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इंटरनेट से कमाई हुई नहीं उल्‍टे मिला धोखा

इंटरनेट की फर्जी कंपनियों ने रातोरात अमीर बनाने का सपना दिखाकर सैकड़ों लोगों को लूटा.

इंटरनेट कमाई
इंटरनेट कमाई
अपडेटेड 13 मार्च , 2013

उज्जैन की एक व्यस्त सड़क से गुजरते हुए 26 साल के अबरार खान का ध्यान विज्ञापन के बड़े-से होर्डिग की ओर गया, जो इंटरनेट पर ऑनलाइन जॉब करके मोटी कमाई करने से संबंधित था. अबरार ने उस पर लिखे नंबर पर फोन मिलाया तो पता चला कि ट्रेड जोन नाम की कंपनी की वेबसाइट पर हर हफ्ते जाकर विज्ञापनों पर क्लिक करने के बदले उन्हें 500 रु. मिलेंगे.

लेकिन विज्ञापनों तक पहुंचने के लिए उन्हें आइडी की जरूरत थी, जिसका पंजीयन करवाने के लिए अबरार को कंपनी को 2,100 रु. देने पड़े. लेकिन इससे पैसा तो मिला नहीं, बल्कि पंजीयन शुल्क से भी हाथ धोना पड़ा. तब अबरार ने ट्रेड जोन के डीलर राजेंद्र साबू के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई. वे कहते हैं, “पुलिस को सख्त कदम उठाने चाहिए क्योंकि यह हजारों बेरोजगारों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है.”Online fraud

ट्रेड जोन की तरह कई फर्जी कंपनियों में पैसा लगाने वाले पीड़ित बड़ी संख्या में उज्जैन रेंज के आइजी उपेंद्र जैन के पास पहुंच रहे हैं. जैन कहते हैं, “ऐसा व्यापार करने वाली कंपनियों की कार्यशैली की पड़ताल कर रहे हैं. ट्रेड जोन से जुड़े लोगों के खिलाफ मामले दर्ज कर लिए गए हैं.” उज्जैन में ऐसी लगभग एक दर्जन कंपनियां हैं. पिछले दिसंबर में धंधा शुरू करने वाली ट्रेड जोन ने एक-दो हफ्ते तो आइडी वाले ग्राहकों को भुगतान किया लेकिन जल्द ही भुगतान के साथ-साथ कंपनी की वेबसाइट भी बंद हो गई. मामले की पड़ताल कर रही टीम के अगुआ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महावीर सिंह मुजाल्दे बताते हैं, “पता चला है कि यह कैलिफोर्निया की कंपनी है. भारत में इसका कोई ऑफिस नहीं है. इसके प्रमोटरों का पता लगा रहे हैं. यह जानने की कोशिश भी कर रहे हैं कि लोगों से लिया गया, पैसा जाता कहां था?”

फर्जी कंपनियों के खिलाफ शिकायतों की बाढ़-सी आ गई है. पेशे से कॉन्ट्रेक्टर उज्जैन के 37 वर्षीय पुनीत जैन ने शैलेंद्र जैन नाम के डीलर के झांसे में आकर 1,30,000 रु. में ट्रेड जोन की 52 आइडी ले ली थी. उज्जैन के ही प्रवीण सेठिया और राहुल पोरवाल ने भी ट्रेड जोन के डीलर्स के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है. लेकिन छपे दस्तावेज नहीं मिलने के कारण जांच में मुश्किल आ रही है.

कंपनी आइडी की पंजीयन राशि पर सर्विस टैक्स वसूलती थी, इसलिए कस्टम्स ऐंड सेंट्रल एक्साइज विभाग यह जांच कर सकता है कि टैक्स वाकई जमा कराया गया है या नहीं. क्लिक के बदले पैसा देने वाले इससे होने वाली आय पर टैक्स भी काटते थे, जो जमा कराया गया या नहीं, यह भी जांच का विषय है. अबरार खान कहते हैं, “इन कंपनियों का लेन-देन नकद में होता है, इसलिए टैक्स जमा हुआ होगा, इसमें संदेह है.”

अबरार ने जयपुर की कंपनी स्टे वेल इन्फोटेक में भी पैसा लगाया था. वे कहते हैं, “स्टेवेल किसी तरह का भुगतान नहीं कर रही है. लेकिन कई शिकायतों के बावजूद इसके खिलाफ मामला दर्ज नहीं हुआ है.” एएसपी मुजाल्दे कहते हैं, “धोखाधड़ी के सबूत मिलने पर मामले दर्ज कर रहे हैं.” स्टे वेल की वेबसाइट से पता चलता है कि 5,500 रु. देने पर 52 हफ्ते तक 1,000 रु. प्रति विज्ञापन देने की योजना थी. 

उज्जैन की कंपनी पृथ्वी यूटिलिटी भी ऑनलाइन विज्ञापन का काम करती है. इसके संचालक संजय गोयल का दावा है कि इस काम के लिए उन्होंने बाकायदा अनुमति ले रखी है. गोयल बताते हैं, “हम 12,000 रु. में आइडी देते हैं. सर्विस टैक्स अलग लिया जाता है.” लेकिन सूत्रों के मुताबिक, करोड़ों रु. के टर्नओवर वाली ऐसी कंपनियां लेन-देन में चेक का इस्तेमाल नहीं करतीं, जिससे संदेह उत्पन्न होता है. और जैसा कि मुजाल्दे कहते हैं, “लोगों को समझना चाहिए कि किसी के पास अलाउद्दीन का चिराग नहीं है जो इतना पैसा बांट सके. जिनकी शिकायत नहीं आई है, उनकी भी देर-सवेर आएगी.

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