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ये हैं बिहार के लूटखोर बाबू लोग

अब भ्रष्ट लोकसेवकों की शामत आई बिहार में. चार की संपत्ति जब्त. लोक सेवा कानून से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मिल रही मदद.

राज्य में 2006 से भ्रष्टाचार पर प्रहार तेज हुआ. सरकारी कार्यों को निबटाने के बदले जरूरतमंदों से रिश्वत लेने वाले लोक सेवकों के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए. 2006 से अप्रैल, 2013 तक राज्य में भ्रष्टाचार के 522 मामले दर्ज हुए. भ्रष्टाचार के मामलों में औसतन हर पांच दिन में एक रिश्वतखोर पर कार्रवाई हो रही है. हालांकि रफ्तार थोड़ी सुस्त पड़ी है. 2012 में 48 मामले दर्ज हुए. 2008 औ 2009 में 78-78 मामले दर्ज किए गए थे. 2007 में इनकी संख्या 105 तक पहुंच गई थी.

इस पर अंकुश लगाने के लिए बिहार स्पेशल कोर्ट एक्ट, 2009 बनाया गया और विजिलेंस कोर्ट ने आय से अधिक संपति मामले में पांच लोगों की संपति जब्त करने का आदेश दिया. 48 लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्ट तरीके से 40.5 करोड़ रु. की संपत्ति अर्जित करने का मामले सामने आया. अब तक चार लोक सेवकों की संपत्ति जब्त की जा चुकी है, जिसमें पूर्व आइएएस अधिकारी एस.एस. वर्मा और पूर्व डीजीपी नारायण मिश्र भी शामिल हैं.

अपर महानिदेशक (विजिलेंस) प्रमोद कुमार ठाकुर कहते हैं, ‘‘राइट टु पब्लिक सर्विस एक्ट (आरटीपीएस) लागू होने से रिश्वतखोरी की शिकायतें कम हुई हैं. इसके तहत कोई भी काम एक निर्धारित अवधि में पूरा करने की बाध्यता होती है.’’ ठाकुर का मानना है कि निगरानी की कार्रवाइयों से भय पैदा हुआ है, जिससे रिश्वतखोरी के मामलों में कमी आई है. भ्रष्टाचार के बड़े मामलों में कार्रवाई भी की गई है.

हालांकि अभी भी मामलों के निबटारे की रफ्तार सुस्त है. मार्च, 2013 में कानून मंत्री नरेंद्र नारायण यादव ने सदन में दिए अपने जवाब में कहा, ‘‘1990 से 2010 तक निगरानी जांच ब्यूरो ने 1,121 मामले दर्ज किए, जिसमें से सिर्फ 55 मामलों में 94 दोषियों को सजा हुई. 1990 से 2012 के बीच भ्रष्टाचार के आरोपों में 561 सरकारी कर्मचारी गिरफ्तार हुए, लेकिन सजा सिर्फ 122 लोगों को ही मिली. कानून मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य सरकार निगरानी जांच ब्यूरो (विजिलेंस ब्यूरो) के मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए जल्द ही पूर्णकालिक अदालतों का गठन करेगी. यह प्रक्रिया चल रही है और अपने अंतिम चरण में है. फिलहाल पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर के सिविल कोर्ट के 10 न्यायाधीश ही विशेष न्यायालय अधिनियम, 2009 के तहत विजिलेंस के मामलों की सुनवाई कर रहे हैं.

काली कमाई से करोड़पति
छापा पड़ा: 20 फरवरी, 2013Black money
मो. यूनुस, इन्फोर्समेंट सब इंसपेक्टर, यातायात विभाग, कैमूर
मामला: पटना के हारुन नगर, मुजफ्फरपुर और पदस्थापन स्थल मोहनिया में आर्थिक अपराध अनुसंधान इकाई की छापेमारी के बाद मोहम्मद यूनुस के पास से घोषित आय से कई गुना ज्यादा की संपत्ति बरामद की गई. कुल संपत्ति यही कोई 50 करोड़ रु. की थी
बरामदगी: 61.98 लाख रु. नगद. यूनुस और उसके परिजनों के नाम पर 25 एकड़ से ज्यादा की जमीन, मुजफ्फरपुर और पटना में बहुमंजिला इमारत, निवेश के कागजात, स्कूल, ट्रेनिंग कॉलेज और सिनेमा हॉल.
अतीत: मुजफ्फरपुर निवासी यूनुस के पिता ट्यूशन पढ़ाते थे और मां सब्जी बेचती थीं. पुश्तैनी 23 कट्ठा जमीन थी. यातायात विभाग में इन्फोर्समेंट सब-इंस्पेक्टर की नौकरी के बाद काली कमाई की राह से यूनुस करिश्माई करोड़पतियों में शुमार हो गया.

आय है कम और संपत्ति ज्यादा
छापा पड़ा: 2 अगस्त, 2012black money
नारायण मिश्र, पूर्व पुलिस महानिदेशक, बिहार (1969 बैच)
मामला: विजिलेंस कोर्ट के बिहार के विशेष न्यायालय अधिनियम 2009 के फैसले के बाद राज्य सरकार ने पटना के वेद नगर स्थित नारायण मिश्र के मकान और नेपाली नगर स्थित दो भूखंड जब्त कर लिए. दिसंबर में पूर्व डीजीपी के आलीशान मकान को मूक बधिर स्कूली बच्चों के लिए दे दिया गया.
बरामदगी: पटना में मकान और जमीन, सात लाख रु. के जेवरात, 2.39 लाख रु. नगद, 17 लाख रु. के शेयर, 7.32 लाख रु. के बैंक अकाउंट्स के अलावा मुंबई और हजारीबाग में चल-अचल संपत्ति.
अतीत: ओडिसा के कटक जिले के निवासी नारायण मिश्र के पिता किसान थे. उनके देहांत के बाद एक पासबुक में 1,200 रु. और दूसरी पासबुक में एक लाख रु. थे. 6 फरवरी, 2007 को विजिलेंस की छापेमारी में 1.40 करोड़ रु. की संपत्ति बरामद, जो घोषित आय से 56.62 लाख  रु. ज्यादा थी.

टाइपिस्ट से बने करोड़पति
छापा पड़ा: 21 मार्च, 2013Arjun Prasad
नाम: अर्जुन प्रसाद, तत्कालीन मोबाइल सब इंस्पेक्टर डोभी (गया)
मामला: पटना के रामजीचक स्थित आवास पर विजिलेंस ब्यूरो की छापेमारी में घोषित आय से 12 गुना संपत्ति बरामद. घोषित आय: 56.74 लाख रु.,
अर्जित संपति: 7.2 करोड़ रु.
बरामदगी: रामजीचक में चार मंजिला मकान के अलावा तीन और मकान और फार्म हाउस. अर्जुन और उसके परिजनों के नाम पर रामजीचक, दीघा बगीचा और मकदूमपुर में 15 कट्ठा जमीन, डिपार्टमेंटल स्टोर, 11 ट्रक और दो लक्जरी गाडिय़ां.
अतीत: परिवहन विभाग में 6 दिसंबर, 1976 को 200 रु. महीने पर बतौर टाइपिस्ट नौकरी ज्वाइन की. प्रोन्नति लेकर 1995 में मोबाइल सब इंस्पेक्टर बने. लेकिन अर्जुन की ज्यादातर संपति पिछले 5-6 साल के दौरान अर्जित की गई है.

परदे के पीछे का सच
छापा पड़ा: 9 सितंबर, 2011
शिवशंकर वर्मा, पूर्व आइएएस
अधिकारी (1981 बैच)
मामला: 1981 बैच के पूर्व आइएएस शिवशंकर वर्मा के पटना के रुकनपुरा स्थित तिमंजिला मकान में प्राइमरी स्कूल खोल दिया गया.
बरामदगी: पटना के रुकनपुरा में मकान के अलावा, 16.5 लाख रु. नगद, साढ़े नौ करोड़ किलोग्राम स्वर्ण आभूषण, गिन्नी बरामद.black money
अतीत: लघु सिंचाई विभाग में सेक्रेटरी पद पर रहने के दौरान विजिलेंस ने 3 जुलाई, 2007 को छापेमारी में 2.14 करोड़ रु. की संपत्ति का खुलासा किया था.

तनख्वाह चवन्नी संपत्ति रुपय्या
छापा पड़ा: 17 अप्रैल, 2013
डॉ. सुरेंद्र कुमार, फूड निरीक्षक, पटना
मामला: पटना के अशोक नगर (कंकड़बाग) में रोड संख्या-8 स्थित गीतांजलि भवन में विजिलेंस ब्यूरो की छापेमारी में घोषित आय से आठ गुना से भी ज्यादा की संपत्ति बरामद. घोषित आय 1.17 करोड़ रु. है, जबकि अर्जित संपति 10 करोड़ रु. से भी ज्यादा है.
बरामदगी: डेढ़ किलो सोने और चांदी के आभूषण, नकदी, छह बैंक अकाउंट और दो लॉकरों के कागजात. सुरेंद्र और उसके परिजनों के नाम पर 5.30 करोड़ रु. मूल्य की जमीन. पटना के आवासीय इलाके में 38 कट्ठा जमीन, पटना में आइटीआइ संस्थान, राजगीर में 23 एकड़ जमीन. राजगीर में डेंटल कॉलेज के लिए 60 एकड़ जमीन खरीदने के कागजात.Black money
अतीत: गया के वैजदा गांव निवासी सुरेंद्र ने तीन दशक पहले 1979 में स्वास्थ्य विभाग में बीसीजी टेक्नीशियन के रूप में 250 रु. प्रति माह की नौकरी ज्वाइन की थी. 1985 में स्वास्थ्य निरीक्षक और 1989 में खाद्य निरीक्षक रहे. 2000-01 में सालाना वेतन 77,340 रु. था. 2012-13 में 3,01,873 रु. की घोषित आय में भी गड़बड़ी की. नौकरी से 25.35 लाख रु. की कमाई. 32 लाख रु. बैंक लोन लिया. फिर भी संपत्ति बताई 1.17 करोड़ रु.

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