गत सोमवार (7 जनवरी) को लातेहार में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए जवानों के शवों को जब रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में पोस्टमार्टम के लिए लाया गया तो केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 112वीं बटालियन के शहीद जवान बाबूलाल पटेल के पेट पर लगे तकरीबन 10 इंच के ताजा टांके को देखकर डॉ. विनय कुमार को शंका हुई. लाश की एक्सरे रिपोर्ट ने रिम्स समेत पुलिस अधिकारियों के होश उड़ा दिए.
माओवादियों ने पटेल के भीतरी अंग को हटाकर सर्किट युक्त सिलेंडरनुमा तीन किलो का शक्तिशाली बम लगा दिया था. अगर डॉक्टरों ने गलती से भी चाकू चलाया होता तो बड़ा हादसा हो सकता था. माओवादी सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के लिए लाश को बतौर बूबी ट्रैप इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह कभी देखने को नहीं मिला कि लाश के पेट में बम डाला गया हो.
लातेहार के एसपी क्रांति कुमार कहते हैं, ''संयोगवश बम नहीं फटा, जो किसी हलचल से फट सकता था. आप उस हादसे का अंदाज नहीं लगा सकते. लाश को हेलिकॉप्टर से रांची लाया गया. इस बीच कुछ भी हो सकता था. ''
पिछले सोमवार को लातेहार जिले के अमुआटीकर गांव में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में 11 सुरक्षा कर्मी और तीन ग्रामीण मारे गए. एक गुप्त सूचना थी कि अमुआटीकर और करमटिया के जंगलों में 50 के करीब माओवादी छिपे हुए हैं. इसके बाद सीआरपीएफ के 112 और 134वीं झारखंड जगुवार की तकरीबन तीन कंपनी इलाके की घेराबंदी के लिए निकल पड़ी. लेकिन वहां लगभग 300 माओवादियों ने घात लगाकर सुरक्षा बलों पर हमला करने के लिए मोर्चाबंदी की हुई थी. अचानक हुए हमले में सुरक्षा बलों को संभलने का मौका नहीं मिला. सीआरपीएफ और जगुवार के सात जवान तत्काल शहीद हो गए और चार लापता हो गए.
झारखंड के डीजीपी गौरीशंकर रथ कहते हैं, ''हमें अपने जवानों को खोने पर पीड़ा है, लेकिन माओवादियों के विरुद्ध अभियान बंद नहीं होगा. अफसोस है कि माओवादियों के मानवाधिकार को लेकर चिल्लाने वाले लोगों को ये चीजें नहीं दिखतीं. '' खुफिया विभाग के अनुसार इस हत्याकांड का सूत्रधार दुर्दांत नक्सली अरविंद है, जो सीपीआइ (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य है. सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा बलों की बढ़ती दबिश से परेशान अरविंद सारंडा की तरफ निकलना चाहता था. इसी वजह से यह व्यूह रचना की गई थी.
इस घटना से ठीक एक हफ्ते पहले केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश पलामू के इन माओवाद प्रभावित इलाकों के दौरे पर आए थे, जहां केंद्र सरकार के 'सरयू एक्शन प्लान' के तहत विकास कार्य को बढ़ावा दिया जा रहा है. घटना के तीन दिन बाद एक ऑडियो टेप जारी करते हुए माओवादियों के प्रवक्ता तूफान ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार माना और कहा कि सरकार ऑपरेशन ग्रीनहंट और एनाकोंडा के माध्यम से जनता की जमीन और संसाधन पर कब्जा करना चाहती है.

