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राजस्थान: जो पाया, उसे लौटाया

गरीब छात्रों को स्टेनो का नि:शुल्क प्रशिक्षण देते हैं एक बैंककर्मी.

अपडेटेड 14 जनवरी , 2013

राजस्थान के सीकर जिले में आरटीओ रोड पर शिक्षण संस्थाओं की बड़ी-बड़ी इमारतें हैं, हर ओर शिक्षण संस्थानों के ही होर्डिंग दिखते हैं. इनके सामने एक मामूली-से घर के बाहर टंगा 'जोशी शॉर्ट हैंड प्रशिक्षण केंद्र' का बोर्ड भले ही छोटा और गौर करने लायक न लगे लेकिन सरकारी नौकरी पाने का ख्वाब देखने वाला हर युवा इस जगह का महत्व जानता है.

केंद्र के 160 छात्रों में से 47 गंगानगर जिले के हैं जो महज एक घंटे की कोचिंग पाने के लिए घर से इतनी दूर रह रहे हैं. उन्हें पूरी उम्मीद है कि गंगानगर के यहीं से निकले और आज शान से सरकारी नौकरी कर रहे 23 बच्चों की तरह उनका भविष्य भी संवर जाएगा.

इस केंद्र की नींव रखी है 56 वर्षीय लक्ष्मीनारायण चेजारा ने, जो सीकर के सहकारी बैंक में वरिष्ठ प्रबंधक हैं. चेजारा पिछले 34 साल से छात्रों को स्टेनो का नि:शुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं. उनके मुताबिक इस तरह वे गुरुदक्षिणा अदा कर रहे हैं. चेजारा बताते हैं, ''आज मैं जो कुछ भी हूं, अपने गुरु ओमप्रकाश जोशी की कृपा से, उन्होंने मुझे इस काबिल बनाया कि मैं आज जरूरतमंदों को काबिल बनाने की कोशिश कर पा रहा. ''

दरअसल 35 साल पहले गरीब परिवार के चेजारा को सीकर के ओमप्रकाश जोशी ने अपने पैसों पर स्टेनो का प्रशिक्षण दिलवाया था, जिसके बाद वे सहकारी बैंक में सहायक मैनेजर बन गए. नौकरी लगते ही चेजारा को लगा कि अब गुरुदक्षिणा देने का वक्त आ गया है. उन्होंने अपने गुरु के बेटों को स्टेनो का प्रशिक्षण दिया और उनकी नौकरी लगने के कुछ माह बाद यह केंद्र शुरू किया. इसका नाम भी उन्होंने अपने गुरु को समर्पित किया है.

आज यहां जयपुर, चूरू, नागौर, दौसा, झुंझुनू और गंगानगर के अलावा बिहार और झरखंड के छात्र भी पढऩे आते हैं. गंगानगर से आए एक छात्र सूर्यप्रकाश बताते हैं, ''यहां से प्रशिक्षण प्राप्त मेरे एक संबंधी की दो साल पहले पुलिस में स्टेनो पद पर नौकरी लगी थी. आज वे एएसआइ हैं. '' सीकर के नरेंद्र कुमार के पिता ने भी 23 साल पहले चेजारा से मार्गदर्शन लिया था और आज वे उपभोक्ता न्यायालय में पीए हैं.

बड़े पद की जिम्मेदारी और इतनी व्यस्तता के बावजूद चेजारा हर सुबह 5-8 बजे के बीच छात्रों के तीन बैच पढ़ाते हैं. यह क्लास चेजारा के घर की छत पर पर लगती है, जिसमें छात्रों का अनुशासन देखते ही बनता है.

चेजारा के मुताबिक, उनके यहां के आठ सौ से ज्यादा छात्र सरकारी नौकरी में लग गए हैं. वे बताते हैं, ''15 साल पहले विधानसभा में स्टेनो के पांच पद निकले थे और पांचों पर मेरे छात्रों को नियुक्ति मिली. '' विधानसभा में कार्यरत उनका छोटा भाई गोपाल चेजारा स्टेनोग्राफी में अपनी स्पीड की बदौलत गिनीज बुक में जगह बना चुका है. इस स्टेनोग्राफर की मेहनत की बदौलत ढेरों परिवारों के बच्चे आज सरकारी नौकरी कर रहे हैं. चेजारा ने अपने छात्रों को सख्त हिदायत दे रखी है कि सफलता के बाद वे उन्हें फोन न करें. इसकी वजह वे बताते हैं, ''इस तरह तो मेरा सारा वक्त फोन पर बात करने में ही बीत जाएगा. ''

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