबटने के लिए शहर के दक्षिण में दादानगर रेलवे क्रॉसिंग पर 700 मीटर लंबा ओवर ब्रिज बनाया गया है. इसके अलावा गंगा बैराज से बिठूर को जोडऩे वाले मैनावती मार्ग को भी फोरलेन किया जा रहा है. कानपुर से लखनऊ की राह आसान बनाने के लिए शहर के बीचोबीच बन रहे रामादेवी-जाजमऊ ओवरब्रिज को इसी वर्ष सितंबर में पूरा करने की योजना है.
जाम से निबटने के लिए विकासनगर में आधुनिक बस अड्डा बनाने को हरी झ्ंडी दिखाई गई है क्योंकि शहर का पुराना झकरकटी बस अड्डा रोज आने वाली 1,200 बसों का बोझ नहीं सह पा रहा. कानपुर को नई पहचान देने की सरकारी मंशा भी काबिले तारीफ है, लेकिन अभी शहर को लंबा रास्ता तय करना है.
शहर एक नजर
ताकतः मजदूरों और औद्योगिक कारीगरों की उपलब्धता, इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई से जुड़े बेहतरीन शिक्षा संस्थान, कोचिंग व्यवसाय का प्रमुख केंद्र.
कमजोरीः आधारभूत ढांचा बहुत कमजोर और नाकाफी है. सड़कें खस्ताहाल, बिजली की बदहाल आपूर्ति, कूड़ा निस्तारण और सीवर शहर की प्रमुख समस्या.
संभावनाएं: लखनऊ और दिल्ली जैसे बाजारों तथा प्रशासनिक केंद्रों से सीधा संपर्क. गंगा पार इलाके में रियल एस्टेट के नए विस्तार के लिए काफी मात्रा में सस्ती जमीन उपलब्ध.

