सरकारी क्षेत्र की तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) में मार्केटिंग डायरेक्टर के पद तक पहुंचने के लिए निशि वासुदेव को किसी भी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा. वे कहती हैं कि शीर्ष तक पहुंचने के लिए प्रोफेशनल होना बहुत जरूरी है.
वासुदेव पहली महिला हैं जिन्हें भारत की तेल और गैस कंपनियों में से एक में पूर्णकालिक डायरेक्टर होने का गौरव हासिल
हुआ है. 21 अगस्त को कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने एचपीसीएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के पद के लिए उनके नाम की सिफारिश की थी.
वे कहती हैं, ''आप अपनी सुविधानुसार व्यवहार की उम्मीद नहीं कर सकते. अगर होड़ एक ही पद के लिए हो रही है तो आपको वह काम करने के लिए तैयार होना होगा जो पुरुष कर रहे हैं. अगर काम के सिलसिले में महीने में 15 से 20 दिन ट्रैवल करना पड़े तो आपको तैयार रहना चाहिए.”
सरकारी क्षेत्र के अधिकारियों के एक ग्रुप नॉर्थ इंडिया चैप्टर ऑफ विमेन इन द पब्लिक सेक्टर की प्रमुख निशि महाजन खुराना का कहना है, ''वासुदेव प्रोफेशनल और महत्वाकांक्षी अधिकारी हैं. महिला अधिकारियों के बड़े पूल से न सिर्फ ऊर्जा कंपनियों, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य कंपनियों के बोर्ड में भी ज्यादा-से-ज्यादा महिलाओं की मौजूदगी दिखने वाली है.”
58 वर्षीया वासुदेव का कहना है कि नौवें दशक तक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के कर्मचारियों में महिलाओं की भागीदारी महज पांच फीसदी थी. आज यह संख्या 11 फीसदी तक पहुंच गई है. ''महिलाएं रिफाइनरीज, मार्केटिंग ऑफिस और रिग (तेल या गैस निकालने वाले संयंत्र) पर काम कर रही हैं.”
वासुदेव को 3 करोड़ टन पेट्रोल, डीजल और लुब्रिकेंटस की बिक्री का जिम्मा सौंपा गया है. लागत कम करने के लिए वे ऑटोमेशन और आइटी अपग्रेड पर ध्यान दे रही हैं. उन्होंने 2002 में ईआरपी की स्थापना की थी और 2006 में चीफ इन्फॉर्मेशन अधिकारी बनीं.
वे अंतरराष्ट्रीय लुब्रिकेंट बाजार और पाकिस्तान के साथ के कूटनीतिक घटनाक्रमों पर भी नजर रखती हैं. वे कहती हैं, ''हम अपने उत्पाद उन्हें निर्यात कर सकते हैं. पंजाब के बटिंडा की एचपीसीएल रिफाइनरी सीमा से बमुश्किल 80 किलोमीटर की दूरी पर है और दूसरी बाड़मेर में बन रही है, लेकिन फैसला तो राजनयिक स्तर पर लेना होगा.”
वासुदेव पहली महिला हैं जिन्हें भारत की तेल और गैस कंपनियों में से एक में पूर्णकालिक डायरेक्टर होने का गौरव हासिल
हुआ है. 21 अगस्त को कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने एचपीसीएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के पद के लिए उनके नाम की सिफारिश की थी.
वे कहती हैं, ''आप अपनी सुविधानुसार व्यवहार की उम्मीद नहीं कर सकते. अगर होड़ एक ही पद के लिए हो रही है तो आपको वह काम करने के लिए तैयार होना होगा जो पुरुष कर रहे हैं. अगर काम के सिलसिले में महीने में 15 से 20 दिन ट्रैवल करना पड़े तो आपको तैयार रहना चाहिए.”
सरकारी क्षेत्र के अधिकारियों के एक ग्रुप नॉर्थ इंडिया चैप्टर ऑफ विमेन इन द पब्लिक सेक्टर की प्रमुख निशि महाजन खुराना का कहना है, ''वासुदेव प्रोफेशनल और महत्वाकांक्षी अधिकारी हैं. महिला अधिकारियों के बड़े पूल से न सिर्फ ऊर्जा कंपनियों, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य कंपनियों के बोर्ड में भी ज्यादा-से-ज्यादा महिलाओं की मौजूदगी दिखने वाली है.”
58 वर्षीया वासुदेव का कहना है कि नौवें दशक तक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के कर्मचारियों में महिलाओं की भागीदारी महज पांच फीसदी थी. आज यह संख्या 11 फीसदी तक पहुंच गई है. ''महिलाएं रिफाइनरीज, मार्केटिंग ऑफिस और रिग (तेल या गैस निकालने वाले संयंत्र) पर काम कर रही हैं.”
वासुदेव को 3 करोड़ टन पेट्रोल, डीजल और लुब्रिकेंटस की बिक्री का जिम्मा सौंपा गया है. लागत कम करने के लिए वे ऑटोमेशन और आइटी अपग्रेड पर ध्यान दे रही हैं. उन्होंने 2002 में ईआरपी की स्थापना की थी और 2006 में चीफ इन्फॉर्मेशन अधिकारी बनीं.
वे अंतरराष्ट्रीय लुब्रिकेंट बाजार और पाकिस्तान के साथ के कूटनीतिक घटनाक्रमों पर भी नजर रखती हैं. वे कहती हैं, ''हम अपने उत्पाद उन्हें निर्यात कर सकते हैं. पंजाब के बटिंडा की एचपीसीएल रिफाइनरी सीमा से बमुश्किल 80 किलोमीटर की दूरी पर है और दूसरी बाड़मेर में बन रही है, लेकिन फैसला तो राजनयिक स्तर पर लेना होगा.”

