सवाल+जवाब
● मातृत्व पर आधारित कहानियां आसानी से घिसी-पिटी धारणाओं में फंस सकती हैं. मां का सम में ऐसा क्या अलग और परंपरा को तोड़ने वाला लगा?
विनीता का किरदार मुझे इसलिए पसंद आया क्योंकि वह आदर्श मां नहीं है. हमने लंबे समय तक मां के एक ही ढर्रे वाले किरदार देखे हैं लेकिन यहां उसे गलती करने और कभी-कभी स्वार्थी होने की भी इजाजत है. जब आप मांओं को एक व्यक्ति के रूप में देखते हैं तो किस्सागोई ज्यादा सच्ची हो जाती है.
● 2026 के चार महीने बीतते-बीतते हैप्पी पटेल, बॉर्डर 2, सूबेदार और कोहरा सीजन 2 सरीखी आपकी चार फिल्में आ चुकी हैं. आपने पिछले कुछ सालों में जो जोखिम उठाए, क्या यह उन सबका मुकम्मल नतीजा है?
मैं लंबे समय से काम कर रही हूं और हमेशा वही चुनने की कोशिश की जिसने मुझे उत्साहित किया. कभी वह काम कर जाता है, कभी थोड़ा वक्त लगता है. अभी ऐसा लग रहा है जैसे वे बहुत सारे चुनाव एक साथ आ गए हैं.
● आपने करियर के अलग-अलग दौर में आमिर खान के साथ 3 इडियट्स (2009), लाल सिंह चड्ढा (2009) और अब हैप्पी पटेल (2026) में स्क्रीन साझा की. इस बढ़ती ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री को आप कैसे देखती हैं?
3 इडियट्स से लेकर लाल सिंह चड्ढा में उनकी मां बनने और अब एक नए अंदाज में उनके साथ काम करने का यह सफर कमाल का रहा है. आमिर अपने काम में इतने समर्पित रहते हैं कि केवल उनके साथ होने से आप बहुत कुछ सीख जाते हैं.
● स्ट्रीमिंग यानी कि ओटीटी ने फिल्म और टीवी कलाकारों के बीच की रेखाएं धुंधली कर दी है. क्या इस बदलाव से आपके अपने करियर को देखने के तरीके में बदलाव आया है?
इस लिहाज से पहले हमारे लिए खांचे बहुत साफ-साफ बंटे हुए थे: ये टीवी के ऐक्टर और ये सिनेमा के. मगर अब वह सारा फर्क और फासला खत्म हो चुका है. मेरे लिए हमेशा काम महत्वपूर्ण रहा है, माध्यम नहीं. इसलिए मुझे लगता है कि मेरा नजरिया बहुत नहीं बदला, पर हां, अब संभावनाएं बहुत बढ़ गई हैं, जो सचमुच अच्छी बात है.
—पॉलोमी दास

