अगर आप लखनऊ के रास्ते वाराणसी की ओर आ रहे हैं तो बाबतपुर एयरपोर्ट को पार करते ही हरहुआ इलाके में अचानक सड़क के दोनों ओर 3-4 मंजिला अपार्टमेंट्स खड़े होते दिख जाएंगे. ईंट, सरिया लदे ट्रक और गारा मशीनों की घड़घड़ाहट इस ओर साफ इशारा कर देती है कि वाराणसी रेलवे स्टेशन और बाबतपुर एयरपोर्ट के ठीक बीचोंबीच मौजूद यह इलाका मध्यवर्गीय लोगों की रिहाइश का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरने जा रहा है.
पिछले लगभग पांच साल में शहर के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में तेजी से बदलाव आया है. पूर्वांचल का सबसे बड़ा जिला और धार्मिक स्थल होने के नाते यहां की कॉमर्शियल गतिविधियों ने तेजी पकड़ी है. बैंक, मोबाइल, रेस्तरां, होटल और सेवा क्षेत्र में निजी कंपनियों ने शहर के सभी इलाकों में अपनी आमद दर्ज कराई है. विनायक निर्माण प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन गणेश गुप्ता बताते हैं कि कॉमर्शियल क्षेत्र में निजी कंपनियों ने न सिर्फ वाराणसी बल्कि यूपी के पूर्वांचल के जिलों, यहां तक कि बिहार की राजधानी पटना में रहने वाले युवाओं को बड़ी तादाद में नौकरियां दी हैं. गुप्ता बताते हैं, ''इन निजी कंपनियों में काम करने वाले 15,000—20,000 लोग ऐसे हैं, जिनकी आमदनी 20,000—30,000 रु. के बीच है. ये किराए के मकान में रह रहे हैं. 20-30 लाख रु. के फ्लैट खरीदने में सह्नम इसी तबके को ध्यान में रखकर अब वाराणसी में किफायती फ्लैट्स बनाने की होड़ शुरू हुई है.”
पूर्वी सिरे पर गंगा से घिरे इस शहर की बड़ी समस्या जमीन की उपलब्धता है. रियल एस्टेट कंपनी रुद्रा समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण अग्रवाल बताते हैं कि शहर में 5,000 से 15,000 रु. प्रति वर्गफुट दर पर भी थोड़ी-सी जमीन उपलब्ध है. आप इतनी महंगी जमीन पर अपार्टमेंट बनाने पर फ्लैट की कीमत का अंदाज लगा सकते हैं. अग्रवाल बताते हैं, ''वाराणसी के पुराने इलाकों में रहने वाले ज्यादातर कारोबारी हैं. ये शहर से बाहर नहीं रहना चाहते. इनमें से ज्यादातर लोग या तो अपने पुराने मकानों को तुड़वाकर नए तरीके से बनवा रहे हैं या फिर शहर में बने महंगे अपार्टमेंट में रहना पसंद कर रहे हैं. जो लोग दूसरे शहरों से वाराणसी में नौकरी करने आए हैं वे भीड़भाड़ से दूर ऐसे मकान तलाश रहे हैं जो उनकी पहुंच में हों.”
यही वे वजहें हैं, जिन्होंने वाराणसी शहर से 10 किलोमीटर के दायरे में लखनऊ रोड पर हरहुआ, इलाहाबाद-बनारस हाइवे पर चितईपुर, लालपुर, पहाडिय़ा और शिवपुर इलाके को किफायती मकानों के बाजार के बड़े केंद्र के रूप में पहचान दी है. किफायती फ्लैट्स मुहैया कराने के लिए रुद्रा समूह ने पहाडिय़ा में रुद्रा हाइट्स, शिवपुर में रुद्रा संपदा और रुद्रा हेरिटेज प्रोजेक्ट लांच किए हैं तो हरहुआ इलाके में 'विनायक निर्माण प्राइवेट लिमिटेड’ का विनायक रामेश्वरम अपार्टमेंट भी खास तौर पर वाराणसी में तेजी से उभर रहे मध्यवर्गीय नौकरी-पेशा वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा है.
इस मामले में वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) भी पीछे नहीं है. उसने लालपुर इलाके में किफायती फ्लैट की अपनी योजना 'लैंडमार्क अपार्टमेंट’ पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. इस सात मंजिला अपार्टमेंट में तीन बेड रूम और दो बेड रूम वाले कुल 272 फ्लैट्स बनेंगे, जिनमें से 40 फीसदी बनकर तैयार हो चुके हैं. इन फ्लैट की कीमत 30 से 40 लाख के बीच है. इसी अपार्टमेंट में एक तीन कमरे का फ्लैट लेने वाले देवाशीष सिन्हा ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर हैं. मूल रूप से बलिया के सिन्हा बताते हैं, ''मैं लंका इलाके में किराए के मकान में दूसरी मंजिल पर रहता हूं. बुजुर्ग होने की वजह से मां-बाप साथ में नहीं रहते क्योंकि उन्हें सीढिय़ां चढऩे में कठिनाई होती है. लैंड मार्क अपार्टमेंट में लिफ्ट होने से मैं उन्हें साथ रख सकूंगा.”
कई निजी बैंक भी आसान शर्तों पर लोन मुहैया करा रहे हैं. वाराणसी के मलदहिया चौराहे पर एक निजी बैंक में असिस्टेंट मैनेजर विवेक चौरसिया बताते हैं, ''फ्लैट खरीदने के लिए बैंक से कर्ज लेने पर इसकी किस्त तुरंत शुरू न करके कब्जे के वक्त शुरू की जा रही है.” रियल एस्टेट कंसल्टेंट अभिनव पांडेय बताते हैं कि सबसे ज्यादा मांग दो बेडरूम वाले फ्लैट्स की है क्योंकि यह करीब 25 लाख रु. तक में उपलब्ध हैं. इसीलिए सभी इलाकों में बनने वाले कुल फ्लैट्स में 60 फीसदी हिस्सा दो बेड रूम वाले फ्लैट्स का है. टूटी सड़कों और रेंगते ट्रैफिक वाला घाटों, मंदिरों का यह शहर जिस तरह से रिहाइश के नए रंग में ढल रहा है, उसने कई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं. इससे निजात को अभी से ठोस प्रयास करने होंगे.
पिछले लगभग पांच साल में शहर के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में तेजी से बदलाव आया है. पूर्वांचल का सबसे बड़ा जिला और धार्मिक स्थल होने के नाते यहां की कॉमर्शियल गतिविधियों ने तेजी पकड़ी है. बैंक, मोबाइल, रेस्तरां, होटल और सेवा क्षेत्र में निजी कंपनियों ने शहर के सभी इलाकों में अपनी आमद दर्ज कराई है. विनायक निर्माण प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन गणेश गुप्ता बताते हैं कि कॉमर्शियल क्षेत्र में निजी कंपनियों ने न सिर्फ वाराणसी बल्कि यूपी के पूर्वांचल के जिलों, यहां तक कि बिहार की राजधानी पटना में रहने वाले युवाओं को बड़ी तादाद में नौकरियां दी हैं. गुप्ता बताते हैं, ''इन निजी कंपनियों में काम करने वाले 15,000—20,000 लोग ऐसे हैं, जिनकी आमदनी 20,000—30,000 रु. के बीच है. ये किराए के मकान में रह रहे हैं. 20-30 लाख रु. के फ्लैट खरीदने में सह्नम इसी तबके को ध्यान में रखकर अब वाराणसी में किफायती फ्लैट्स बनाने की होड़ शुरू हुई है.”
पूर्वी सिरे पर गंगा से घिरे इस शहर की बड़ी समस्या जमीन की उपलब्धता है. रियल एस्टेट कंपनी रुद्रा समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण अग्रवाल बताते हैं कि शहर में 5,000 से 15,000 रु. प्रति वर्गफुट दर पर भी थोड़ी-सी जमीन उपलब्ध है. आप इतनी महंगी जमीन पर अपार्टमेंट बनाने पर फ्लैट की कीमत का अंदाज लगा सकते हैं. अग्रवाल बताते हैं, ''वाराणसी के पुराने इलाकों में रहने वाले ज्यादातर कारोबारी हैं. ये शहर से बाहर नहीं रहना चाहते. इनमें से ज्यादातर लोग या तो अपने पुराने मकानों को तुड़वाकर नए तरीके से बनवा रहे हैं या फिर शहर में बने महंगे अपार्टमेंट में रहना पसंद कर रहे हैं. जो लोग दूसरे शहरों से वाराणसी में नौकरी करने आए हैं वे भीड़भाड़ से दूर ऐसे मकान तलाश रहे हैं जो उनकी पहुंच में हों.”
यही वे वजहें हैं, जिन्होंने वाराणसी शहर से 10 किलोमीटर के दायरे में लखनऊ रोड पर हरहुआ, इलाहाबाद-बनारस हाइवे पर चितईपुर, लालपुर, पहाडिय़ा और शिवपुर इलाके को किफायती मकानों के बाजार के बड़े केंद्र के रूप में पहचान दी है. किफायती फ्लैट्स मुहैया कराने के लिए रुद्रा समूह ने पहाडिय़ा में रुद्रा हाइट्स, शिवपुर में रुद्रा संपदा और रुद्रा हेरिटेज प्रोजेक्ट लांच किए हैं तो हरहुआ इलाके में 'विनायक निर्माण प्राइवेट लिमिटेड’ का विनायक रामेश्वरम अपार्टमेंट भी खास तौर पर वाराणसी में तेजी से उभर रहे मध्यवर्गीय नौकरी-पेशा वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा है.
इस मामले में वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) भी पीछे नहीं है. उसने लालपुर इलाके में किफायती फ्लैट की अपनी योजना 'लैंडमार्क अपार्टमेंट’ पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. इस सात मंजिला अपार्टमेंट में तीन बेड रूम और दो बेड रूम वाले कुल 272 फ्लैट्स बनेंगे, जिनमें से 40 फीसदी बनकर तैयार हो चुके हैं. इन फ्लैट की कीमत 30 से 40 लाख के बीच है. इसी अपार्टमेंट में एक तीन कमरे का फ्लैट लेने वाले देवाशीष सिन्हा ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर हैं. मूल रूप से बलिया के सिन्हा बताते हैं, ''मैं लंका इलाके में किराए के मकान में दूसरी मंजिल पर रहता हूं. बुजुर्ग होने की वजह से मां-बाप साथ में नहीं रहते क्योंकि उन्हें सीढिय़ां चढऩे में कठिनाई होती है. लैंड मार्क अपार्टमेंट में लिफ्ट होने से मैं उन्हें साथ रख सकूंगा.”
कई निजी बैंक भी आसान शर्तों पर लोन मुहैया करा रहे हैं. वाराणसी के मलदहिया चौराहे पर एक निजी बैंक में असिस्टेंट मैनेजर विवेक चौरसिया बताते हैं, ''फ्लैट खरीदने के लिए बैंक से कर्ज लेने पर इसकी किस्त तुरंत शुरू न करके कब्जे के वक्त शुरू की जा रही है.” रियल एस्टेट कंसल्टेंट अभिनव पांडेय बताते हैं कि सबसे ज्यादा मांग दो बेडरूम वाले फ्लैट्स की है क्योंकि यह करीब 25 लाख रु. तक में उपलब्ध हैं. इसीलिए सभी इलाकों में बनने वाले कुल फ्लैट्स में 60 फीसदी हिस्सा दो बेड रूम वाले फ्लैट्स का है. टूटी सड़कों और रेंगते ट्रैफिक वाला घाटों, मंदिरों का यह शहर जिस तरह से रिहाइश के नए रंग में ढल रहा है, उसने कई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं. इससे निजात को अभी से ठोस प्रयास करने होंगे.

