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"मैं कमाल की युवा नृत्यांगनाओं के बीच रहती हूं, जिनसे मुझे ऊर्जा मिलती है"

65 वर्ष की उम्र में भी 16 साल की तरह कथक नृत्य करती नृत्यांगना अदिति मंगलदास ने 11 अप्रैल को मुंबई के ग्रैंड थिएटर में होने वाली अपनी जीवन की पहली युगल प्रस्तुति ‘महक’ पर बातचीत की.

Q+A
अदिति मंगलदास
अपडेटेड 16 अप्रैल , 2026

सवाल+जवाब

महक में आपने ब्रिटिश-भारतीय कलाकार आकाश ओडेदरा के साथ जोड़ी बनाई है. युगल प्रस्तुति के लिए मन बनाने में आपको इतना समय क्यों लगा?

मेरे लिए प्रस्तुति में पूरी तरह डूबना जरूरी है. उसमें कथा कहां है? उसके साथ हम कहां पहुंच रहे हैं? कई अलग स्वरूपों में करने के अवसर आए लेकिन मैं चाहती थी कि सही मायनों में मेल हो. उस तरह का गहरा मेल किसी के साथ संभव हो नहीं सका.

महक एक उम्रदराज महिला और एक युवा पुरुष के बीच के संबंधों पर केंद्रित है. एक युवा कलाकार के साथ लय-ताल मिलाते हुए थिरक कर आप यह भी साबित कर रही हैं कि बढ़ती उम्र का आपके लिए कोई अर्थ नहीं.

मैं इस तरह से कतई नहीं सोचती क्योंकि ऐसी सोच कई मुश्किलें खड़ी करती है. मंच पर अगर 40 साल का कमाल का एक बंदा मेरे साथ प्रेम में पड़ने वाला है, फिर तो मैं खुद को 16 साल का महसूस करूंगी. महक यही दर्शाता है कि प्रेम सदाबहार होता है. उम्रदराज महिला और जवां लड़के के संबंधों में पचास तरह की पाबंदिया होती हैं जबकि इसका उलटा हो तो किसी को ऐतराज नहीं.

आप शारीरिक ही नहीं बल्कि रचनात्मक रूप से भी अपने शिखर पर बनी हुई हैं. नृत्य के प्रति अपने जुनून और कठोर अनुशासन को आप कैसे साधे रखती हैं?

मेरा बेटा इसे बड़े अच्छे ढंग से कहता है, ''मम्मी जाहिर है आप 20 की उम्र जैसा डांस नहीं कर सकतीं.’’ लेकिन नृत्य का आखिर अर्थ क्या है? बस 100 चक्कर लगा लेना? शारीरिक, भावनात्मक और बौद्धिक गहराई हमेशा उसी ऊंचाई पर नहीं बनी रहने वाली. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, ठहराव जरूरी हो जाते हैं. उन्हीं ठहरावों पर आप ऊर्जा बटोरते हैं और फिर से खिल उठते हैं.

आप शरीर रूपी मंदिर को कैसे संभालती हैं ताकि आज भी वह पहले जितनी बारीकियों के साथ परफॉर्म कर सके?

बहुत पहले मुझे एहसास हो गया था कि इसका कोई शॉर्टकट नहीं. वजन नियंत्रण संबंधी ट्रेनिंग, कथक रियाज, योग और श्वास नियंत्रण क्रिया, सभी इसमें मदद करते हैं. इसके अलावा, मैं बहुत तनाव नहीं लेती. मैं कमाल की युवा नृत्यांगनाओं के बीच रहती हूं, जिनसे मुझे ऊर्जा मिलती है. निजी परिवार और नृत्य परिवार दोनों की अहमियत है. प्रेम और फिक्र के ये बढ़ते दायरे ही नृत्य सागर में गोता लगाने को सार्थक बनाते हैं.

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