समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव यूपीए सरकार के ऐसे खैरख्वाह हैं, जो हमेशा सरकार को संकट से उबारते हैं और साथ ही ऐसा दांव चलने से भी नहीं चूकते जिससे मनमोहन सिंह सरकार की सांस अटक जाए.
उत्तर प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अभी से 63 प्रत्याशियों की घोषणा कर सपा ने एक बार फिर ऐसी ही बिसात बिछाई है. सपा ने ऐसे वक्त में टिकट घोषित कर दिए हैं जब बीएसपी सोच-विचार की मुद्रा में है और भाजपा-कांग्रेस तो इस बारे में सोच भी नहीं पा रहीं.
पार्टी ने जिस तरह विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय और प्रदेश सरकार के चार मंत्रियों को लोकसभा का टिकट दिया उससे अंदाजा लगता है कि सपा के लिए भी जिताऊ प्रत्याशी ढूंढना आसान नहीं दिख रहा. वहीं पार्टी ने वर्तमान सांसद आर के पटेल, कमलेश वाल्मीकि और राधे मोहन सिंह का टिकट काट कर संकेत दिया है कि वफादारी और जिताऊ प्रत्याशी उसकी पहली प्राथमिकता है.
एक तरफ इन लोगों के टिकट काट दिए गए वहीं झांसी से चंद्रपाल सिंह और हमीरपुर से विश्वंभर प्रसाद निषाद को लोकसभा का टिकट दिया गया, जबकि ये दोनों नेता हाल ही में विधानसभा चुनाव में मात खा चुके हैं. टिकट वितरण का यह गणित उलझ भले ही लगे, लेकिन अगर इसे यादव परिवार से नजदीकी के चश्मे से देखें तो इसमें सब सीधा है.
वैसे खुद मुलायम परिवार के चार लोग इस बार मैदान में हैं, जिनमें रामगोपाल यादव के साहबजादे अक्षय भी शामिल हैं. पार्टी ने नाम घोषित कर इतना पक्का कर लिया है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता सक्रिय बन रहें.

