प्र. यह धारणा है कि आप नौसिखिया हैं. अपने से वरिष्ठ मंत्रियों से आप कैसे काम ले रहे हैं?
वे सब सहयोगी हैं. मैं उनकी सुनता हूं, सम्मान देता हूं और उचित व्यवहार सुनिश्चित करता हूं. विधायकों समेत कोई भी मुझसे कभी भी मिल सकता है. जहां तक नौसिखिया होने की बात है तो कोई जो पिछले तीन दशक में हर स्तर पर पार्टी का पदाधिकारी रहा है, मैं कह सकता हूं कि राजनीति में, अगर आपकी विचारधारा है और आप सार्वजनिक जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए काम करते हैं, आप कामयाब हो सकते हैं.
• राजस्थान के लिए आपका विजन क्या है?
हमारे पास पर्याप्त जमीन है. अगर हमें पानी और बिजली मिल जाए, हमारे यहां फलते-फूलते उद्योग, पर्यटन, कृषि सब कुछ होगा. क्या न होगा? केंद्र की मदद से मैंने पूर्वी नदी नहर परियोजना और इंदिरा गांधी नहर के लिए अतिरिक्त पानी की खातिर पड़ोसी राज्यों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यमुना का पानी हरियाणा के ताजेवाला बैराज से आएगा. मैंने उदयपुर के लिए देवास अरावली परियोजना तैयार की है. बिजली के क्षेत्र में हमने उत्पादन और अतिरिक्त बिजली प्राप्त करने के लिए 1.60 लाख करोड़ रुपए के निवेश के लिए केंद्र के साथ सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए हैं.
हमारे शहर ग्रामीण आबादी की आवक के कारण बढ़ते जा रहे हैं. वे लोग मुख्य रूप से बेहतर बुनियादी ढांचे के लिए आ रहे हैं. मेरा उद्देश्य ग्रामीण सुविधाओं—बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य का विस्तार करना और इस कारण होने वाले पलायन को रोकना है. मैंने कलेक्टरों और एसडीएमों से लंबित मामलों की ग्राम वार सूची बनाने के लिए कहा है ताकि घर के दरवाजे पर ही इनका समाधान किया जा सके. अभी तो वे गरीबों को तारीखें देते रहते हैं, जिससे उनके लिए सरकारी दफ्तरों तक आना मंहगा पड़ता है.
• आपका नजरिया कांग्रेस से किस तरह अलग है?
कांग्रेस की पंचवर्षीय योजना थी. जब तक वे उन पर अमल करते, परियोजना के विस्तार के लिए नई मांग आ जाती. मेरा प्रयास-जिसे कि मैंने मोदी सरकार से सीखा है—अगले 25 से 30 साल दिमाग में रखकर काम करने का है. फिर चाहे वह सड़क की चौड़ाई हो, पेयजल या सीवरेज के पाइपों का घेरा बढ़ाना हो, या अस्पतालों की क्षमता बढ़ानी हो.
• लेकिन आपको भारी भरकम कर्ज में लदा राज्य विरासत में मिला है. ऐसी लंबी अवधि की परियोजनाओं के लिए पैसा कहां से आएगा?
मैं एक बार में पैसा नहीं खर्च कर रहा. परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा.
• आपने लोगों की सीधी मदद के लिए क्या कदम उठाए हैं?
हमने डीजल और पेट्रोल की कीमतों में खासी कमी की है और इन्हें मानकीकृत किया है—कई जिलों में ये अलग-अलग थीं. साथ ही, सीमांत जिलों में पेट्रोल पंप दूसरी तरफ सस्ता होने से बंद हो रहे थे. वह सब रुक गया है.
• यानी राजनीति आपके लिए आसान हो गई है?
राजनीति दोधारी तलवार है और हम इसकी धार पर चलते हैं. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह काम करने की कोशिश कर रहा हूं जिन्होंने ऐसा बदलाव किया है कि मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को अपने क्षेत्रों और बताए गए इलाकों में बार-बार जाना पड़ता है. मैं काफी यात्रा करता हूं और अपने मंत्रियों के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों से उम्मीद करता हूं कि वे नियमित रूप से जमीनी स्थिति का जायजा लें.
• आपके पूर्ववर्ती अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे ने 15 साल तक कभी भी एक दूसरे को नजर मिलाकर नहीं देखा, यहां तक कि एक कप चाय पर भी साथ नहीं बैठे. लेकिन आप दोनों से मिले हैं. क्यों?
राजनीति और विचारधारा अलग बात है, निजी संवाद दूसरी बात. मैं विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल भाषा में संयम पसंद करता हूं. मैंने गहलोत से एक बार कार्यभार संभालने के बाद शिष्टाचार के नाते और अभी उनके बीमार होने पर की. वसुंधरा राजे पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हैं. जब मेरे पिता को चोट लगी तो दोनों ने मुझसे उनका हालचाल पूछा.
• क्या इसका मतलब है कि गहलोत शासन के खिलाफ घोटालों के आरोपों की जांच में आप नरमी बरतेंगे, जैसे कोटा रिवर फ्रंट, जिसे आपकी पार्टी ने चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा बनाया था?
मैं इसे स्पष्ट कर दूं. जिस किसी ने कोई गलती की है तो उसे सजा मिलनी ही चाहिए और मिलेगी, वह भले ही कोई भी हो.
• आम चुनाव में आप अपनी पहली चुनावी बाधा में झटका खा गए. अब आपको उपचुनाव की बड़ी चुनौती का सामना करना है: पांच सीटें जहां विपक्ष के विधायक लोकसभा सीटों पर जीते.
लोकसभा नतीजों का विभिन्न स्तरों पर विश्लेषण किया गया है और इस पर विचार विमर्श के लिए एक और लंबी बैठक की जरूरत पड़ेगी. हमारी पार्टी उपचुनावों में कोई कसर नहीं छोड़ेगी.
• क्या बतौर मुख्यमंत्री आपके रोजमर्रा के जीवन में बदलाव आया है?
अगर आप काम के घंटे के हिसाब से बात करें तो बहुत नहीं. पार्टी के पदाधिकारी के रूप में मैं अक्सर रात में सफर करता था. यहां तक कि जब जयपुर मुख्यालय होता था, मैं आधी रात को ही घर पहुंचता था. आज भी मैं ऐसा ही करता हूं.

