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"हमारे लिए समर्थन साफ दिखता है"

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को भरोसा है कि मोदी शासन तथा उनकी सरकार के प्रदर्शन के बल पर सत्तारूढ़ महायुति निर्णायक बढ़त ले चुका है. इंडिया टुडे के सीनियर एसोसिएट एडिटर धवल एस. कुलकर्णी ने विभिन्न मुद्दों पर उनसे बातचीत की. पेश है बातचीत के संपादित अंश

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
अपडेटेड 5 जून , 2024

नोट - यह इंटरव्यू 4 जून को जारी हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले छपा था

महाराष्ट्र में हवाएं किस दिशा में बह रही हैं?

महायुति के प्रति समर्थन साफ दिखता है. हमारी सरकार ने पिछले दो साल में जनता के हित में निर्णय लिए हैं. जिन परियोजनाओं को महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने बंद कर दिया था, उनको हमने फिर से शुरू किया है. हमने शासन आपल्या दारी जैसी योजनाएं शुरू की हैं. हमने कौशल विकास कार्यक्रम, ऋण, महिलाओं, युवाओं, किसानों और स्टार्टअप्स के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की है. विपक्ष कुछ भी कहता रहे, इन फैसलों से लोगों के बीच सकारात्मक भाव जगा है. मोदी जी और हमारी सरकार ने जो काम किया है और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की योजनाओं के कारण लोग महसूस कर रहे हैं कि यह सरकार उनके लिए काम करती है. इसका असर चुनाव में दिखेगा. 

धारणा है कि राजग को महाराष्ट्र में कुछ नुक्सान हो सकता है. 

उद्धव ठाकरे ने गठबंधन धर्म तोड़ा. उन्होंने भाजपा की पीठ में छुरा भोंका और मुख्यमंत्री बन गए. लोगों ने इसे पसंद नहीं किया. बाद में हमने सत्ता परिवर्तन किया जो एक व्यावहारिक कदम था. उद्धव जी घर में ही रहा करते थे और अपना फेसबुक लाइव करते थे. वे मंत्रालय नहीं आए. हम 24x7 काम करते थे. इसलिए लोग उनको वोट देंगे जो घर में बैठे रहते थे या फिर उनको जिन्होंने काम किया? 

क्षेत्रीय नैरेटिव के साथ मुंबई में भाषायी विभाजन बढ़ता नजर आ रहा.

 विपक्ष नैरेटिव की कोशिश कर रहा है. जमीनी सचाई अलग है. वे महा विकास अघाड़ी के लिए मुस्लिम समर्थन जुटाना चाहते हैं. उनके प्रौपगैंडा का असर अल्पसंख्यकों व बहुसंख्यकों पर होगा. 

आपका मतलब है कि जवाब में बहुसंख्यक भी एकजुट होंगे?

सौ टका. उनकी रैलियों में पाकिस्तानी झंडे दिखाए जाते हैं. (1993 बम धमाके के गुनहगार) इकबाल मूसा, याकूब मेमन के लोग और बम धमाकों के आरोपियों को वहां देखा जा सकता है. मुंबई बम धमाकों में बेगुनाह मारे गए. वे आरोपियों को साथ लेकर घूम रहे हैं. सवाल उठाए जा रहे कि (तब एसआईटी मुखिया हेमंत करकरे (26/11 के आतंकवादी हमलों में) (पाकिस्तान आतंकवादी अजमल) कसाब की गोलियों से मारे गए था या नहीं. यह हमारे शहीदों का अपमान है.

आमतौर पर देखें तो सियासी विमर्श की गुणवत्ता गिर रही है.

 मैं पूरी तरह सहमत हूं. वे इस बात को नहीं पचा पाए हैं कि उनकी सरकार हटा दी गई है और एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री हैं. उन्हें सचाई स्वीकार करनी चाहिए. लोग उनका साथ क्यों छोड़ रहे हैं? मुंबई के करीब 50 पार्षद क्यों हमारे साथ आ गए हैं? हम पर अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं. 

कमजोर तबकों जैसे दलितों-आदिवासियों में डर है कि संविधान को बदल दिया जाएगा और उनका आरक्षण छीन लिया जाएगा.

इस नैरेटिव को विपक्ष ने गढ़ा है. अगर किसी को 400 या 450 सीटें भी मिल जाएं तो भी बाबासाहेब (आंबेडकर) के संविधान को कोई बदल नहीं सकता. जब तक सूरज-चांद रहेगा तब तक यह मौजूद रहेगा.

वेदांता-फॉक्सकॉन जैसी बड़ी औद्योगिक परियोजनाएं महाराष्ट्र छोड़ गुजरात चली गईं.

वेदांता गुजरात कब गई? उस समय हमारी सरकार महज दो महीने की थी. मैंने मोदी साहब से बात की थी. उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले दो महीने में नहीं लिए जाते हैं. इन तैयारियों में समय लगता है और उन्हें महसूस हो गया था कि एमवीए सरकार उनका सहयोग और समर्थन नहीं कर रही है. फैसला एमवीए के समय पर लिया गया था. जिन दो साल में एमवीए सत्ता में था, राज्य प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने में पिछड़ गया. हमारी सरकार ने सुनिश्चित किया कि महाराष्ट्र एफडीआई को लुभाने में अव्वल रहे. हमने दो साल में दावोस में 5 लाख करोड़ रुपए के सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए और उनमें से 70 फीसद पर काम चल रहा है. 

मराठा आरक्षण आंदोलन से सामाजिक अशांति हुई.

पवार साहब ने मराठों को आरक्षण नहीं दिया जबकि वे दे सकते थे. मराठों के समर्थन से कई लोगों को लाभ हुआ और सत्ता मिली मगर उन्होंने मराठों को वंचित रखा. मैं जब मुख्यमंत्री बना तो मैंने इसे प्राथमिकता दी और कहा कि मराठों को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) कोटे को प्रभावित किए बिना आरक्षण दिया जाएगा. हमने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया और मराठों को 10 फीसद आरक्षण दिया. (मराठा कार्यकर्ता मनोज) जरांगे पाटील ने मराठों के लिए कुणबी प्रमाणपत्र की मांग की जो उन्हें मराठवाड़ा में नहीं मिल रहा था. हमने यह प्रमाणपत्र देना शुरू किया और अब तक लाखों को दिए जा चुके हैं. 

क्या उप-मुख्यमंत्री अजित पवार और उनकी एनसीपी के सरकार में शामिल होने से आप पर भाजपा की निर्भरता घट गई है? मंत्रिमंडल का विस्तार भी लंबित है.

यह कौन कह रहा है? उद्धव ठाकरे? लोग तो ऐसा नहीं कह रहे हैं. हमारा महत्व नहीं घटा है. हमने 15 लोकसभा सीटें हासिल की हैं. मंत्रिमंडल का विस्तार होगा.

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