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बिहार में झूठी मौत पर बरपा हंगामा

जिस छात्र की हत्या की खबर पर मधुबनी में हिंसा शुरू हुई, वह प्रेमिका संग दिल्ली में मिला, प्रशांत की मौत की आशंका से सुलग गया था मधुबनी.

अपडेटेड 11 नवंबर , 2012

बिहार के मधुबनी से फरार प्रशांत और प्रीति का 18 अक्तूबर को दिल्ली में मिलना उस हिंदी फिल्म की लव स्टोरी जैसा है, जिसके अंत में नायक और नायिका खूनी जंग के बाद दर्शकों के सामने आते हैं. हालांकि असली जीवन में इस प्रेमी जोड़े की लव स्टोरी पूरी होगी या नहीं यह तय नहीं, लेकिन इस जोड़े के गायब होने के बाद की परिस्थितियां फिल्मों की खूनी लव स्टोरी से भी ज्यादा भयावह रही. 17 साल के प्रशांत की हत्या की झूठी खबर के बाद हिंसा की जो घटनाएं घटीं वह उन लोगों के लिए चेतावनी हैं, जो सच्चाई जाने बगैर मामले को तूल दिया करते हैं.

दरअसल, प्रशांत और प्रीति की कहानी में 3 अक्तूबर को नया मोड़ आया, जब मधुबनी के ककना रेलवे पुल के पास अज्ञात व्यक्ति की सिरकटी लाश बरामद हुई. अरेड़ निवासी राजीव झा और विनिता झा दंपत्ती ने उस शव की पहचान अपने बेटे प्रशांत के रूप में की, जो सात सितंबर से प्रीति के साथ फरार था. लेकिन पुलिस को प्रशांत के परिवार के दावे पर संदेह था.

क्योंकि शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सकों ने बरामद शव और प्रशांत की उम्र में आठ साल का अंतर बताया था. लेकिन चिकित्सकों की उस रिपोर्ट पर यह भ्रम फैलाया गया कि पुलिस रसूखवाले के दबाव में ऐसा बता रही है. क्योंकि प्रशांत जिस लड़की के साथ फरार हुआ था उसके पिता जगपति चौधरी मधुबनी में जिला प्रोग्राम अधिकारी हैं. लोग ऐसा मान रहे थे कि चौधरी ने ही प्रशांत की हत्या कराई है, लेकिन रसूख के कारण इस मामले में लीपापोती करने का प्रयास किया जा रहा है.

दाह-संस्कार के लिए शव को परिजनों को सौंपने और अधिकारी पर मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर 12 अक्तूबर को मधुबनी में विरोध-प्रदर्शन किया गया. इस दौरान पुलिस फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई. उग्र प्रदर्शनकारियों ने कैदी वाहन से कैदियों को भी आजाद कर दिया, जिससे दो दर्जन कैदी फरार हो गए.

उग्र भीड़ ने तत्कालीन एसपी सौरव कुमार से उठक-बैठक तक करवाई. अगले दिन बासोपटटी, खजुआई, जयनगर और खजौली इलाके में विरोध प्रदर्शन कर सरकारी संपति को नुकसान पहुंचाया गया. हालांकि राज्य सरकार ने प्रदर्शन के पहले ही दिन तत्कालीन डीएम आदेश तितरमारे और एसपी सौरव कुमार का तबादला कर दिया.

विपक्षी पार्टियों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की और 15 अक्तूबर को भाकपा-माले ने बिहार बंद का आयोजन किया, जिसे आरजेडी, एलजेपी और कांग्रेस का समर्थन मिला. आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार को राम भरोसे छोड़ दिया गया है. लेकिन विरोधियों को उस समय झटका लगा, जब डीजीपी अभयानंद ने उसी दिन खुलासा किया कि प्रशांत जीवित है.

दिल्ली में पकड़े जाने के बाद प्रशांत और प्रीति ने पुलिस को बताया कि दोनों शादी करना चाहते हैं, इसलिए फरार हो गए थे. डीजीपी के मुताबिक ये दोनों मधुबनी से मुजफ्फरपुर, रांची, जम्मू, दार्जिलिंग होते हुए दिल्ली पहुंचे थे. यहां संदिग्ध परिस्थिति में दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

राज्य सरकार ने घटना की न्यायिक जांच के लिए पटना हाइकोर्ट के रिटायर जस्टिस उदय सिन्हा की अध्यक्षता में एक आयोग के गठन की घोषणा की है, जो छह माह में सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा. आयोग को 12 अक्तूबर को हुई हिंसक घटना की पृष्ठभूमि, घटनाक्रम, प्रत्यक्ष और परोक्ष परिस्थितियां, जिसके कारण यह घटना घटी, पुलिस फायरिंग के औचित्य की जांच और दायित्व के निर्धारण का जिम्मा सौंपा गया है.

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