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मध्य प्रदेश: पकड़ा गया नशे का बड़ा सौदागर

उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सीमा से लगे होने की वजह से ग्वालियर का इलाका नशीले पदार्थों की सप्लाई का केंद्र बन गया है.

Madhya Pradesh Police
Madhya Pradesh Police
अपडेटेड 13 जून , 2013

[तस्वीर: पुलिस की गिरफ्त में कारोबारी प्रदीप (लाल कुर्ते में) बेटों के साथ]

एक पखवाड़े पहले जब ग्वालियर पुलिस ने शहर की पॉश कॉलोनी बसंत विहार में एक टाटा सफारी को रोककर तलाशी ली तो उन्हें अंदाजा नहीं था कि वे स्मैक जैसे नशीले पदार्थों के दूसरे राज्यों तक फैले नेटवर्क तक पहुंच जाएंगे. इस सफारी को चला रहे प्रदीप शिवहरे के पास से 382 ग्राम स्मैक मिली.

इसके बाद जब पुलिस ने पुराने ग्वालियर के सूबे की गोठ में स्थित प्रदीप शिवहरे के मकान में छापा मारा तो ड्राइंग रूम से लेकर बाथरूम तक करीब एक किलो स्मैक बरामद हुई. यह पहला मौका था, जब शहरी इलाके में नशीले पदार्थों की एक बड़ी खेप बरामद की गई. इससे खुलासा हो गया कि ग्वालियर नशीले पदार्थों की सप्लाई का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है. दरअसल, ड्रग्स कारोबारी शिवहरे भी नहीं पकड़ा जाता, अगर लश्कर इलाके में कुछ महीने पहले नियुक्त की गईं डीएसपी प्रतिभा मैथ्यू ने जांच करके मामले को आगे नहीं बढ़ाया होता.

14 मई को तड़के साढ़े तीन बजे शिवहरे के मकान पर मारे गए छापे को इतना गोपनीय रखा कि स्थानीय थाने के स्टाफ को भी शामिल नहीं किया गया, क्योंकि स्थानीय पुलिसकर्मी शिवहरे के कारोबार में मदद करते थे. जब भी पुलिस शिवहरे पर कार्रवाई करती, उसके पास पहले से खबर पहुंच जाती और मकान की तलाशी में कुछ नहीं मिलता था.

इसके बाद शिवहरे उलटा पुलिस के खिलाफ ही परेशान करने का मामला दर्ज करा देता था. इसके चलते स्थानीय पुलिस भी उससे डरती थी. इसी वजह से शिवहरे का ड्रग्स कारोबार पिछले एक दशक से फल-फूल रहा था. हालांकि 14 मई को भी शिवहरे परिवार ने टॉयलेट में स्मैक बहाने का प्रयास किया, लेकिन घर के कमरों में रखी 600 ग्राम स्मैक मिल गई. पुलिस के हाथ सबूत लग गए, इसलिए शिवहरे की धमकी काम न आई. पुलिस ने इस बार पूरी तैयार के साथ छापेमारी की, वरना उसे फिर खाली हाथ लौटना पड़ सकता था. अनुमान के मुताबिक शिवहरे ने एक दशक में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की स्मैक ठिकाने लगाई है. प्रदीप शिवहरे का पूरा परिवार ही नशीले कारोबार में लगा हुआ था. उसके दो बेटों अमर और आशीष के साथ बहू गीता के कमरे से भी स्मैक बरामद हुई है. 10 वर्ष पहले शिवहरे परिवार गांजा और भांग के सरकारी ठेके लिया करता था और बाद में बीयर बार भी चलाया, लेकिन इसमें मुनाफा कम होता देख वह नशीले पदार्थों का कारोबार करने लगा. यह कारोबार इतना फला-फूला कि ग्वालियर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में उसने स्मैक की सप्लाई शुरू कर दी.

अकेले ग्वालियर में ही शिवहरे के 300 से ज्यादा एजेंट स्मैक की फुटकर में सप्लाई करते थे. जब भी शिवहरे के घर और होटल में पुलिस छापा मारती तो उसे पहले से खबर मिल जाती और वह स्मैक छिपा देता था. इसी वर्ष फरवरी में भी पुलिस ने छापा मारा था तो उसने घर में रखी स्मैक को पानी में मिलाकर घर में पोंछा लगवा दिया, जिससे पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा.

इस बारे में लश्कर सर्किल के सीएसपी प्रदीप पटेल बताते हैं कि पहले जब भी शिवहरे के ठिकानों पर छापा मारा गया तो स्मैक नहीं मिलती थी, लेकिन इस बार वह छिपा नहीं सका, क्योंकि उसे कार्रवाई का अंदाजा नहीं लगा और घर से बड़ी मात्रा में स्मैक मिल गई.

पिछले एक वर्ष में ही ग्वालियर पुलिस के पास नशीले पदार्थों से जुड़े 20 से ज्यादा मामले दर्ज हुए, लेकिन शिवहरे जैसी बड़ी मछली अब जाकर हाथ लगी. इसके पहले पांच या 10 ग्राम स्मैक बेचने या फिर उसका सेवन करने वाले ही पुलिस के हाथ लगते थे.

दरअसल, ग्वालियर और चंबल अंचल की सीमा दो राज्यों राजस्थान और उत्तर प्रदेश से लगती है और इसी वजह से यह इलाका नशीले पदार्थों की सप्लाई का एक ट्रांजिट प्वाइंट बना हुआ है. इसे पुलिस स्वीकारती तो है लेकिन कई जिलों की पुलिस के बीच तालमेल की कमी से छिटपुट मामले ही सामने आते हैं.

इसी तरह, मालवा के मंदसौर इलाके में अफीम का एक प्रोडक्ट डोडा-चूरा ग्वालियर और प्रदेश की सीमा के रास्ते पंजाब तक पहुंचता है. कई बार राष्ट्रीय राजमार्ग तीन पर पुलिस ने डोडा-चूरा की खेप जब्त की. इसके अलावा चंबल के भिंड जिले के गांवों में स्मैक बिकती है.

एक पुलिस अधिकारी बताते हैं कि यूपी के बुंदेलखंड के उरई-जालौन के तस्करों से इलाके के ड्रग्स कारोबारियों के रिश्ते हैं, लेकिन नेटवर्क इतना बड़ा है कि इसकी तह तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है. अब पुलिस के सामने यह चुनौती है कि शिवहरे इतनी बड़ी मात्रा में स्मैक कहां से लेकर आता था और कौन लोग इस नशीले कारोबार में उसकी मदद करते थे. खास तौर पर, उन पुलिसकर्मियों की पहचान जरूरी हो गई है, जो उसकी मदद किया करते थे. हालांकि 15 दिन बीत जाने के बाद पुलिस जांच कहां तक पहुंची है, इस बारे में अधिकारी बताने को तैयार नहीं हैं.

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