● आपको अभिनेता बनने की प्रेरणा कहां से मिली?
मुझे लगता है, यह खुद से भागने के बारे में है. यह अलग-अलग तरह के जीवन और दौर को जीने की, एक जमाने से दूसरे जमाने में छलांग लगाने की, एक राष्ट्रीयता से दूसरी राष्ट्रीयता में और एक बोली से दूसरी बोली में कदम रख सकने की क्षमता हासिल करने की बात है. कुल मिलाकर यह खुद को तलाशने के सफर में एक रचनात्मक अभिव्यक्ति है.
● कान फेस्टिवल में आपके लुक को उसकी शालीनता के लिए काफी सराहा गया. आखिर क्या सोच थी उसके पीछे?
यही कि इसे शालीन और ऑथेंटिक रखा जाए. हम सिर्फ ध्यान खींचने के लिए तड़क-भड़क वाला कुछ नहीं करना चाहते थे. पूरा ध्यान खादी के जरिए भारतीय फैब्रिक और उसके चरित्र को दिखाने पर था. खादी को एक आधुनिक और वैश्विक संदर्भ में पेश करने का माधव अगस्त्य का नजरिया मेरी सोच से मेल खाने वाला था. इस लुक में परंपरा का एहसास भी था और आधुनिकता भी. और मुझे लगता है इसी संतुलन ने इसे खास बनाया.
● ज्यादा खुलासा किए बिना क्या आप बता सकते हैं कि आने वाले प्रोजेक्ट्स में दर्शकों को आपका कौन-सा रूप देखने को मिलेगा?
अपने उन रूपों के अलावा जिन्हें मैं छिपाने की कोशिश करता हूं या जिनसे मुझे कभी-कभी डर लगता है. मुझे लगता है कि हमें थोड़ा इंतजार करना होगा.
● क्या हीरामंडी सीरीज आपके लिए निर्णायक मोड़ थी या आपको लगता है कि आपके करिअर की असल शुरुआत अब हो रही है?
इस बात से कोई इनकार ही नहीं कर सकता कि हीरामंडी मेरा ब्रेकथ्रू मोमेंट था. यह सब मिस्टर भंसाली और नेटफ्लिक्स की बदौलत मुमकिन हुआ, जिन्होंने मुझे ग्लोबल स्क्रीन पर पहुंचाया. यह सब किसी आशीर्वाद से कम नहीं. लेकिन मेरे असल करिअर की शुरुआत बहुत पहले हो चुकी थी. वास्तविक करिअर सिर्फ कामयाबी मिलने पर शुरु नहीं होता; इसकी शुरुआत उस वक्त भी हो जाती है जब आप कामयाब नहीं होते.
—अक्षिता जॉली

