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सबको है चुनाव का इंतजार

मायावती, मुलायम सिंह यादव और शरद पवार ने समय-पूर्व चुनाव के लिए तैयारी शुरू की.

अपडेटेड 3 दिसंबर , 2012

अब ऐसा लगने लगा है कि कांग्रेस की सहयोगी पार्टियों को उसे धमकाने का चस्का लग चुका है और अपनी इसी आदत के कारण उन्होंने यूपीए सरकार के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. 10 अक्तूबर को बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ में घोषणा की कि वे जल्द ही यह तय करेंगी कि पार्टी केंद्र सरकार को कब तक बाहर से समर्थन देना जारी रखेगी. उन्होंने कहा, ‘‘सोच-विचार करने के बाद मैं जल्द ही आपको सब कुछ बता दूंगी.’’

सिर्फ मायावती ही समय-पूर्व चुनाव की तैयारियां नहीं कर रही हैं. उसी दिन नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने भी अपनी पार्टी से समय-पूर्व चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा. समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता मुलायम सिंह यादव भी पिछले दिनों अपनी पार्टी की ओर से यही बात कह चुके हैं.

यदि यूपीए-2 को बीएसपी के 21 सांसदों का समर्थन मिलना बंद हो जाए तो खुद को बचाए रखने के लिए वह पूरी तरह से सपा के 22 सांसदों पर ही निर्भर हो जाएगा. वडोदरा में एनसीपी सम्मेलन को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा कि पार्टी गुजरात विधानसभा चुनाव कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ेगी लेकिन सीटों के बंटवारे में वह 2007 के विधानसभा चुनावों में मिली आठ सीटों से अधिक की मांग करेगी.

मायावती ने सितंबर में डीजल की कीमतों में वृद्धि, एलपीजी सिलेंडरों की अधिकतम संख्या तय करने और मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) की मंजूरी देने जैसे सरकार के कदमों पर अपनी प्रतिक्रिया को 9 अक्तूबर को लखनऊ में होने वाली पार्टी की संकल्प रैली तक के लिए टाल दिया था.

लखनऊ के रमाबाई स्थल पर आयोजित रैली में बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने राजनैतिक सरगर्मी बढ़ाते हुए कहा, ‘‘ऐसा लग रहा है जैसे लोकसभा चुनाव समय-पूर्व ही हो जाएंगे.’’ उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से यूपीए की ‘गरीब विरोधी’ नीतियों के खिलाफ संघर्ष करने और समय-पूर्व चुनावों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया, अलबत्ता उन्होंने संकेत दिए कि ‘‘किसानों और गरीब जनता के हित में सकारात्मक नतीजे आने पर बीएसपी एफडीआइ’’ को गले भी लगा सकती है.

कांग्रेस के लिए यह राहत की बात है कि मायावती उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी भावनाएं बढऩे का इंतजार करना चाहती हैं. पूर्व मुख्यमंत्री इस समय का उपयोग अपने कैडर को तैयार करने के लिए कर रही हैं. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, रायबरेली लोकसभा क्षेत्र से सोनिया गांधी के खिलाफ लडऩे के लिए वे पूर्व डीआइजी (स्टांप) और बीएसपी के जोनल कोऑर्डिनेटर राम लखन पासी का नाम पहले ही तय कर चुकी हैं.

पार्टी ने इस पर भी अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं कि यूपीए के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी के अविश्वास प्रस्ताव लाने पर वे उसका समर्थन करेंगी या नहीं. बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्र बस इतना ही कहते हैं, ‘‘मायावती के पास आखिरी फैसला लेने के लिए काफी समय है क्योंकि संसद का सत्र हाल-फिलहाल में नहीं है.’’

पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित संकल्प रैली राज्य विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद मायावती की पहली रैली थी. पांच लाख से अधिक की भीड़ में बीएसपी के नीले रंग में भगवा रंग भी घुला-मिला नजर आ रहा था. वहां मौजूद 10,000 ब्राह्मण ‘जय श्रीराम’ लिखे हुए भगवा गमछे लिए हुए थे. नसीमुद्दीन सिद्दीकी के नारे ‘ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा’ ने अगड़ी जातियों को नए सिरे से लुभाने की बीएसपी की कोशिशों को और भी स्पष्ट कर दिया. मायावती ने भी एक नया नारा उछाला, ‘पंजा, फूल, साइकिल, तीनों एक रंग में रंगे हुए, 2014 में मिलेंगे हाथी की सूंड पर चढ़े हुए.’ उम्मीद है, कांग्रेस को संदेश मिल गया होगा.

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