सच पूछिए तो टर्मिनल 2 की कहानी लगभग 400 फुट की दूरी पर स्थित मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड कॉलोनी के गोदाम से शुरू होती है. दो बड़े-बड़े गोदामों में पारंपरिक भारतीय कला का खजाना जमा किया गया है.
फर्श पर उमाजी तत्यबजी संगमनेरकर की 1934 में लकड़ी पर पेंट की गई 20-20 फुट के आकार की कृति ‘‘मराठी तीर्थस्थल’’ किसी जिग्सॉ पहेली की तरह जोड़ कर रखी गई है. यह कृति अहमदाबाद में एक दुकान पर मिली थी. यहां पुरानी हवेलियों से सुरक्षित निकालकर लाए गए दरवाजे, फारसी चित्राकृतियों वाली खिड़कियां, खूबसूरत कलात्मक ग्रिलें, संगमरमर से बने संदूक, चंदन की लकड़ी और पुर्तगाली पोर्च ऑर्नामेंट्स रखे हुए हैं.
तमिलनाडु से लाए गए मंदिर के आयोजनों में जुतने वाले दो रथ भी हैं. इन्हें वहीं पर सजाए गए जहाज के उन अगले हिस्सों की बगल में रखा गया है, जिन पर कोचीन और नागा चिन्ह बने हुए हैं. यह विविधवर्णी संग्रह असल में क्यूरेटर राजीव सेठी और संजय रेड्डी की कड़ी मेहनत का नतीजा है.
एयरपोर्ट बनाने वाली कंपनी जीवीके के वाइस-चेयरमैन रेड्डी और सेठी ने चार साल तक देश भर में घूम-घूमकर इन कलाकृतियों को जुटाया है. पारंपरिक भारतीय कला को सामने रखने का विचार रेड्डी का था. दूसरी ओर सेठी इस राय के थे कि पारंपरिक और समकालीन कला के बीच की सीमाएं यहां मिटती दिखनी चाहिए.
43 लाख वर्ग फुट क्षेत्रफल में फैले और 5,500 करोड़ रु. की लागत से बने इस टी2 हवाई अड्डे के दरवाजे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए 12 फरवरी को खुलेंगे. एक मोटे अनुमान के मुताबिक, 2014 में 3.20 करोड़ यात्री इसकी सेवाएं लेंगे. फिलहाल इसके सिर्फ पश्चिमी विंग का ही उद्घाटन हुआ है.
टर्मिनल में सामने केबल के सहारे तैयार की गई 15 मीटर ऊंची शीशे की दीवार है. इस तरह की यह दुनिया में सबसे ऊंची दीवार है. यह आपको चेक-इन हॉल तक ले जाती है, जहां पर यही कोई 188 काउंटर हैं. 11 एकड़ के छत वाले हिस्से में लगी मोर पंखों के आकार वाली सिग्नेचर स्काइ लाइट्स से छनकर रंगीन रोशनियों के छायाबिंदु झिलमिलाते हैं.

(क्यूरेटर राजीव सेठी)
पूरे हॉल में मशरूम के आकार के खंभे हैं, जिनमें से कुछ के आसपास फव्वारे/जलाशय हैं तो कुछ के इर्द-गिर्द बैठने की व्यवस्था की गई है. आगमन आप्रवासन (अराइवल इमीग्रेशन) वाला इलाका 30 फुट के लहराते सुनहरे परदे से घिरा है, जिस पर लगे रोशनी के कण आपके वहां से गुजरते समय जगमगाते रहते हैं.
तीन किलोमीटर लंबी यह आर्ट वाल दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी कला परियोजना है. इसमें 7,000 से ज्यादा चित्राकृतियां हैं, जिसमें से फिलहाल 2,000 प्रदर्शित की गई हैं. दीवार पर लगे स्थिर-से चित्रों से इतर ‘‘जय हो’’ नाम की एक कृति कई किस्म के टेक्सचर में उभरकर बाहर निकलती रहती है.
आते-जाते यात्रियों से सीधा वास्ता बनाने के लिए इसमें कई इंटरऐक्टिव पहलुओं का भी समावेश किया गया है. सेठी को तो रेड्डी ने पारंपरिक कला को इस कदर प्रमुखता देने की हिदायत दे रखी थी कि उसे देखने के चक्कर में यात्रियों की उड़ान छूट जाए. प्रसन्न भाव से सेठी बस उसी को क्रियान्वित करने में तन-मन से जुट गए.
टर्मिनल हालांकि चार हिस्सों में बंटा है-अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान, घरेलू प्रस्थान, आगमन और बस बोर्डिंग के गेट. लेकिन कलाकृतियां शीशे की एक फांक के सहारे दीवार की पूरी लंबाई पर प्रदर्शित हैं. सेठी इंडिया टुडे को बताते हैं, ‘‘यह पुराना है और यह नया, यह कला है और यह शिल्प, यह ग्रामीण है और यह शहरी, इस तरह के भेद मुझे कतई नापसंद हैं.’’
इसलिए आपको यहां गुलाम मोहम्मद शेख, जगन्नाथ पांडा, बैजू परथन और मिठू सेन, वार्ली और गोंड कलाकार, मोरेश्वर पाटील, अनिल नायर की कृतियां देखने को मिलेंगी, साथ ही शेखर कपूर की आने वाली फिल्म पानी पर आधारित एक इंटरऐक्टिव फाउंटेन भी यहां मौजूद है.
आलीशान टी2 हवाई अड्डा एक बेखबर यात्री को भारत के असीम विस्तार का संक्षेप में मजा देगा ही, इसके अलावा उसके सामने भारतीय कला को परिभाषित और वर्गीकृत करने की चुनौती भी पेश करेगा. यह शायद उन यात्रियों की क्षमता में एक नए स्तर की बढ़ोतरी भी कर सके, जिन्हें फिलहाल धुंधली पुरानी इमारत में ठंडे मुंबइया इस्तकबाल से रू-ब-रू होना पड़ता है.
वहां के खूबसूरत नजारे:

एयरपोर्ट पर लगाए गए बिजली के उपकरण चेकोस्लोवाकिया में खास तौर पर बनवाए गए हैं. ये एक फूल खिलने की तीन अवस्थाओं को दिखाते हैं.

भारत के मंदिरों से प्रेरित द्वारपालकों को मराठी थिएटर वाली खास मंचीय पृष्ठभूमि के साथ पेश किया गया है. यह अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान वाले गलियारे में है.

चेक-इन हॉल का एक नजारा, जहां कुल 188 काउंटर हैं

अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान गलियारे से दिखते द्वारपालक. कलाकृतियों का अटूट सिलसिला घरेलू प्रस्थान वाले गलियारे तक चलता जाता है.

केरल के इस घर की बैठक जैसी शिल्पाकृतियां एलिवेटर क्षेत्र की शोभा बढ़ा रही हैं.

एराइवल इमिग्रेशन हॉल स्थित 'दीया करटेन' में हजारों दीये जगमगाते नजर आ रहे हैं.

'ह्वेयर इज द पार्टी टुनाइट' के एक ब्योरे में गोवा के आर्टिस्ट अलेक्सिस करसे ने दुनिया भर के यात्रियों को मुंबई पहुंचते दिखाया है.
फर्श पर उमाजी तत्यबजी संगमनेरकर की 1934 में लकड़ी पर पेंट की गई 20-20 फुट के आकार की कृति ‘‘मराठी तीर्थस्थल’’ किसी जिग्सॉ पहेली की तरह जोड़ कर रखी गई है. यह कृति अहमदाबाद में एक दुकान पर मिली थी. यहां पुरानी हवेलियों से सुरक्षित निकालकर लाए गए दरवाजे, फारसी चित्राकृतियों वाली खिड़कियां, खूबसूरत कलात्मक ग्रिलें, संगमरमर से बने संदूक, चंदन की लकड़ी और पुर्तगाली पोर्च ऑर्नामेंट्स रखे हुए हैं.
तमिलनाडु से लाए गए मंदिर के आयोजनों में जुतने वाले दो रथ भी हैं. इन्हें वहीं पर सजाए गए जहाज के उन अगले हिस्सों की बगल में रखा गया है, जिन पर कोचीन और नागा चिन्ह बने हुए हैं. यह विविधवर्णी संग्रह असल में क्यूरेटर राजीव सेठी और संजय रेड्डी की कड़ी मेहनत का नतीजा है.
एयरपोर्ट बनाने वाली कंपनी जीवीके के वाइस-चेयरमैन रेड्डी और सेठी ने चार साल तक देश भर में घूम-घूमकर इन कलाकृतियों को जुटाया है. पारंपरिक भारतीय कला को सामने रखने का विचार रेड्डी का था. दूसरी ओर सेठी इस राय के थे कि पारंपरिक और समकालीन कला के बीच की सीमाएं यहां मिटती दिखनी चाहिए.
43 लाख वर्ग फुट क्षेत्रफल में फैले और 5,500 करोड़ रु. की लागत से बने इस टी2 हवाई अड्डे के दरवाजे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए 12 फरवरी को खुलेंगे. एक मोटे अनुमान के मुताबिक, 2014 में 3.20 करोड़ यात्री इसकी सेवाएं लेंगे. फिलहाल इसके सिर्फ पश्चिमी विंग का ही उद्घाटन हुआ है.
टर्मिनल में सामने केबल के सहारे तैयार की गई 15 मीटर ऊंची शीशे की दीवार है. इस तरह की यह दुनिया में सबसे ऊंची दीवार है. यह आपको चेक-इन हॉल तक ले जाती है, जहां पर यही कोई 188 काउंटर हैं. 11 एकड़ के छत वाले हिस्से में लगी मोर पंखों के आकार वाली सिग्नेचर स्काइ लाइट्स से छनकर रंगीन रोशनियों के छायाबिंदु झिलमिलाते हैं.

(क्यूरेटर राजीव सेठी)
पूरे हॉल में मशरूम के आकार के खंभे हैं, जिनमें से कुछ के आसपास फव्वारे/जलाशय हैं तो कुछ के इर्द-गिर्द बैठने की व्यवस्था की गई है. आगमन आप्रवासन (अराइवल इमीग्रेशन) वाला इलाका 30 फुट के लहराते सुनहरे परदे से घिरा है, जिस पर लगे रोशनी के कण आपके वहां से गुजरते समय जगमगाते रहते हैं.
तीन किलोमीटर लंबी यह आर्ट वाल दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी कला परियोजना है. इसमें 7,000 से ज्यादा चित्राकृतियां हैं, जिसमें से फिलहाल 2,000 प्रदर्शित की गई हैं. दीवार पर लगे स्थिर-से चित्रों से इतर ‘‘जय हो’’ नाम की एक कृति कई किस्म के टेक्सचर में उभरकर बाहर निकलती रहती है.
आते-जाते यात्रियों से सीधा वास्ता बनाने के लिए इसमें कई इंटरऐक्टिव पहलुओं का भी समावेश किया गया है. सेठी को तो रेड्डी ने पारंपरिक कला को इस कदर प्रमुखता देने की हिदायत दे रखी थी कि उसे देखने के चक्कर में यात्रियों की उड़ान छूट जाए. प्रसन्न भाव से सेठी बस उसी को क्रियान्वित करने में तन-मन से जुट गए.
टर्मिनल हालांकि चार हिस्सों में बंटा है-अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान, घरेलू प्रस्थान, आगमन और बस बोर्डिंग के गेट. लेकिन कलाकृतियां शीशे की एक फांक के सहारे दीवार की पूरी लंबाई पर प्रदर्शित हैं. सेठी इंडिया टुडे को बताते हैं, ‘‘यह पुराना है और यह नया, यह कला है और यह शिल्प, यह ग्रामीण है और यह शहरी, इस तरह के भेद मुझे कतई नापसंद हैं.’’
इसलिए आपको यहां गुलाम मोहम्मद शेख, जगन्नाथ पांडा, बैजू परथन और मिठू सेन, वार्ली और गोंड कलाकार, मोरेश्वर पाटील, अनिल नायर की कृतियां देखने को मिलेंगी, साथ ही शेखर कपूर की आने वाली फिल्म पानी पर आधारित एक इंटरऐक्टिव फाउंटेन भी यहां मौजूद है.
आलीशान टी2 हवाई अड्डा एक बेखबर यात्री को भारत के असीम विस्तार का संक्षेप में मजा देगा ही, इसके अलावा उसके सामने भारतीय कला को परिभाषित और वर्गीकृत करने की चुनौती भी पेश करेगा. यह शायद उन यात्रियों की क्षमता में एक नए स्तर की बढ़ोतरी भी कर सके, जिन्हें फिलहाल धुंधली पुरानी इमारत में ठंडे मुंबइया इस्तकबाल से रू-ब-रू होना पड़ता है.
वहां के खूबसूरत नजारे:

एयरपोर्ट पर लगाए गए बिजली के उपकरण चेकोस्लोवाकिया में खास तौर पर बनवाए गए हैं. ये एक फूल खिलने की तीन अवस्थाओं को दिखाते हैं.

भारत के मंदिरों से प्रेरित द्वारपालकों को मराठी थिएटर वाली खास मंचीय पृष्ठभूमि के साथ पेश किया गया है. यह अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान वाले गलियारे में है.

चेक-इन हॉल का एक नजारा, जहां कुल 188 काउंटर हैं

अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान गलियारे से दिखते द्वारपालक. कलाकृतियों का अटूट सिलसिला घरेलू प्रस्थान वाले गलियारे तक चलता जाता है.

केरल के इस घर की बैठक जैसी शिल्पाकृतियां एलिवेटर क्षेत्र की शोभा बढ़ा रही हैं.

एराइवल इमिग्रेशन हॉल स्थित 'दीया करटेन' में हजारों दीये जगमगाते नजर आ रहे हैं.

'ह्वेयर इज द पार्टी टुनाइट' के एक ब्योरे में गोवा के आर्टिस्ट अलेक्सिस करसे ने दुनिया भर के यात्रियों को मुंबई पहुंचते दिखाया है.

