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साध्वी उमा भारती का गंगा प्लान

समग्र गंगा यात्रा पर निकली साध्वी उमा भारती केंद्र के खिलाफ तल्ख रुख अपनाने में कोई कोताही नहीं बरत रहीं.

उमा भारती
उमा भारती
अपडेटेड 17 अक्टूबर , 2012

चाहे मौका कोई भी हो नेताओं को तो विरोधियों को घेरने का मौका चाहिए. अब पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की नेता उमा भारती को ही लें. वे इन दिनों गंगासागर से गंगोत्री की यात्रा पर निकली हुई हैं, जिसके तहत वे पांच राज्यों को कवर करेंगी. बेशक उन्होंने इस यात्रा को गैर-राजनैतिक बताया है, लेकिन आदत से मजबूर भारती ने बिहार में अपने तेवरों से साफ कर दिया है कि उनके निशाने पर केंद्र सरकार ही है.

भारती ने गंगा के बहाने एफडीआइ पर निशाना साधा है. उनका कहना है, ''एफडीआइ से देश में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 20 करोड़ लोगों का जुड़ाव हो सकेगा लेकिन गंगा से 50 करोड़ लोगों को फायदा होगा. गंगा सिर्फ राम ही नहीं, रोटी का भी माध्यम है. गंगा से सभी तरह के लोगों को रोजगार के मौके मिलेंगे, जो अपनी बल, बुद्धि और जल के बूते कर पाएंगे. एफडीआइ से विदेशियों का फायदा होगा और उनकी जूठन भारतीयों को खानी पड़ेगी.” वे इस पर आगे कहती हैं, ''शेर जूठा नहीं खाता, जूठन की आस में सियार होते हैं.”

बिहार में 2 अक्तूबर को भागलपुर के मिर्जापुर चौकी से समग्र गंगा यात्रा शुरू हुई जो हफ्तेभर में 470 किलोमीटर की यात्रा के बाद उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में प्रवेश कर गई. इस दौरान भागलपुर, लखीसराय, मुंगेर, बेगूसराय, पटना, आरा और बक्सर जिले में करीब 100 स्वागत समारोह हुए, जिनमें करीब 30 सभाएं हुईं.

भारती की अपील है कि लोग 2 दिसंबर को गंगा किनारे मानव दीवार बनाकर गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए राष्ट्रीय कानून बनाने में अपनी क्षमता का परिचय दें. देश में गंगा बेसिन प्राधिकार का गठन पहले से है, लेकिन वह गंगा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रहा. ऐसे में पर्याप्त कानून बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है.

इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकारों से जरूरी पहल के लिए 20 नवंबर को नई दिल्ली में देश और विदेश के वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के विचार-विमर्श के बाद तय रूपरेखा को आम लोगों के बीच सार्वजनिक किया जाएगा. इसके लिए वैज्ञानिकों की एक टीम भी साथ में दौरा कर रही है, जो गंगा के प्रदूषण संबंधी तथ्यों का आकलन कर रही है.

उसकी अविरलता की राह में फरक्का, देव प्रयाग और नरौरा में बांध बनाकर बाधाएं खड़ी की गईं. इससे पहले गंगा में बड़ी संख्या में डॉल्फिन मिलती थीं, लेकिन प्रदूषण के कारण खत्म हो रही हैं. भारती का कहना है, ''मैं बिजली उत्पादन की विरोधी नहीं हूं. लेकिन नदी की धारा को पूरी तरह रोकने का विरोध है, जिससे लोगों को नुकसान हो रहा है.”

बहरहाल, बिहार की एनडीए सरकार ने गंगा तट पर बसे 20 शहरों में से हाजीपुर, बेगूसराय, मुंगेर और बक्सर में सीवरेज, ठोस कचरा प्रबंधन और सौंदर्यीकरण के लिए 441 करोड़ रु. की योजना का फैसला लेकर गंगा समग्र यात्रा के अभियान को संजीवनी प्रदान की है. बाकी के 16 शहरों के लिए 2,896 करोड़ रु. की योजना केंद्र को सौंपी गई है.

यही नहीं, उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भरोसा दिलाया है कि बिहार सरकार कटिबद्ध है कि आने वाले दिनों में कचरा गंगा नदी में न गिरे इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं. बिहार सरकार के इस प्रयास की भारती ने भी सराहना की है.

भ्रष्टाचार पर भारती ने कहा, ''केंद्र का एक मंत्री जब एक लाख करोड़ रु. हड़प सकता है, तब गंगा के लिए 50,000 करोड़ रु. 'प्रसाद’ (राशि) क्यों नहीं दिया जा सकता.” भारती ने अभियान शुरू करने से पहले ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से इस दिशा में पहल का आग्रह किया था. यही नहीं, सांसदों को गंगाजल देकर इस अभियान में साथ देने की अपील की है.

लिहाजा, पार्टीजन भी भारती के इस अभियान को उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं. बिहार बीजेपी के प्रभारी सांसद धर्मेंद्र प्रधान कहते हैं, ''सारा देश इस मुद्दे पर एकजुट होगा.” हालांकि कुछ लोगों का नजरिया अलग है. वह इस अभियान को लोकसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं. पहली बार अयोध्या में राम मंदिर निर्माण मुद्दे को लेकर बीजेपी केंद्र में आई थी, लेकिन अब गंगा के बहाने पार्टी केंद्र सरकार पर हमले की तैयारी में है. देखें यह कवायद क्या रंग लाती है.

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