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वंशवाद का घोड़ा बीजेपी ने छोड़ा

हमेशा वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को घेरने वाली बीजेपी भी उसी दलदल में फंस रही है. बीजेपी की नई कार्यसमिति में  कद्दावर नेताओं के पुत्रों को जगह देकर पार्टी ने भी शायद कांग्रेस की तरह ही वंशवाद की बेल को बढ़ाकर सूबे में ‘कमल’ खिलाने का मंसूबा बना लिया है.

अपडेटेड 24 मार्च , 2013

हमेशा वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को घेरने वाली बीजेपी भी उसी दलदल में फंस रही है. बीजेपी की नई कार्यसमिति में  कद्दावर नेताओं के पुत्रों को जगह देकर पार्टी ने भी शायद कांग्रेस की तरह ही वंशवाद की बेल को बढ़ाकर सूबे में ‘कमल’ खिलाने का मंसूबा बना लिया है.

जनवरी में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की ‘राष्ट्रीय जनक्रांति पार्टी’ के बीजेपी में विलय की शर्तों के मुताबिक उनके बेटे राजवीर सिंह ‘रज्जू भैया’ को नई टीम में प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में शामिल किया गया है. लखनऊ से सांसद लालजी टंडन के पुत्र गोपाल टंडन को प्रदेश मंत्री से उपाध्यक्ष बनाकर तरक्की दी गई है.up bjp

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के पुत्र 40 वर्षीय पंकज सिंह को पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान ही प्रदेश मंत्री से महामंत्री पद पर प्रोन्नति दी गई थी, जिसके विरोध में कई साथी नेताओं ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. नई टीम में पंकज को प्रदेश महामंत्री पद पर बरकरार रखा गया है. वरिष्ठ बीजेपी नेता प्रेमलता कटियार पिछली कार्यकारिणी में प्रदेश महामंत्री थीं. अब नई कार्यकारिणी में उनकी बेटी नीलिमा को प्रदेश मंत्री के रूप में जगह दी गई है.

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी पार्टी में वंशवाद के आरोपों को खारिज करते हैं, ‘वंशवाद वहां होता है, जहां पार्टी के नीति नियंता स्वयं अपने पुत्र को बढ़ावा देते हैं. जैसा सपा और कांग्रेस में है. बीजेपी के किसी भी नेता ने अपने पुत्र के लिए सिफारिश नहीं की.’ हालांकि यह भी तथ्य है कि राजनाथ सिंह के पिछले अध्यक्षीय कार्यकाल में उनके बेटे पंकज को चिरईगांव से विधानसभा का टिकट दिया गया था, तो विवाद हुआ और आखिर में पंकज को चुनाव लडऩे से पीछे हटना पड़ा था.

लेकिन वाजपेयी कहते हैं, “जिन चार नेता पुत्रों को टीम में जगह दी गई है, वह सभी 15 वर्ष से ज्यादा समय से सक्रिय राजनीति में हैं और सभी ने अपनी काबिलियत के बलबूते अपनी जगह बनाई है.”

लेकिन इन दलीलों के बावजूद इतना तो तय है कि सूबे में वंशवाद को राजनैतिक मुद्दा बनाने वाली खुद उसी जमात में शामिल हो गई है.

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