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नगड़ी जमीन विवाद: उम्मीद जिंदा है

नगड़ी की विवादित जमीन पर लगी धान की फसल किसानों ने काटी.

अपडेटेड 10 दिसंबर , 2012

बात 21 नवंबर की दोपहर की है. जब मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा अपने मंत्रियों और आला अधिकारियों के साथ बिरसा मुंडा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित रांची पतरातू मार्ग के उद्घाटन के लिए पहुंचे तो उस समय जिले के आला अधिकारियों के माथे से पसीना छूट रहा था.

वे बार-बार अपने मातहतों से पूछ रहे थे कि स्थिति काबू में है या नहीं? दरअसल सभा स्थल से महज एक किलोमीटर दूर नगड़ी में सैकड़ों किसान उस जमीन पर लगी धान की फसल काटने पर आमादा थे.

सरकारी दावों के अनुसार सरकार ने नगड़ी की कृषि योग्य 227.71 एकड़ जमीन को 55 साल पहले अधिग्रहीत कर लिया था जिसके तीन अलग-अलग हिस्सों में आइआइएम (76 एकड़) आइआइआइटी (75 एकड़) और विधि विश्वविद्यालय (67 एकड़) खोले जाने प्रस्तावित हैं. ग्रामीण इस जमीन से हटना नहीं चाहते हैं और सरकार के पास पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है क्योंकि इस मुद्दे पर झारखंड हाइकोर्ट ने सरकार को निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया है.

वैसे नगड़ी के किसानों ने एक सांकेतिक लड़ाई जीत ली है. जिला प्रशासन को फसल काटने पर लगाई रोक के फैसले को वापस लेना पड़ा. शाम होते-होते किसान तकरीबन 20 एकड़ जमीन पर लगी फसल काटकर अपने घर ले गए.

वहां मौजूद दंडाधिकारी नरेंद्र गुप्ता ने कहा, ‘‘फसल बरबाद होने से नहीं रोकी जा सकती. प्रशासन अपनी देख-रेख में कटाई करवा रहा है.’’ इस बार तो ठीक लेकिन अगली बार क्या?  लोगों की उम्मीदें अगले माह होने वाली ट्राइबल एडवाइजरी कौंसिल की मीटिंग पर टिकी है, इससे पहले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी नगड़ी गूंज सकता है.

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