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उत्तर प्रदेश: महिलाएं लगाएंगी अब BJP की नैया पार

बीजेपी ने अपनी नई कार्यकारिणी में 37 महिला नेताओं को स्थान देकर एक नई शुरुआत तो की, लेकिन ऊंचे पदों के मामले में वह भी पुत्र मोह में फंसी.

यूपी में बीजेपी की टीम
यूपी में बीजेपी की टीम
अपडेटेड 13 मार्च , 2013

रुबाना सिद्दीकी वह पहली महिला हैं, जो यूपी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की अध्यक्ष बनी हैं. लखनऊ निवासी और मुसलमानों के सुन्नी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली 45 वर्षीया रुबाना ने 2004 में बीजेपी से राजनैतिक सफर की शुरुआत की. पिछले नौ वर्षों के दौरान बीजेपी के श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक से लेकर अल्पसंख्यक मोर्चे में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य तक का सफर तय करने वाली रुबाना को अल्पसंख्यकों को बीजेपी से जोडऩे की महती जिम्मेदारी दी गई है. 

अकेले रुबाना ही इस नई जिम्मेदारी से उत्साहित नहीं हैं, बल्कि बीजेपी की और 36 महिला नेता भी हैं, जिन्हें 23 फरवरी को नवगठित प्रदेश कार्यकारिणी में जगह मिली है. सितंबर, 2007 में भोपाल में हुई बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान पार्टी कार्यकारिणी में महिलाओं की 33 फीसदी आरक्षण देना तय हुआ था.

इसके बाद से प्रदेश बीजेपी की कार्यकारिणी में महिलाओं की संख्या खासी रही है, फिर भी यह संख्या तय कोटे से कम ही थी. पिछली कार्यकारिणी में 27 महिलाओं को जगह मिली थी, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 105 सदस्यों (घोषित 103) वाली कार्यकारिणी में 37 का है, जो कुल सदस्यों का 34 फीसदी है.

प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की इस नई टीम में उपाध्यक्ष के दस निर्धारित पदों में आठ पर पदाधिकारियों के नाम घोषित किए गए हैं, जिनमें तीन महिलाएं हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड के हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में 20 वर्ष बाद बीजेपी का परचम लहराने वाली निषाद समुदाय से जुड़ीं 48 वर्षीया साध्वी निरंजन ज्योति को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने संगठन में अहम जगह दी है.

हमीरपुर के पड़ोसी जिले फतेहपुर से दूसरी बार विधायक चुनी गईं 46 वर्षीया कृष्णा पासवान को भी उपाध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने साफ कर दिया है कि समाजवादी पार्टी की सरकार में हो रही बुंदेलखंड की उपेक्षा को भुनाने के लिए पार्टी ने महिला विधायकों को आगे कर दिया है.

बीजेपी की फायरब्रांड नेता उमा भारती भी बुंदेलखंड के चरखारी (महोबा) से विधायक हैं. इसके अलावा प्रदेश बीजेपी में मंत्री के दस पदों में भी पांच महिला नेताओं को जगह दी गई है. पूर्वांचल के जिलों में वैश्य और खासकर जायसवाल समाज की संख्या को ध्यान में रखते हुए बहराइच की 44 वर्षीया अनुपमा जायसवाल को प्रदेश मंत्री बनाया गया है. वे पहले बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री रह चुकी हैं.

जातीय और वर्गीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ही प्रदेश के पश्चिमी इलाके के एक प्रमुख समुदाय ‘जाटव’ का बीजेपी के साथ जुड़ाव मजबूत करने का जिम्मा इसी समुदाय से आने वाली मेरठ निवासी 45 वर्षीय कांता कर्दम को प्रदेश मंत्री बनाकर सौंपा गया है. प्रदेश मंत्री की फेहरिस्त में एक युवा चेहरा 38 वर्षीय नीलिमा कटियार का भी है.

नीलिमा ने प्रदेश कार्यकारिणी में अपनी मां और वरिष्ठ बीजेपी नेता प्रेमलता कटियार की जगह ली है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से छात्र राजनीति की शुरुआत करके बीजेपी में युवा मोर्चा की प्रदेश मंत्री और कानपुर नगर बीजेपी में प्रदेश महामंत्री का पद संभालने वाली नीलिमा की गिनती पिछड़ी जाति के तेज-तर्रार नेताओं में होती है.

छात्र राजनीति से शुरू कर बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी में जगह बनाने वाली नेताओं में 42 वर्षीया अनीता अग्रवाल भी हैं. उच्च न्यायालय में वकालत करने वाली अनीता को सह मीडिया प्रभारी बनाकर पहली बार किसी महिला को ऐसा दायित्व सौंपा गया है. इसके अलावा पार्टी के 78 सदस्यीय कार्यकारिणी सदस्यों में 24 महिलाएं शामिल की गई हैं.

प्रदेश बीजेपी के कई पूर्व मंत्री पार्टी की नई कार्यकारिणी से खुश नहीं हैं. इनमें से एक नेता आरोप लगाते हैं, “कार्यकारिणी में कुछ ऐसी महिलाओं को शामिल किया गया है, जो बहुत अनुभवहीन हैं. इसके अलावा प्रदेश के पश्चिमी और मध्य जिलों की महिलाओं को ही तवज्जो दी गई और पूर्वांचल के साथ भेदभाव किया गया है.”

हालांकि प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ऐसे किसी आरोप से इत्तेफाक नहीं रखते. वे कहते हैं, “कार्यकारिणी में उन्हीं महिला नेताओं को जगह दी गई है जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद पार्टी के लिए जमकर पसीना बहाया है.” महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष बनीं 44 वर्षीया कमलावती सिंह ऐसी ही एक महिला नेता हैं. पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान ‘महिला बूथ सदस्यता अभियान’ के संयोजक के रूप में कमलावती ने पूरे प्रदेश में 40,000 महिलाओं को बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करवाई है. पार्टी ने उन्हें पार्टी के महिला मोर्चा की कमान सौंपकर इसी का इनाम दिया है.

कार्यकारिणी गठित होने के बाद सभी महिला पदाधिकारी महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति पर जुट गई हैं. इसके लिए 16 मार्च को 21,000 महिलाओं की एक रैली राजधानी लखनऊ में आयोजित की जाएगी, जो हाथ में दीप लिए सड़कों पर मार्च करेंगी.

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