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‘‘यह हमारा वेंचर नहीं, संकल्प है. जिद है कि बिहार को सुधार कर रहेंगे’’

सुपौल जिले के किशनपुर कैंप में पदयात्रा के बाद रात में आराम करने से पहले प्रशांत किशोर ने विशेष संवाददाता पुष्यमित्र से लंबी बातचीत की. पेश हैं उसके प्रमुख अंश:

प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर
अपडेटेड 4 अक्टूबर , 2024

● बिहार में ही काम करना है, यह कब तय किया? 2015 में जब बिहार आए थे तब? 2020 में जद (यू) से अलग होकर 'बात बिहार की’ कैंपेन शुरू किया तब? या जन सुराज अभियान शुरू किया तब?

बिहार का लड़का हूं, बिहार सुधरे यह मेरे मन में हमेशा से रहा. 2015 में नीतीश कुमार की मदद करने का मकसद भी यही था. तब सात निश्चय कार्यक्रम बनवाया, विकास मिशन की स्थापना कराई. लेकिन देखा कि बिहार की स्थिति किसी तरह से सुधर नहीं रही, तब मैंने सोचा कि मैं अपनी शक्ति-बुद्धि और क्षमता का इस्तेमाल कर बिहार के उस वर्ग की मदद करूं, जो राज्य में एक नया विकल्प चाहते हैं. 'बात बिहार की’ जब शुरू किया था, तब भी यही योजना थी कि एक करोड़ लोगों को इकट्ठा करके एक नया दल बनाया जाएगा. लेकिन कोविड आ गया तो हम गांव-गांव जा नहीं सके. कोविड खत्म होते ही हम वापस आए, तभी से यह अभियान चला रहे हैं.

● जन सुराज अभियान में रणनीतिकार प्रशांत किशोर की स्ट्रैटजी कितनी है, क्या तैयारियां कीं?

तैयारी की क्या जरूरत है? यहीं पला-बढ़ा हूं. हर चीज को जानता-समझता हूं. चल रहा हूं तो (स्ट्रैटजी) साथ-साथ तैयार भी हो रही है, अलग से तैयारी करके नहीं आया हूं. हां, मेरी रिसर्च, मेरा अनुभव, मेरा संसाधन, मेरी ताकत वह सब कुछ इस अभियान के लिए, बिहार के लिए समर्पित है.

● जन सुराज के दफ्तर में राजनेता कम, प्रोफेशनल अधिक दिखते हैं.

आप उनके गेटअप से ऐसा अनुमान लगा रहे हैं तो यह आपका देखने का नजरिया है. आपके दिमाग में सेट है कि बिहार में जो राजनीति करता है, वह बेवकूफ दिखना चाहिए. वह शर्ट के ऊपर गंजी पहने तो आपको नेता की तरह दिखेगा. अगर कोई बढ़िया पढ़ा-लिखा व्यक्ति बिहार में राजनीति करने आया है, तो इसमें दिक्कत क्या है?

● पहले आप जाति और धर्म के मुद्दे से परहेज करते थे. इस साल कर्पूरी जयंती के बाद से आप पटना में अलग-अलग जातियों और धर्मों के समूह के साथ बैठक कर रहे हैं.

सवाल पूछने से पहले थोड़ा तो रिसर्च करके आओ भाई. किस जाति की बैठक हुई है? पटना में चार बैठक हुई हैं. 28 अगस्त को पदाधिकारियों की बैठक थी, उसके बाद युवाओं की बैठक हुई है, 1 सितंबर को. उसके बाद महिलाओं की बैठक हुई. उसके बाद मुस्लिम समाज की बैठक हुई. किस जाति की बैठक हुई?

● आपने कहा कि हमारा पहला अध्यक्ष दलित होगा, दूसरा अति पिछड़ा, तीसरा मुसलमान.

यह भी आपको समझ नहीं आया. बिहार में मोटे तौर पर पांच समूह हैं. दलित, अति पिछड़ा, मुसलमान, पिछड़ा और सवर्ण समाज. तय हुआ कि हर वर्ग से एक काबिल आदमी एक साल के लिए जनसुराज को लीड करेगा. सवाल उठा कि पहला कौन, दूसरा कौन. अगर आप संपत्ति का बंटवारा कर रहे हैं तो आधार क्या बनाएंगे? बंटवारा तो बराबर ही करेंगे. पर अगर कोई बच्चा कमजोर है तो कोशिश होगी कि उसको पहला हक दिला दिया जाए. जो सबसे पीछे है, उसको पहले हक तो मिलना चाहिए.

● जन सुराज अभियान में दो साल बहुत पैसा खर्च हुआ. आने वाले दिनों में भी होगा. लोग जानना चाहते हैं कि इतना पैसा कहां से आ रहा है. 

हमने दस बरस में कई राजनेताओं को चुनाव जिताने में मदद की है. हम उनके आगे हाथ फैला रहे हैं, कह रहे हैं कि बिहार की गरीब जनता को राजनैतिक विकल्प देना है, इसमें मदद कीजिए. वे लोग पैसा दे रहे हैं. अगर तेजस्वी बिहार की जनता की लूट के पैसे से पार्टी चला सकता है, तो हमारे बनाए हुए, हमसे मदद लिए हुए लोगों की दस राज्य में सरकार है, हमको अपना अभियान चलाने के लिए पैसा नहीं मिलेगा? किसी को शक है कि गलत पैसा है, तो जांच करवा ले, छापा पड़वा ले.

● यह अभियान बिहार के बाद दूसरे राज्यों में भी जाएगा?

बिहार में अगर चीज बनेगी तो निश्चित तौर पर यह बिहार में नहीं रुकेगा. पर जब तक बिहार में इसको नहीं कर लेंगे, बाहर जाने का सवाल नहीं उठता.

● यह आपका नया वेंचर है?

वेंचर क्या होता है. यह हमारा संकल्प है. बिहार को सुधारने के लिए सब कुछ दांव पर लगाए हैं. जिद है कि बिहार को सुधारेंगे.

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