• लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की पहली प्रदेश कार्यसमिति अपने उद्देश्य में कितना कामयाब हुई?
पहली बार प्रदेश कार्यसमिति में 3,000 भाजपा के नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे. सबसे एक साथ रणनीति बनाई. विपक्षी दलों ने भाजपा के प्रति जो कुप्रचार किया है. नकारात्मक एजेंडा फैलाया. हम उससे निबटने में कामयाब न हो सके. यह स्थिति ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगी. जनता सब समझ रही है. कार्यसमिति में विपक्ष के इसी एजेंडे से आक्रामक ढंग से निबटने की योजना बनाई है.
• सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का पीडीए नारा भाजपा को यूपी में परेशान कर रहा है?
भाजपा सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के नारे के साथ आगे बढ़ रही है. संगठन में आधे से ज्यादा दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं की मौजूदगी है. इसी तरह सरकार, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों में 50 फीसद से ज्यादा पर दलित और पिछड़े नेताओं को साथ लिया गया है.
• लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा कार्यकताओं के बीच असंतोष सतह पर आ गया है?
प्रदेश से लेकर बूथ तक भाजपा का बहुत बड़ा संगठन है. विचारधारा को साथ लेकर आगे बढ़ने पर परस्पर छोटे-मोटे मनमुटाव की बातें आती हैं. इन्हें मिल-बैठ कर सुलझाया जा रहा है. अगले 15 दिनों के भीतर बूथ स्तर तक सभी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर उनसे व्यक्तिगत तौर पर संपर्क कर आगे बढ़ा जाएगा.
• भाजपा कार्यकर्ता अपनी ही सरकार के कामकाज पर अंगुली उठा रहे हैं?
सोशल मीडिया के जरिए अभी हाल में कुछ नेताओं के बयान सामने आए हैं जिनमें वे प्रदेश सरकार के कामकाज की आलोचना करते दिख रहे हैं लेकिन हकीकत कुछ और है. ज्यादातर ऐसे वीडियो आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआइ) से बनाए गए हैं. इसके बावजूद पार्टी ऐसे मामलो की गंभीरता से पड़ताल कर रही है.
• सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य भी काफी कमजोर हुआ है?
ऐसा नहीं है. सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य बेहतर करने के लिए बनी कोर कमेटी की नियमित बैठक हो रही है. कार्यकर्ता जनप्रतिनिधियों के जरिए मसलों को सरकार के सामने पेश कर रहे हैं और उनका समाधान भी हो रहा है. केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी अपने स्तर पर जनता की समस्याओं के निस्तारण के लिए गंभीर प्रयास कर रही हैं.
• बड़ी संख्या से दूसरे दलों के नेताओं को भाजपा में शामिल करने पर भी कार्यकर्ता नाराज हैं?
दूसरे दलों के जो भी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के साथ जुड़ना चाहते हैं, उन्हें हम रोक तो सकते नहीं हैं. हां, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ये नेता पार्टी की विचारधारा स्वीकार कर सबको साथ लेकर ही पार्टी के भीतर काम करें.
• हारे नेताओं को पद देकर पुरस्कृत करने पर कार्यकर्ता खुश नहीं हैं?
कई बार परिस्थतिजन्य निर्णय लेने पड़ते हैं. किसी के चुनाव हारने के पीछे कई परिस्थतियां जिम्मेदार होती हैं. जरूरी नहीं कि जिसे चुनावी सफलता नहीं मिली वह पार्टी के काम का नहीं. सर्वस्पर्शी और सर्वव्यापी नीति के तहत जरूरत के हिसाब से पार्टी नेताओं को दायित्व सौंपती है.
• लोकसभा चुनाव नतीजों की समीक्षा के दौरान कई नेताओं पर भितरघात करने का आरोप भी लगा है?
कुछ जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें पार्टी नेताओं पर अपने ही उम्मीदवार के विरोध में काम करने का आरोप कार्यकर्ताओं ने लगाया है. ऐसे मामले पार्टी की अनुशासनात्मक समिति के हवाले कर दिए गए हैं. समिति की संस्तुति पर भितरघात करने वालों पर सख्त कार्रवाई करेंगे.
• क्या भविष्य में संगठन में बदलाव संभव है?
भाजपा में यह सतत प्रक्रिया है. मंडल, बूथ तक सक्रिय सदस्यता अभियान शुरू होने वाला है. इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव संभवत: नवंबर तक हो जाएगा.

